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Hisar: एचएयू ने विकसित की गेहूं की नई किस्म, रेतीली व कम उपजाऊ वाले क्षेत्रों के लिए उपयोगी है डब्ल्यूएच 1402

Wed, 31 Jan 2024 09:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, हिसार (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, हिसार (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 31 Jan 2024 09:07 AM IST
सार

गेहूं एवं जौ अनुभाग के प्रभारी डॉ. पवन ने बताया कि गेहूं की नई किस्म डब्ल्यू एच 1402 किस्म 100 दिन में बालियां निकालती हैं और 147 दिन में पककर तैयार हो जाती है। इस किस्म की बालियां लंबी (14 सेंटीमीटर) व लाल रंग की है।

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HAU develops new wheat variety WH 1402 for sandy, less fertile areas
एचएयू में पत्रकारों से बातचीत करते कुलपति प्रो. कांबोज। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के गेहूं एवं जौ अनुभाग ने गेहूं की एक नई किस्म डब्ल्यूएच 1402 विकसित की है। यह किस्म विशेष तौर पर रेतीली, कम उपजाऊ व पानी वाले क्षेत्राें को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है। इस किस्म की खास बात यह है कि सिर्फ दो सिंचाई व मध्यम खाद देने से ही फसल की बढि़या पैदावार मिलेगी।

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चूंकि दिन प्रतिदिन भू-जल अधिक दोहन के कारण जलस्तर नीचे जा रहा है तो यह नई किस्म कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी। एचएयू के वैज्ञानिकों की मानें तो इस किस्म से हरियाणा के अलावा पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व जम्मू-कश्मीर के किसानों को भी फायदा मिलेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक अगले दो वर्षों में इसका बीज किसानों को मिलना शुरू हो जाएगा।
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मंगलवार को विश्वविद्यालय में आयोजित एक प्रेसवार्ता में कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बताया कि इस किस्म की औसत उपज 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर व अधिकतम उपज 68 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक ली जा सकती है। यह किस्म पीला रतुआ, भूरा रतुआ व अन्य बीमारियों के प्रति रोगरोधी है। साथ ही यह किस्म कम पानी वाले जोन की अच्छी किस्म एनआईएडब्ल्यू 3170 से 7.5 प्रतिशत अधिक पैदावार देती है। कुलपति ने बताया कि इस किस्म की अधिकतम उपज प्राप्त करने के लिए नाइट्रोजन 90, फास्फोरस 60, पोटाश 40, जिंक सल्फेट 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्रयोग की सिफारिश की जाती है।
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यह है बिजाई का उचित समय व बीज की मात्रा
कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके पाहुजा ने बताया कि इस किस्म की बिजाई का उचित समय अक्तूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर का पहला सप्ताह है और बीज की मात्रा 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। इस किस्म में पहली सिंचाई बिजाई के 20-25 दिन बाद शिखर जड़ें निकलते समय और दूसरी सिंचाई बिजाई के 80-85 दिन बाद बालियां निकलते समय करने की जरूरत है।

ये हैं नई किस्म की विशेषताएं
गेहूं एवं जौ अनुभाग के प्रभारी डॉ. पवन ने बताया कि गेहूं की नई किस्म डब्ल्यू एच 1402 किस्म 100 दिन में बालियां निकालती हैं और 147 दिन में पककर तैयार हो जाती है। इस किस्म की बालियां लंबी (14 सेंटीमीटर) व लाल रंग की है। इस किस्म की ऊंचाई 100 सेंटीमीटर है, जिससे इसके गिरने का खतरा न के बराबर है। इस किस्म का दाना मोटा है। इसमें 11.3 प्रतिशत प्रोटीन, हेक्टोलीटर वेट (77.7 केजी/एचएल) लोह तत्व (37.6 पीपीएम), जिंक (37.8 पीपीएम) है। पौष्टिकता के हिसाब से यह किस्म अच्छी है।

इन वैज्ञानिकों की मेहनत का है परिणाम
नई किस्म विकसित करने में डॉ. एमएस दलाल, ओपी बिश्नोई, विक्रम सिंह, दिव्या फोगाट, योगेन्द्र कुमार, एसके पाहुजा, सोमवीर, आरएस बेनीवाल, भगत सिंह, रेणु मुंजाल, प्रियंका, पूजा गुप्ता व पवन कुमार का अहम योगदान रहा।


ये किस्में जल्द होंगी अनुमोदित
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार कुछ किस्में जल्द ही अनुमोदित होंगी, जिनमें सरसों की आरएच 1975, मूंग की एमएच 1762 व एमएच 1772, जई की एचएफओ 906 व मसूर की एलएच 17-19 शामिल हैं।

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