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Hisar News: स्वास्थ्य विभाग ने नौकरी छोड़ने वाली महिला चिकित्सक से मांगे 16 लाख रुपये

Sat, 27 May 2023 09:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Sat, 27 May 2023 09:31 PM IST
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Health department demanded Rs 16 lakh from female doctor who quit her job
हिसार। सरकारी तनख्वाह लेकर सरकारी कोटे से पीजी कोर्स करके नौकरी छोड़ने वाले प्रदेश सरकार के चिकित्सकों पर अब विभाग ने लगाम कसनी शुरू कर दी है। अब इन चिकित्सकों से बॉन्ड राशि को ब्याज सहित रिकवरी की तैयारी शुरू कर दी है। संभवत: यह प्रदेश का पहला ऐसा मामला है, जिसमें रिकवरी करने के आदेश जारी किए गए हैं।
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इसी कड़ी में हिसार के निजी परिवर्तन अस्पताल की चिकित्सक डॉ. रितु खुराना के खिलाफ हिसार न्यायालय में रिकवरी सूट दायर कर दस लाख रुपये के बॉन्ड की राशि ब्याज सहित मांगी है, जो कि 16 लाख रुपये से ज्यादा बनती है। इस मामले में अदालत ने न सिर्फ डॉ. रितु खुराना, बल्कि उनके दो जमानतियों को भी नोटिस जारी कर दिया है। रितु खुराना अदालत में पेश भी हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक अपना पक्ष नहीं रखा है। इस रिकवरी सूट के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नियमानुसार 80 हजार रुपये की फीस भी अदालत में जमा करवाई है।
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स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस), महानिदेशक और हिसार नागरिक अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी ने हिसार के लाजपत नगर निवासी डॉ. रितु खुराना, उनके दो जमानती सेक्टर-15 निवासी रमेश अरोड़ा और पीएलए निवासी डॉ. एससी खुराना के खिलाफ सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के ऑर्डर 37 के तहत दस लाख रुपयेे के बॉन्ड की ब्याज सहित रिकवरी के लिए 16 लाख, एक हजार, 750 रुपये की रिकवरी का दीवानी दावा दायर किया है।
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इस दावे में कहा कि डॉ. रितु खुराना 31 अक्तूबर, 2008 को स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा अधिकारी के तौर पर नियुक्त हुई थीं। इसके बाद डॉ. रितु खुराना ने पीजीआईएमएस रोहतक (पंडित भगवत दयाल शर्मा स्नातकोत्तर चिकित्सा विज्ञान संस्थान) में हरियाणा स्वास्थ्य सेवा के अधिकारियों के लिए आरक्षित एनिस्थिीशिया (बेहोशी रोग विशेषज्ञ) के स्नातकोत्तर (पीजी) कोर्स को हरियाणा सरकार के खर्च पर करने के लिए दो साल के लिए (31 जुलाई, 2013 से 30 जुलाई, 2015 तक) एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) मांगा। यह पीजी कोर्स करने के दौरान डॉ. खुराना को विभाग के नियमों व शर्तों के आधार पर नियमित तौर पर तनख्वाह दी गई।
प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं की दिसंबर 2011 की नीति के अनुसार डॉ. रितु खुराना को दो जमानतियों सहित एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर किया और सेक्टर-15 निवासी रमेश अरोड़ा और पीएलए निवासी डॉ. एससी खुराना डॉ. खुराना के जमानती बने। बॉन्ड की शर्तों के अनुसार डॉ. रितु खुराना को उपरोक्त पीजी कोर्स करने के बाद पांच साल तक हरियाणा सरकार की सेवाओं में रहना जरूरी था। यदि वे ऐसा नहीं करती तो उनको दस लाख रुपये प्रदेश सरकार को देना था।

इसके बाद, डॉ. रितु खुराना ने 30 जुलाई 2015 को पीजी कोर्स पूरा कर लिया और बॉन्ड के अनुसार उनको 30 जुलाई 2020 तक प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी सेवाएं देनी जरूरी थी या दस लाख रुपये का भुगतान करना था। इस कोर्स की समाप्ति के बाद डॉ. रितु खुराना ने 31 अगस्त 2015 को हिसार सामान्य अस्पताल में अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर ली, लेकिन 10 दिसंबर 2015 तक जानबूझकर अनुपस्थित रहीं और आज तक ड्यूटी ज्वाइन नहीं की और न ही दस लाख रुपये का भुगतान किया।
डॉ. रमेश पूनिया ने उठाया था मुद्दा

इस पूरे मुद्दे को स्वास्थ्य विभाग के बायोलॉजिस्ट डॉ. रमेश पूनिया ने उठाया था। उन्होंने सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी और फिर इन चिकित्सकों से रिकवरी करवाने के लिए सीएम विंडो में शिकायत दी। इसके करीब एक साल बाद यह रिकवरी सूट दायर किया गया है। उन्होंने बताया कि हिसार में इस तरह के तीन चिकित्सक हैं, लेकिन रिकवरी सूट सिर्फ एक ही चिकित्सक के खिलाफ दायर किया गया है।

प्रदेशभर में 200 से ज्यादा चिकित्सक

- डॉ. रितु खुराना की तरह प्रदेशभर में 200 से ज्यादा चिकित्सक ऐसे हैं, जिन्होंने एचसीएमएस (हरियाणा सिविल चिकित्सा सेवाएं) कोटा के तहत पीजी कोर्स किया, सरकार से तनख्वाह ली, बॉन्ड भी भरे, लेकिन कोर्स के बाद सरकारी अस्पतालों के बजाय निजी अस्पतालों में अपनी सेवाएं देनी शुरू कर दी है। हालांकि स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय के सूत्र इस सूची में 300 से ज्यादा चिकित्सकों के शामिल होने की बात कर रहे हैं।
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