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Hisar News: गोली मारकर पत्नी की हत्या के दोषी पति को आजीवन कारावास की सजा
Sun, 30 Mar 2025 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 30 Mar 2025 01:03 AM IST
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हिसार। उकलाना थाना क्षेत्र के मुगलपुरा गांव में दो साल पहले गोली मारकर पत्नी की हत्या के दोषी पति रामनिवास को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश निशांत शर्मा की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 80 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अदालत ने रामनिवास को 25 मार्च को दोषी करार दिया था। रामनिवास ने अपने बच्चों पर भी फायरिंग की थी पर गनीमत रही कि उन्हें गोली नहीं लगी थी। जुलाई 2023 में पिंकी उकलाना थाने में रिपोर्ट में बताया था कि वह तीन भाई-बहन हैं। पिता रामनिवास खेतीबाड़ी करते हैं। 9 जुलाई को भादरा से मामा लख्मीचंद व मामी रोशनी मम्मी-पापा से मिलने के लिए आए हुए थे।
शाम को खाना खाने के बाद मामा-मामी मेरी मौसी कृष्णा के घर चले गए। पिता रामनिवास शराब पीकर अक्सर मां के साथ झगड़ा करते थे। 10 जुलाई की सुबह करीब 9.30 बजे पापा शराब पीकर घर आए और मुझसे लाइसेंसी बंदूक और कारतूस का डिब्बा मांगा।
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उन्होंने कहा कि बंदूक को बरवाला में जमा करवाना है। इस पर उसने लाइसेंसी बंदूक और कारतूस का डिब्बा लाकर उन्हें दे दिया। इसके बाद पापा चारपाई पर बैठकर बंदूक साफ करने लगे। इस दौरान मां सुरता सब्जी बनाने की तैयारी कर रही थी। वह हैंडपंप से पानी भर रही थी। तभी गोली चलने की आवाज सुनाई दी।
मौके पर पहुंचकर देखा कि पापा ने मां को गोली मार दी है। वह घबरा कर ताऊ राजेश के घर की तरफ दौड़ी, तो पापा पीछे बंदूक लेकर दौड़े। इसी गली में सामने से भाई अशोक आ रहा था।
पापा ने मेरे और भाई अशोक पर भी गोली चलाई, लेकिन लगी नहीं। शोर सुनकर मौसी की लड़की सुनीता भागकर गली में आई पापा के हाथ से बंदूक को छीन लिया। संवाद
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अदालत ने रामनिवास को 25 मार्च को दोषी करार दिया था। रामनिवास ने अपने बच्चों पर भी फायरिंग की थी पर गनीमत रही कि उन्हें गोली नहीं लगी थी। जुलाई 2023 में पिंकी उकलाना थाने में रिपोर्ट में बताया था कि वह तीन भाई-बहन हैं। पिता रामनिवास खेतीबाड़ी करते हैं। 9 जुलाई को भादरा से मामा लख्मीचंद व मामी रोशनी मम्मी-पापा से मिलने के लिए आए हुए थे।
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शाम को खाना खाने के बाद मामा-मामी मेरी मौसी कृष्णा के घर चले गए। पिता रामनिवास शराब पीकर अक्सर मां के साथ झगड़ा करते थे। 10 जुलाई की सुबह करीब 9.30 बजे पापा शराब पीकर घर आए और मुझसे लाइसेंसी बंदूक और कारतूस का डिब्बा मांगा।
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उन्होंने कहा कि बंदूक को बरवाला में जमा करवाना है। इस पर उसने लाइसेंसी बंदूक और कारतूस का डिब्बा लाकर उन्हें दे दिया। इसके बाद पापा चारपाई पर बैठकर बंदूक साफ करने लगे। इस दौरान मां सुरता सब्जी बनाने की तैयारी कर रही थी। वह हैंडपंप से पानी भर रही थी। तभी गोली चलने की आवाज सुनाई दी।
मौके पर पहुंचकर देखा कि पापा ने मां को गोली मार दी है। वह घबरा कर ताऊ राजेश के घर की तरफ दौड़ी, तो पापा पीछे बंदूक लेकर दौड़े। इसी गली में सामने से भाई अशोक आ रहा था।
पापा ने मेरे और भाई अशोक पर भी गोली चलाई, लेकिन लगी नहीं। शोर सुनकर मौसी की लड़की सुनीता भागकर गली में आई पापा के हाथ से बंदूक को छीन लिया। संवाद