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आठ हजार का सरदार हूं, मुंह में अंगुली मत डालना : आईजी
ब्यूरो/अमर उजाला/हिसार
Updated Thu, 02 Jun 2016 12:44 AM IST
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- फोटो : Bureau
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जाट आरक्षण आंदोलन की आहट के बीच आईजी ओपी सिंह ने इशारों-इशारों में चेतावनी दी। दंगों और अपराध को लेकर उन्हें समझाने की कोशिश की। वहीं गुदगुदाया भी और सख्त लहजे में चेताया भी। जीजेयू में आयोजित यूथ अगेंस्ट वॉयलेंस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि शांति आम आदमी का अधिकार है। शांति बनाए रखनी होगी। मैं यहीं का हूं, यहीं का रहूंगा और यहां कोई भी नुकसान नहीं होने दूंगा। हमारे पास पावर है। मैं आठ हजार का सरदार हूं। हमारे मुंह में अंगुली मत डालना। मेरी लड़ाई अपराधियों और हथियारों से है। आपसे नहीं।
शेर-बकरी अब एक घाट पर पीते हैं पानी, 354 से बचकर रहें
आईजी ओपी सिंह ने कहा कि आज लड़ाई-झगड़े का नहीं, बहस करके मामलों को सुलझाने का तंत्र है। आज के समय में बकरी और शेर एक ही घाट पर पानी पीते हैं। शेर-बकरी को खा नहीं सकता। अगर शेर बकरी की ओर आंख उठाकर देखता है तो बकरी तुरंत 354 का मुकदमा दर्ज करवा सकती है।
एक प्रतिशत लड़के होते हैं चालबाजों का शिकार
आईजी ने कहा कि 99 प्रतिशत युवा मेहनती हैं। वे परिश्रम करते हैं, लेकिन एक प्रतिशत हैं, जो चालबाजों की चंगुल में फंस जाते हैं, जिससे माहौल खराब होता है। उन्होंने कहा कि 2011 के बाद हमारे 300 गांव के 4900 लड़के लूट की घटना कर चुके हैं, जिनमें से 2700 बेल जंप पर हैं और 1200 कोर्ट ही नहीं गए।
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... तो गांव वाले हो जाएंगे शहरों के गुलाम
गांव में 60 एकड़ वालों की चार एकड़ जमीन रह गई है। दंगे के केस आते हैं। जमीन बेचकर वकील को पैसा देते हैैैं। क्या हम अपने विवाद को मिल-बैठकर नहीं सुलझा सकते। गांव में इज्जत के लिए लड़ते हैं। यहां थाने में आकर नीचे बैठते हैं तो कौन सी इज्जत बच जाती है। अगर यही सब चलता रहा तो गांव वाले एक दिन शहर वालों केे गुलाम हो जाएंगे।
जगह ठीक रखो, मौज करो, कश्मीर नहीं बनने देना
उन्होंने कहा कि हमने लड़ने-झगड़ने के लिए जन्म नहीं लिया है। पिछले पांच सालों में 200 लोगों को गोली मारी गई है, लेकिन क्यूं, यह कोई पाकिस्तान का बॉर्डर नहीं है। हमें यहीं रहना है, यहीं जीना है। अपनी जगह को ठीक रखोगे तो मौज करोगे। हमें यहां कश्मीर नहीं बनने देना है।
पुलिस को समझाया
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शेर-बकरी अब एक घाट पर पीते हैं पानी, 354 से बचकर रहें
आईजी ओपी सिंह ने कहा कि आज लड़ाई-झगड़े का नहीं, बहस करके मामलों को सुलझाने का तंत्र है। आज के समय में बकरी और शेर एक ही घाट पर पानी पीते हैं। शेर-बकरी को खा नहीं सकता। अगर शेर बकरी की ओर आंख उठाकर देखता है तो बकरी तुरंत 354 का मुकदमा दर्ज करवा सकती है।
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एक प्रतिशत लड़के होते हैं चालबाजों का शिकार
आईजी ने कहा कि 99 प्रतिशत युवा मेहनती हैं। वे परिश्रम करते हैं, लेकिन एक प्रतिशत हैं, जो चालबाजों की चंगुल में फंस जाते हैं, जिससे माहौल खराब होता है। उन्होंने कहा कि 2011 के बाद हमारे 300 गांव के 4900 लड़के लूट की घटना कर चुके हैं, जिनमें से 2700 बेल जंप पर हैं और 1200 कोर्ट ही नहीं गए।
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... तो गांव वाले हो जाएंगे शहरों के गुलाम
गांव में 60 एकड़ वालों की चार एकड़ जमीन रह गई है। दंगे के केस आते हैं। जमीन बेचकर वकील को पैसा देते हैैैं। क्या हम अपने विवाद को मिल-बैठकर नहीं सुलझा सकते। गांव में इज्जत के लिए लड़ते हैं। यहां थाने में आकर नीचे बैठते हैं तो कौन सी इज्जत बच जाती है। अगर यही सब चलता रहा तो गांव वाले एक दिन शहर वालों केे गुलाम हो जाएंगे।
जगह ठीक रखो, मौज करो, कश्मीर नहीं बनने देना
उन्होंने कहा कि हमने लड़ने-झगड़ने के लिए जन्म नहीं लिया है। पिछले पांच सालों में 200 लोगों को गोली मारी गई है, लेकिन क्यूं, यह कोई पाकिस्तान का बॉर्डर नहीं है। हमें यहीं रहना है, यहीं जीना है। अपनी जगह को ठीक रखोगे तो मौज करोगे। हमें यहां कश्मीर नहीं बनने देना है।
पुलिस को समझाया
उन्होंने इस मौके पर पुलिस को भी युवाओं से बेहतर व्यवहार करने की नसीहत दी। कहा कि लड़कों को तंग न करें। इसके लिए आपको कोई ट्रेनिंग देने की जरूरत नहीं है। युवा गलती करते हैं तो उन्हें अपने बेटे की तरह समझाओ।