भूजल स्तर को बनाए रखने में मिसाल बना जीजेयू
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जिस पर्यावरणविद के नाम से जीजेयू का नाम जुड़ा हुआ है। जीजेयू अपने उसी पर्यावरणविद गुरु जंभेश्वर के कदमों पर चलकर यहां पर्यावरण को सहेज रहा है। पेड़ों को काटने की बजाए उन्हें दूसरी जगह पर प्लांट करना हो या हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाकर भूजल स्तर को बढ़ाना। यह विश्वविद्यालय उन लोगों के लिए एक मिसाल है। जो पानी की कीमत से बेखबर होकर पानी को बर्बाद करते हैं। विश्वविद्यालय का बारिश का पानी सीवरेज में जाने की बजाए हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए जमीन में जाता है। यह पानी न केवल भूजल स्तर को बढ़ता है। बल्कि जमीन के खारे पानी के खारेपन को भी कम करता है।
दस से अधिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
पिछले करीब पांच साल से जीजेयू भूजल स्तर को बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। जीजेयू में अब तक 10 से अधिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए जा चुके हैं। इस विश्वविद्यालय में बरसात का पूरा पानी हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए जमीन में जाता है। विश्वविद्यालय में जहां कहीं भी कोई बिल्डिंग खड़ी होती है तो उसके साथ एक हार्वेस्टिंग सिस्टम भी बनाया जाता है। वर्तमान में नए बने छात्रावास के लिए तो दो हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए गए हैं। यही नहीं करीब तीन-चार साल पहले लगभग सभी पुरानी बिल्डिंग्स को भी हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाकर उसके साथ जोड़ दिया गया था। ताकि कंक्रीट पर गिरने वाली हरेक बूंद को भूगर्भ में भेजकर प्रकृति के दोहन को रोका जा सके।
पार्किंग जॉन में भी है हार्वेस्टिंग सिस्टम
जीजेयू में बिल्डिंग तो दूूर पार्किंग तक के लिए भी हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है। सिटी गेट के पास करीब सवा एकड़ की पार्किंग में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है। यह जगह पहले कच्ची थी जहां पर बारिश का पानी जमीन सोख लेेती थी। लेकिन पार्किंग के लिए कंक्रीट बिछाया गया तो बारिश के पानी के लिए पार्किंग के बीच में एक हार्वेस्टिंग सिस्टम बना दिया गया।
ये हार्वेस्टिंग सिस्टम हैं जीजेयू में
गर्ल्स हास्टल, नवनिर्मित ब्वायज हॉस्टल में दो, सिटी गेट पर बनी पार्किंग, लाईब्रेरी, ऑडिटोरियम व नैनोटेक्नोलॉजी विभाग की मंजिल के लिए एक, हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस के लिए दो, झील के बीच में एक (जिसे अब हाईड्रोपोनिक गार्डन बना दिया गया है) आदि रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए गए हैं।
क्या है हार्वेस्टिंग सिस्टम
जमीन में एक बड़ा सारा हौद (टैंक) बनाया जाता है। जिसमें एक निश्चित मात्रा में बजरी, रोड़े और ग्रेवल डाले जाते हैं। ताकि पानी इनके अंदर से गुजरे तो वह साफ हो जाए। होद के बीच में एक पाइप को पाताल तक पहुंचाते हैं। छतों आदि पर एकत्रित हुए बारिश के पानी को होद में पहुंचाने के लिए पाइपों को हौद से जोड़ दिया जाता है। हौद में गिरा पानी साफ होकर पाइप के माध्यम से पाताल में पहुंच जाता है। भूमि में केवल साफ पानी ही भेजा जाता है। जिससे भूजल स्तर को बनाए रखा जा सकता है।
हमने दस से अधिक हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए हुए हैं। विश्वविद्यालय में होने वाली बरसात का पूरा पानी सीवरेज में न जाकर जमीन के अंदर जाता है। प्रत्येक नई बिल्डिंग के साथ हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाते हैं।
सुनील ग्रोवर, कार्यकारी अभियंता, जीजेयू