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Hisar News: जीन से औषधि खोज तक शोध की नई राह पर जीजेयू
Thu, 09 Jul 2026 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Thu, 09 Jul 2026 01:05 AM IST
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हिसार। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकी : जीन से औषधि खोज तक विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित उद्घाटन समारोह में कुलपति के तकनीकी सलाहकार प्रो. संदीप राणा मुख्य अतिथि रहे।
मुख्य अतिथि प्रो. संदीप राणा ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का उद्देश्य नई तकनीकों के विकास के साथ मानव जीवन को बेहतर बनाना भी है। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं से समाजोपयोगी और नवाचार आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने का आह्वान किया। इसका उद्देश्य जैव-चिकित्सा एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान के क्षेत्र में शोध क्षमता बढ़ाना और संस्थागत सहयोग को मजबूत करना है।
कार्यशाला एएनआरएफ-पेयर (त्वरित नवाचार एवं अनुसंधान के लिए साझेदारी) परियोजना के तहत आयोजित की जा रही है। इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय की जैव-सूचना विज्ञान अवसंरचना सुविधा (बीआईएफ), डॉ. भीमराव आंबेडकर जैव-चिकित्सा अनुसंधान केंद्र और आणविक ऑन्कोलॉजी प्रयोगशाला का सहयोग है।
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मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रो. आलोक चंद्र भारती ने एएनआरएफ-पेयर परियोजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थानों के बीच सहयोग, संसाधनों की साझेदारी और बहुविषयक अनुसंधान देश की वैज्ञानिक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उद्घाटन तकनीकी सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर जैव-चिकित्सा अनुसंधान केंद्र की प्रो. मधु चोपड़ा ने आधुनिक औषधि खोज में उपयोग होने वाली संगणकीय तकनीकों की जानकारी दी। कार्यशाला में प्रतिभागियों को जैव-सूचना विज्ञान, संगणकीय औषधि खोज, स्तनधारी कोशिका संवर्धन और ऑक्सफोर्ड नैनोपोर दीर्घ-पठन अनुक्रमण जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस अवसर पर एएनआरएफ-पेयर परियोजना के विश्वविद्यालय समन्वयक प्रो. अश्वनी कुमार, प्रो. मुनीष आहुजा, प्रो. सुमित्रा सिंह, प्रो. दिनेश ढींगड़ा, प्रो. सुनील शर्मा, प्रो. अर्चना कपूर, प्रो. सुनील कुमार, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. विक्रमजीत सिंह मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि प्रो. संदीप राणा ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का उद्देश्य नई तकनीकों के विकास के साथ मानव जीवन को बेहतर बनाना भी है। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं से समाजोपयोगी और नवाचार आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने का आह्वान किया। इसका उद्देश्य जैव-चिकित्सा एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान के क्षेत्र में शोध क्षमता बढ़ाना और संस्थागत सहयोग को मजबूत करना है।
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कार्यशाला एएनआरएफ-पेयर (त्वरित नवाचार एवं अनुसंधान के लिए साझेदारी) परियोजना के तहत आयोजित की जा रही है। इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय की जैव-सूचना विज्ञान अवसंरचना सुविधा (बीआईएफ), डॉ. भीमराव आंबेडकर जैव-चिकित्सा अनुसंधान केंद्र और आणविक ऑन्कोलॉजी प्रयोगशाला का सहयोग है।
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मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रो. आलोक चंद्र भारती ने एएनआरएफ-पेयर परियोजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थानों के बीच सहयोग, संसाधनों की साझेदारी और बहुविषयक अनुसंधान देश की वैज्ञानिक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उद्घाटन तकनीकी सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर जैव-चिकित्सा अनुसंधान केंद्र की प्रो. मधु चोपड़ा ने आधुनिक औषधि खोज में उपयोग होने वाली संगणकीय तकनीकों की जानकारी दी। कार्यशाला में प्रतिभागियों को जैव-सूचना विज्ञान, संगणकीय औषधि खोज, स्तनधारी कोशिका संवर्धन और ऑक्सफोर्ड नैनोपोर दीर्घ-पठन अनुक्रमण जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस अवसर पर एएनआरएफ-पेयर परियोजना के विश्वविद्यालय समन्वयक प्रो. अश्वनी कुमार, प्रो. मुनीष आहुजा, प्रो. सुमित्रा सिंह, प्रो. दिनेश ढींगड़ा, प्रो. सुनील शर्मा, प्रो. अर्चना कपूर, प्रो. सुनील कुमार, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. विक्रमजीत सिंह मौजूद रहे।