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Hisar News: जिले के चार युवक किए डिपोर्ट, छलका दर्द, बोले-चाइनीज कंपनी बंधक बना रोज 17-18 घंटे कराती थी काम, म्यांमार की सेना ने छुड़ाया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Dec 2025 01:20 AM IST
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Four youths from the district were deported, said - the Chinese company used to work 17-18 hours a day as hostage, the Myanmar army rescued them.
हिसार। विदेश में रुपये कमाने की चाह में युवा अपनी जान की परवाह तक नहीं कर रहे हैं। मोटा पैसा खर्चकर एजेंटों के चक्कर में फंसे युवकों को वहां असहनीय यातनाएं सहनी पड़ती हैं। म्यांमार से करीब 17 दिन पहले डिपोर्ट किए गए एक युवक ने सदर थाना पुलिस को आपबीती बताई। पुलिस ने हैप्पी नाम के युवक पर प्राथमिकी दर्ज की है।
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सदर थाना पुलिस के मुताबिक गांवड़ निवासी अजय ने बताया कि थाईलैंड का वीजा लगवाने के बाद कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी के लिए उसके सहित चार युवकों को विदेश भेजा गया था। एजेंटों ने वहां ले जाकर चारों को चाइनीज कंपनी को बेच दिया। कंपनी ने उन्हें बंधक बनाकर रखा और साइबर ठगी करवाई। म्यांमार की आर्मी ने एक आपरेशन के जरिए उन्हें छुड़वाया और करीब 20 दिन जेल में रखने के बाद भारत डिपोर्ट कर दिया। चारों के पासपोर्ट पर डिपोर्ट की मोहर लगा दी।
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दोस्त के कहने पर एजेंट पर किया भरोसा

गावड़ निवासी अंकुश, सातरोड़ निवासी सोनू, बीएससी पास अजय व एक अन्य ने बताया कि उन्होंने अपने दोस्त से थाइलैंड में रोजगार के बारे में पूछा था। उसने हैप्पी नाम के एजेंट के बारे में बताया। हिसार निवासी हैप्पी सोनी ने थाइलैंड में 70 हजार रुपये मासिक की नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया। अजय ने बताया कि उसने 17 अगस्त 2025 को अपने वीजा व वैध टिकट पर थाइलैंड की फ्लाइट ली। वहां पहुंचने के बाद अजय ने एजेंट की ओर दिए गए टेलीग्राम एप पर अपनी फोटो भेजी। इसके बाद एक गाड़ी आई। उसमें बैठाकर चारों को घने जंगल में ले गए। इसके बाद वहां से म्यांमार के जंगलों में पहुंचा दिया।
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रोज 17-18 घंटे करवाते थे काम

अजय ने बताया कि म्यांमार के जगलों में पहुंचने पर पता लगा कि उन्हें बंधक बना लिया गया है। कंपनी के कर्मी रोज 17-18 घंटे काम कराते थे। वापस देश लौटने के लिए एजेंटों ने 4 से 5 लाख रुपये मांगे। कंपनी के गेट से बाहर आने के बाद एयरपोर्ट तक ले जाने के भी एक से दो लाख रुपये मांगते थे। अजय ने बताया कि उन्हें फेसबुक, इंस्टाग्राम के जरिए धनाढ्य लोगों को खोजने, उनसे चैटकर व्हाटसएप नंबर लेने का काम दिया। ये नंबर अपने सीनियर को देने होते थे। इसके बाद सीनियर उनसे ठगी के लिए कॉल करवाते थे। विरोध किया तो कंपनी के अधिकारी ने बोला कि हमने तुम्हें 4000 डॉलर में एक साल के लिए खरीदा है। वहां हमें पता लगा कि लाने-ले जाने, एयर टिकट सहित पूरा पैसा कंपनी ने दिया था। एजेंट ने दोनों ओर से पैसा लेकर ठगी की।

थाइलैंड भेजने के 68200 रुपये लिए

अजय ने बताया कि एजेंट हैप्पी सोनी ने उसे थाइलैंड भेजने के लिए 6,8200 रुपये लिए थे। जब रुपये वापस मांगे तो उसने मना कर दिया और गाली-गलौज की। पुलिस प्रवक्ता विकास ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी की जाएगी।


11 युवाओं को पहले डिपोर्ट किया था

इससे पहले 6 नवंबर को जिले के 11 युवकों को डिपोर्ट किया गया था। उन्हें भी नौकरी का झांसा देकर म्यांमार में बंधक बनाया गया था। उन सभी ने भी एजेंटों के खिलाफ शिकायत दी। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
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