{"_id":"62e9657f9657051d3c1f6b3f","slug":"heartfelt-tribute-to-state-poet-hisar-news-hsr638273979","type":"story","status":"publish","title_hn":"राज्य कवि उदयभानु हंस को दी भावभीनी श्रद्धांजलि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राज्य कवि उदयभानु हंस को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिसार। राज्य कवि उदयभानु हंस को मंगलवार को उनकी पुण्यतिथि पर पीएलए में आयोजित एक कार्यक्रम में काव्य गोष्ठी कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसमें साहित्य कला संगम के संरक्षक व वरिष्ठ एडवोकेट पीके संधीर ने कहा कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसमें राज्य कवि को याद किया गया और वह भी एक स्तरीय काव्य गोष्ठी के माध्यम से। यही सच्ची श्रद्धांजलि है।
संगम के अध्यक्ष कमलेश भारतीय ने हंस से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाए और काव्य गोष्ठी का संचालन किया। इस दौरान वरिष्ठ कवि सतीश कौशिक ने कहा कि पांवों में उसके दम न था, पर वह सफर में था, जाने पड़ाव कौन सा, उसकी नजर में था। नीरज मनचंदा ने कुछ पंक्तियां सुनाते हुए कहा कि मुश्किलों में मुस्कुराना सीख लो, दीप तुम दिल जलाना सीख लो, गम का दरिया बह रहा है हर जगह, गम में भी हंसना-हंसाना सीख लो।
डॉ. चंद्रशेखर ने हंस को इस तरह याद किया कि दर्द की बांसुरी आपकी हंस, सुन रहे हम सभी न रुके सिलसिला। प्राध्यापिका सरोज श्योराण ने कुछ ऐसे अपनी बात कही कि खुद से प्रीत जोड़ लो तुम, यूं किसी का राह में, इंतजार न करो, कर्म का दीपक जला। पूनम मनचंदा ने कहा कि दोस्ती इस तरह वो निभाते रहे, गर्दिशों में हमें छोड़ जाते रहे। सत्यपाल शर्मा ने सुनाया कि नाम वाले नाज मत कर, देख सूरज की तरफ, यह सवेरे तो उगेगा, शाम को ढल जाएगा। इस आयोजन में आदर्श कुमार, कलाकार पाल, नीलम भारती, रश्मि, सतीश कथूरिया आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
संगम के अध्यक्ष कमलेश भारतीय ने हंस से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाए और काव्य गोष्ठी का संचालन किया। इस दौरान वरिष्ठ कवि सतीश कौशिक ने कहा कि पांवों में उसके दम न था, पर वह सफर में था, जाने पड़ाव कौन सा, उसकी नजर में था। नीरज मनचंदा ने कुछ पंक्तियां सुनाते हुए कहा कि मुश्किलों में मुस्कुराना सीख लो, दीप तुम दिल जलाना सीख लो, गम का दरिया बह रहा है हर जगह, गम में भी हंसना-हंसाना सीख लो।
विज्ञापन
डॉ. चंद्रशेखर ने हंस को इस तरह याद किया कि दर्द की बांसुरी आपकी हंस, सुन रहे हम सभी न रुके सिलसिला। प्राध्यापिका सरोज श्योराण ने कुछ ऐसे अपनी बात कही कि खुद से प्रीत जोड़ लो तुम, यूं किसी का राह में, इंतजार न करो, कर्म का दीपक जला। पूनम मनचंदा ने कहा कि दोस्ती इस तरह वो निभाते रहे, गर्दिशों में हमें छोड़ जाते रहे। सत्यपाल शर्मा ने सुनाया कि नाम वाले नाज मत कर, देख सूरज की तरफ, यह सवेरे तो उगेगा, शाम को ढल जाएगा। इस आयोजन में आदर्श कुमार, कलाकार पाल, नीलम भारती, रश्मि, सतीश कथूरिया आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन