{"_id":"5f246f228ebc3e63c45c2c00","slug":"finding-clue-of-seven-infected-who-write-wrong-address-poses-challenge-for-department-hisar-news-rtk566717077","type":"story","status":"publish","title_hn":"गलत पता लिखाने वाले सात संक्रमित का सुराग लगाना स्वास्थ्य विभाग के लिए बना चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गलत पता लिखाने वाले सात संक्रमित का सुराग लगाना स्वास्थ्य विभाग के लिए बना चुनौती
विज्ञापन
कोरोना संक्रमित मिले सात लोगों का सुराग लगा पाने में स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारी फिलहाल नाकाम रहे हैं। इन सातों संक्रमितों ने सैंपलिंग के दौरान अपना पता और फोन नंबर गलत लिखवाया था। जिला नागरिक अस्पताल में कोविड-19 टेस्ट देने के बाद शनिवार और सोमवार को मिले तीन संक्रमित और बुधवार व वीरवार को मिले 2-2 मरीज विभाग के लिए चुनौती बन गए हैं।
विभाग के अधिकारी और उनकी टीम अभी तक इन सातों संक्रमित मरीजों की तलाश नहीं कर पाई है। ऐसे में सातों अज्ञात संक्रमित मरीजों की जल्दी से पहचान नहीं की गई तो उनके संपर्क से अन्य लोगों के संक्रमित होने की भी आशंका बनी हुई है। इस बारे में विभागीय अधिकारियों द्वारा लघु सचिवालय में डीसी के साथ बैठक के दौरान इन अज्ञात संक्रमित मरीजों की तलाश के लिए रिपोर्ट फाइल तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपी गई है, ताकि उनकी जल्द पहचान की जा सके और संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
ये हैं सात मरीज
शनिवार को आई रिपोर्ट में करीब 50 वर्षीय व्यक्ति और सोमवार को आई रिपोर्ट में 30 वर्षीय युवक व 36 वर्षीय महिला संक्रमित मिले थे। बुधवार को 22 वर्षीय युवक व 16 वर्षीय किशोर संक्रमित मिले थे। वीरवार को मिले दो अज्ञात संक्रमित मरीजों 69 बुजुर्ग और 40 वर्षीय महिला शामिल हैं। विभाग के अनुसार इन सभी संक्रमितों ने कोरोना टेस्ट के दौरान रिपोर्ट फाइल में अपना मोबाइल नंबर और पता दोनों ही गलत दिए हैं। इससे विभाग द्वारा इनका अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है।
विज्ञापन
इस लापरवाही के कारण बने अज्ञात
कोरोना टेस्ट के दौरान रिपोर्ट में सभी लोगों का मोबाइल नंबर और पता दर्ज किया जाता है, ताकि संक्रमित की पहचान की जा सके। टेस्ट के दौरान मरीज के मोबाइल पर एक मैसेज भी आता है, जिसके बाद उस मैसेज में मिले कोड को रिपोर्ट में दर्ज किया जाता है। इससे यह भी जांच हो जाती है कि मरीज द्वारा दिया मोबाइल नंबर सही है या गलत। इन सातों केसों में टेस्ट के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा ऐसा कुछ नहीं किया गया, जिससे मोबाइल नंबर सही होने की जांच नहीं हो सकी और मरीज अपना मोबाइल नंबर और पता गलत दर्ज करवा गए।
इससे पहले भी हो चुकी ऐसी गलती
इससे पहले भी विभाग के सामने ऐसी गलती आ चुकी है। तीन संक्रमितों ने रिपोर्ट में नंबर और पता गलत दिया था। उस दौरान डॉ. रमेश पूनिया व उनकी टीम ने दर्जनभर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर इन्हें तलाश किया था। मॉडल टाउन के रहने वाले एक युवक ने भी रिपोर्ट में अपना मोबाइल नंबर और पता गलत दिया था, जो दिल्ली से लौटा था। करीब 32 घंटे बाद संक्रमित युवक को पार्क में अपने दोस्तों के साथ बैठा मिला था। अर्बन स्टेट में किराये के मकान में रहने वाले एक युवक ने भी अपना मोबाइल नंबर गलत दिया था, जो बिहार से लौटा था। उसे दो दिन में तलाश किया गया था। दिल्ली से आने के बाद जिला अस्पताल में कोविड-19 टेस्ट कराते समय 42 वर्षीय युवक ने भी ऐसी ही गलती दोहराई थी, जो तलाशी के दौरान एक होटल में ठहरा मिला था।
सातों संक्रमित मरीजों की तलाश जारी है। इस बारे में जिला प्रशासन को भी रिपोर्ट फाइल सौंपी गई है, ताकि जल्द सभी की पहचान की जा सके और संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सके। सैंपलिंग के दौरान कर्मियों को पूरी प्रक्रिया करने की हिदायत दी गई है, ताकि कोई गलत पता व फोन नंबर न देने पाए।
- डॉ. जया गोयल, डिप्टी सीएमओ, हिसार
विज्ञापन
विभाग के अधिकारी और उनकी टीम अभी तक इन सातों संक्रमित मरीजों की तलाश नहीं कर पाई है। ऐसे में सातों अज्ञात संक्रमित मरीजों की जल्दी से पहचान नहीं की गई तो उनके संपर्क से अन्य लोगों के संक्रमित होने की भी आशंका बनी हुई है। इस बारे में विभागीय अधिकारियों द्वारा लघु सचिवालय में डीसी के साथ बैठक के दौरान इन अज्ञात संक्रमित मरीजों की तलाश के लिए रिपोर्ट फाइल तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपी गई है, ताकि उनकी जल्द पहचान की जा सके और संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
विज्ञापन
ये हैं सात मरीज
शनिवार को आई रिपोर्ट में करीब 50 वर्षीय व्यक्ति और सोमवार को आई रिपोर्ट में 30 वर्षीय युवक व 36 वर्षीय महिला संक्रमित मिले थे। बुधवार को 22 वर्षीय युवक व 16 वर्षीय किशोर संक्रमित मिले थे। वीरवार को मिले दो अज्ञात संक्रमित मरीजों 69 बुजुर्ग और 40 वर्षीय महिला शामिल हैं। विभाग के अनुसार इन सभी संक्रमितों ने कोरोना टेस्ट के दौरान रिपोर्ट फाइल में अपना मोबाइल नंबर और पता दोनों ही गलत दिए हैं। इससे विभाग द्वारा इनका अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है।
विज्ञापन
इस लापरवाही के कारण बने अज्ञात
कोरोना टेस्ट के दौरान रिपोर्ट में सभी लोगों का मोबाइल नंबर और पता दर्ज किया जाता है, ताकि संक्रमित की पहचान की जा सके। टेस्ट के दौरान मरीज के मोबाइल पर एक मैसेज भी आता है, जिसके बाद उस मैसेज में मिले कोड को रिपोर्ट में दर्ज किया जाता है। इससे यह भी जांच हो जाती है कि मरीज द्वारा दिया मोबाइल नंबर सही है या गलत। इन सातों केसों में टेस्ट के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा ऐसा कुछ नहीं किया गया, जिससे मोबाइल नंबर सही होने की जांच नहीं हो सकी और मरीज अपना मोबाइल नंबर और पता गलत दर्ज करवा गए।
इससे पहले भी हो चुकी ऐसी गलती
इससे पहले भी विभाग के सामने ऐसी गलती आ चुकी है। तीन संक्रमितों ने रिपोर्ट में नंबर और पता गलत दिया था। उस दौरान डॉ. रमेश पूनिया व उनकी टीम ने दर्जनभर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर इन्हें तलाश किया था। मॉडल टाउन के रहने वाले एक युवक ने भी रिपोर्ट में अपना मोबाइल नंबर और पता गलत दिया था, जो दिल्ली से लौटा था। करीब 32 घंटे बाद संक्रमित युवक को पार्क में अपने दोस्तों के साथ बैठा मिला था। अर्बन स्टेट में किराये के मकान में रहने वाले एक युवक ने भी अपना मोबाइल नंबर गलत दिया था, जो बिहार से लौटा था। उसे दो दिन में तलाश किया गया था। दिल्ली से आने के बाद जिला अस्पताल में कोविड-19 टेस्ट कराते समय 42 वर्षीय युवक ने भी ऐसी ही गलती दोहराई थी, जो तलाशी के दौरान एक होटल में ठहरा मिला था।
सातों संक्रमित मरीजों की तलाश जारी है। इस बारे में जिला प्रशासन को भी रिपोर्ट फाइल सौंपी गई है, ताकि जल्द सभी की पहचान की जा सके और संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सके। सैंपलिंग के दौरान कर्मियों को पूरी प्रक्रिया करने की हिदायत दी गई है, ताकि कोई गलत पता व फोन नंबर न देने पाए।
- डॉ. जया गोयल, डिप्टी सीएमओ, हिसार