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अनपढ़ से बीकॉम तक पढ़ीं महिला किसान संभाल रहीं खेती
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हरियाणा कृषि विश्व विद्यालय में किसान दिवस समारोह में महिला किसान परमेश्वरी को सम्मानित करते मु
- फोटो : Hisar
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की 119वीं जयंती के उपलक्ष्य में वीरवार को किसान दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने बतौर मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी सभागार में प्रदेश की 18 प्रगतिशील महिला किसानों को सम्मानित किया।
प्रत्येक जिले से एक महिला किसान को चुना गया था। नूंह, चरखी-दादरी, गुरुग्राम से किसी का चयन नहीं किया गया था। भिवानी से चुनी गई महिला किसान मुकेश किसी कारण से पहुंच नहीं सकी। अनपढ़ से लेकर बीकॉम तक पढ़ी महिला किसान आज खेती को संभाल रही हैं। इनमें से कुछ महिला किसान हर महीने 60 हजार से दो लाख रुपये तक कमा रही हैं।
तीन एकड़ में आर्गेनिक खेती करती हूं। मैं अनपढ़ हूं, लेकिन खेती में जहर के उपयोग से होने वाले नुकसान को जानती हूं। पिछले कई साल से बाजार से सब्जी कभी नहीं लाए। किचन गार्डनिंग से ही सब्जी तैयार करती हूं। - परमेश्वरी देवी, आदमपुर, हिसार
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हमारे गांव में प्राकृतिक खेती के लिए मुहिम चलाई जा रही है। हम मित्र कीटों की पहचान कराना महिलाओं को सिखाते हैं। डॉ. सुरेंद्र दलाल के नाम से कई साल से क्लास चला रहे हैं। खेतों में केमिकल का उपयोग नहीं करते। - कमलेश, निडाना, जींद
मैं खेती के साथ बाजरे के उत्पाद भी बनाती हूं। पिछले तीन साल से खेती कर रही हूं। अचार बनाकर उसे बेचते हैं। जिससे परिवार को चलाने में काफी सहायता मिलती है। परिवार के लोग भी सहयोग करते हैं। - मनीषा, किशनपुरा, रेवाड़ी
मैं बीकॉम पास हूं। फूड प्रोसेसिंग का हमारा काम है। हम कुछ उत्पाद कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी पहुंचाते हैं। यह सभी आर्गेनिक उत्पादों से तैयार किए जाते हैं। आंवला के स्कवैश भी बनाते हैं। - सुनीता आहूजा, सोनीपत
अनपढ़ होने के कारण कुछ रोजगार नहीं था। महिलाओं के सहयोग से जूट के बैग तैयार करते हैं। इसके लिए अब तक 40 महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हूं। महीने में 60 हजार रुपये तक कमा लेती हूं। यह सम्मान उत्साह को बढ़ाएगा। - सुनीता, पलवल
हम गन्ना, लहसुन की आर्गेनिक खेती करते हैं। इसके साथ ही पशुपालन भी करते हैं। आठवीं पास हूं लेकिन खेती में उपयोग होने वाले हर एक उपकरण की जानकारी है। आधुनिक खेती के लिए लगातार ट्रेनिंग भी लेते रही हूं। - रेखा, यमुनानगर
मैं गेहूं, सरसों सहित अन्य फसलों को विविधीकरण से उगाती हूं। ग्रेजुएट होने के बावजूद खेती में काम करना चाहती हूं। मेरे पिता सहित पूरा परिवार खेती करता है। अगर तकनीक के साथ बाजार के अनुसार की जाए तो खेती में अच्छा मुनाफा है। - सरला, भट्टू, फतेहाबाद
हम गुलाब के फूलों की खेती करते हैं। करीब तीन एकड़ जमीन में गुलाब लगाए हुए हैं। पाली हाउस के जरिये खेती कर गुलाब तैयार करते हैं। जिसे पंजाब में सेल करते हैं। हर महीने एक से दो लाख रुपये की बचत होती है। - नीरज चौहान, पंचकूला
मैं अपने पति के साथ खेती करती हूं। हमने नेट हाउस लगाया। इसके माध्यम से खीरा उगाते हैं। एक एकड़ में साल भर में 7 लाख रुपये तक कमा लेते हैं। केंचुआ खाद और मशरूम भी उगाते हैं। समन्वित खेती को आगे बढ़ा रहे हैं। - पूजा आर्य, कैथल
मैं अपने पति के साथ खेती करती हूं। एक बड़े हॉल कमरे में मशरूम की खेती करते हैं। सर्दी के मौसम में तीन महीने में 80 हजार रुपये तक की बचत हो जाती है। एचएयू से मिले प्रशिक्षण के बाद यह काम शुरू किया है। - कविता, करनाल
