एग्रीकल्चर: एचएयू के वैज्ञानिकों ने बनाया बैटरी से चलने वाला ट्रैक्टर, 1.5 टन वजन के ट्रेलर के साथ तय कर सकता है 80 किमी का सफर
पेट्रोल डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में आने वाला युग इलेक्ट्रॉनिक वाहनों का होना प्रतीत होता है। बढ़ती डीजल की कीमतों ने खेती को और महंगा कर दिया है। ऐसे में हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किसानों की कृषि लागत कम करने की दिशा में ई–ट्रैक्टर विकसित किया है।
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हिसार का चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पर अनुसंधान करने वाला देश का पहला कृषि विश्वविद्यालय बन गया है। विश्वविद्यालय के कृषि इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कॉलेज ने इस ई-ट्रैक्टर को तैयार किया है। यह टैक्टर 16.2 किलोवाट की बैटरी से चलता है और डीजल ट्रैक्टर की तुलना में इसकी संचालन लागत बहुत कम है।
इस ट्रैक्टर के प्रयोग से किसानों की आमदनी में काफी भी इजाफा होगा। यह अनुसंधान उपलब्धि कृषि मशीनरी और फार्म इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिक एवं वर्तमान निदेशक, उत्तरी क्षेत्र कृषि मशीनरी परीक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान हिसार डॉ. मुकेश जैन के मार्गदर्शन में प्राप्त की गई है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बीआर काम्बोज ने बताया कि यह ई– ट्रैक्टर 23.17 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चल सकता है व 1.5 टन वजन के ट्रेलर के साथ 80 किलोमीटर तक का सफर कर सकता है। ई-ट्रैक्टर के प्रदर्शन की बात की जाए तो इसमें 16.2 किलोवाट आवर की लिथियम आयन बैटरी का इस्तेमाल किया गया। इस बैटरी को 9 घंटे में फुल चार्ज किया जा सकता है। इस दौरान 19 से 20 यूनिट बिजली की खपत होती है।
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इसमें फास्ट चार्जिंग का भी विकल्प उपलब्ध है, जिसकी मदद से ट्रैक्टर की बैटरी महज 4 घंटे में चार्ज कर सकते हैं। ट्रैक्टर में शानदार 77 प्रतिशत का ड्राबार पुल है। इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर के संचालन की लागत के हिसाब से यह डीजल ट्रैक्टर के मुकाबले में 25.72 से 32 प्रतिशत तक सस्ता है।
ट्रैक्टर में कंपन और शोर की बात की जाए तो इसमें 52 प्रतिशत कंपन और 20.52 प्रतिशत शोर बीआईएस कोड की अधिकतम अनुमेय सीमा से कम पाया गया। ट्रैक्टर में ऑपरेटर के पास इंजन ना होने के कारण तपिश भी पैदा नही होती जो ऑपरेटर के लिए बिलकुल आरामदायक साबित होगा। उनके अनुसार डीजल के बढ़ते हुए दामों को देखते हुए यह ट्रैक्टर किसानों के लिए काफी किफायती साबित होगा जिससे उनकी आमदनी में भी इजाफा होगा।
इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान बुदनी के पूर्व निदेशक एमएल मेहता, बैटरी चालित ट्रैक्टर के निर्माता विकास गोयल, विवि की ओर से इंजीनियरिंग कॉलेज के डीन डॉ. अमरजीत कालरा, अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत, डीन पीजीएस डॉ. अतुल ढींगरा, कृषि मशीनरी व पावर इंजीनियरिंग विभाग से डॉ. विजया रानी ने बैटरी से चलने वाला ट्रैक्टर के विकास की सराहना की।