हम खेती में सभी आधुनिक तकनीकों को अपनाते हैं। पराली को कभी नहीं जलाते। जीरो टिलेज का उपयोग कर गेहूं की बिजाई करते हैं। खेती में बड़ी संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए हम सोसायटी के जरिये खेती करते हैं। - ममता, पानीपत
स्वयं सहायता समूह के माध्यम से अचार, पापड़ तैयार करते हैं। जिसे आसपास के शहरों में सप्लाई करते हैं। ग्रुप के हर सदस्य को 9 हजार रुपये की बचत होती है। इसके अलावा खेती से आय अलग से होती है। जूट के बैग बनाने का काम करते हैं। - उर्मिला, बुड़ीन, महेंद्रगढ़
75 साल की हो गई हूं खेती के लिए पहली बार अवार्ड मिल रहा है। गेहूं, बाजरा, सरसों की आर्गेनिक खेती काम करते हैं। आर्गेनिक खेती के लिए पिछले कई साल से कर रहे हैं। खेती को जहर मुक्त बनाने के लिए लोगों को जागरूक भी करती हूं। - कमलेश देवी, इस्माइला रोहतक
गेहूं, सरसों, धान, ज्वार, ग्वार की खेती करते हैं। इसके साथ ही सिलाई-कढाई का काम भी करती हूं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती रहती हूं। हर महीने करीब 50 हजार रुपये की आय होती है। - पिंकी, ढाकला, झज्जर
वर्मिंग कंपोस्ट तैयार कर उसे उपयोग करते हैं। वर्मिंग कंपोस्ट को बेचने का काम भी है। अचार और मुरब्बे बनाने का काम है। हर महीने दो लाख रुपये की सेल है। इसमें हर महीने औसतन 25 से 50 हजार रुपये तक की बचत होती है। - मीना, अंबाला
हम पूरे एरिया में आर्गेनिक खेती करते हैं। 10 एकड़ के किन्नू के बाग में कभी केमिकल का उपयोग नहीं करते। सुनीता ने बताया कि वह किन्नू को बेचने जाने के लिए खुद ट्रैक्टर चलाकर जाती हैं। इससे पहले भी 2017 में भी सम्मानित हो चुकी हैं। - सुनीता लांबा, सिरसा
हम मशरूम की खेती करते हैं। सोयाबीन की छाछ के लिए यह पुरस्कार मिला। यह उत्पाद काफी उपयोगी हैं। युवाओं को खूब पसंद आ रहा है। हर महीने 20 से 30 हजार रुपये तक की आय हो जाती है। वर्मिंग कंपोस्ट का उपयोग भी करते हैं। - सरोज, फरीदाबाद
पिछले कई साल से मशरूम की खेती करते हैं। मशरूम का सीड भी तैयार करते हैं। यह काम पिछले कई साल से कर रहे हैं। इसके अलावा मशरूम की प्रोसेसिंग भी करते हैं। दूसरे लोगों को इस काम के लिए प्रेरित भी करते हैं। - कर्मजीत, कुरुक्षेत्र
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प्रत्येक जिले से एक महिला किसान को चुना गया था। नूंह, चरखी-दादरी, गुरुग्राम से किसी का चयन नहीं किया गया था। भिवानी से चुनी गई महिला किसान मुकेश किसी कारण से पहुंच नहीं सकी। अनपढ़ से लेकर बीकॉम तक पढ़ी महिला किसान आज खेती को संभाल रही हैं। इनमें से कुछ महिला किसान हर महीने 60 हजार से दो लाख रुपये तक कमा रही हैं।
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तीन एकड़ में आर्गेनिक खेती करती हूं। मैं अनपढ़ हूं, लेकिन खेती में जहर के उपयोग से होने वाले नुकसान को जानती हूं। पिछले कई साल से बाजार से सब्जी कभी नहीं लाए। किचन गार्डनिंग से ही सब्जी तैयार करती हूं। - परमेश्वरी देवी, आदमपुर, हिसार
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हमारे गांव में प्राकृतिक खेती के लिए मुहिम चलाई जा रही है। हम मित्र कीटों की पहचान कराना महिलाओं को सिखाते हैं। डॉ. सुरेंद्र दलाल के नाम से कई साल से क्लास चला रहे हैं। खेतों में केमिकल का उपयोग नहीं करते। - कमलेश, निडाना, जींद
मैं खेती के साथ बाजरे के उत्पाद भी बनाती हूं। पिछले तीन साल से खेती कर रही हूं। अचार बनाकर उसे बेचते हैं। जिससे परिवार को चलाने में काफी सहायता मिलती है। परिवार के लोग भी सहयोग करते हैं। - मनीषा, किशनपुरा, रेवाड़ी
मैं बीकॉम पास हूं। फूड प्रोसेसिंग का हमारा काम है। हम कुछ उत्पाद कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी पहुंचाते हैं। यह सभी आर्गेनिक उत्पादों से तैयार किए जाते हैं। आंवला के स्कवैश भी बनाते हैं। - सुनीता आहूजा, सोनीपत
अनपढ़ होने के कारण कुछ रोजगार नहीं था। महिलाओं के सहयोग से जूट के बैग तैयार करते हैं। इसके लिए अब तक 40 महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हूं। महीने में 60 हजार रुपये तक कमा लेती हूं। यह सम्मान उत्साह को बढ़ाएगा। - सुनीता, पलवल
हम गन्ना, लहसुन की आर्गेनिक खेती करते हैं। इसके साथ ही पशुपालन भी करते हैं। आठवीं पास हूं लेकिन खेती में उपयोग होने वाले हर एक उपकरण की जानकारी है। आधुनिक खेती के लिए लगातार ट्रेनिंग भी लेते रही हूं। - रेखा, यमुनानगर
मैं गेहूं, सरसों सहित अन्य फसलों को विविधीकरण से उगाती हूं। ग्रेजुएट होने के बावजूद खेती में काम करना चाहती हूं। मेरे पिता सहित पूरा परिवार खेती करता है। अगर तकनीक के साथ बाजार के अनुसार की जाए तो खेती में अच्छा मुनाफा है। - सरला, भट्टू, फतेहाबाद
हम गुलाब के फूलों की खेती करते हैं। करीब तीन एकड़ जमीन में गुलाब लगाए हुए हैं। पाली हाउस के जरिये खेती कर गुलाब तैयार करते हैं। जिसे पंजाब में सेल करते हैं। हर महीने एक से दो लाख रुपये की बचत होती है। - नीरज चौहान, पंचकूला
मैं अपने पति के साथ खेती करती हूं। हमने नेट हाउस लगाया। इसके माध्यम से खीरा उगाते हैं। एक एकड़ में साल भर में 7 लाख रुपये तक कमा लेते हैं। केंचुआ खाद और मशरूम भी उगाते हैं। समन्वित खेती को आगे बढ़ा रहे हैं। - पूजा आर्य, कैथल
मैं अपने पति के साथ खेती करती हूं। एक बड़े हॉल कमरे में मशरूम की खेती करते हैं। सर्दी के मौसम में तीन महीने में 80 हजार रुपये तक की बचत हो जाती है। एचएयू से मिले प्रशिक्षण के बाद यह काम शुरू किया है। - कविता, करनाल
हम खेती में सभी आधुनिक तकनीकों को अपनाते हैं। पराली को कभी नहीं जलाते। जीरो टिलेज का उपयोग कर गेहूं की बिजाई करते हैं। खेती में बड़ी संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए हम सोसायटी के जरिये खेती करते हैं। - ममता, पानीपत
स्वयं सहायता समूह के माध्यम से अचार, पापड़ तैयार करते हैं। जिसे आसपास के शहरों में सप्लाई करते हैं। ग्रुप के हर सदस्य को 9 हजार रुपये की बचत होती है। इसके अलावा खेती से आय अलग से होती है। जूट के बैग बनाने का काम करते हैं। - उर्मिला, बुड़ीन, महेंद्रगढ़
75 साल की हो गई हूं खेती के लिए पहली बार अवार्ड मिल रहा है। गेहूं, बाजरा, सरसों की आर्गेनिक खेती काम करते हैं। आर्गेनिक खेती के लिए पिछले कई साल से कर रहे हैं। खेती को जहर मुक्त बनाने के लिए लोगों को जागरूक भी करती हूं। - कमलेश देवी, इस्माइला रोहतक
गेहूं, सरसों, धान, ज्वार, ग्वार की खेती करते हैं। इसके साथ ही सिलाई-कढाई का काम भी करती हूं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती रहती हूं। हर महीने करीब 50 हजार रुपये की आय होती है। - पिंकी, ढाकला, झज्जर
वर्मिंग कंपोस्ट तैयार कर उसे उपयोग करते हैं। वर्मिंग कंपोस्ट को बेचने का काम भी है। अचार और मुरब्बे बनाने का काम है। हर महीने दो लाख रुपये की सेल है। इसमें हर महीने औसतन 25 से 50 हजार रुपये तक की बचत होती है। - मीना, अंबाला
हम पूरे एरिया में आर्गेनिक खेती करते हैं। 10 एकड़ के किन्नू के बाग में कभी केमिकल का उपयोग नहीं करते। सुनीता ने बताया कि वह किन्नू को बेचने जाने के लिए खुद ट्रैक्टर चलाकर जाती हैं। इससे पहले भी 2017 में भी सम्मानित हो चुकी हैं। - सुनीता लांबा, सिरसा
हम मशरूम की खेती करते हैं। सोयाबीन की छाछ के लिए यह पुरस्कार मिला। यह उत्पाद काफी उपयोगी हैं। युवाओं को खूब पसंद आ रहा है। हर महीने 20 से 30 हजार रुपये तक की आय हो जाती है। वर्मिंग कंपोस्ट का उपयोग भी करते हैं। - सरोज, फरीदाबाद
पिछले कई साल से मशरूम की खेती करते हैं। मशरूम का सीड भी तैयार करते हैं। यह काम पिछले कई साल से कर रहे हैं। इसके अलावा मशरूम की प्रोसेसिंग भी करते हैं। दूसरे लोगों को इस काम के लिए प्रेरित भी करते हैं। - कर्मजीत, कुरुक्षेत्र