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Hisar News: छात्राओं ने मांगी निजी बसों में फ्री पास से यात्रा की सुविधा, कोर्ट में दायर की याचिका
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हिसार। रोडवेज विभाग की ओर सेम जारी फ्री बस पास के बावजूद विद्यार्थियों और वरिष्ठ नागरिक को निजी बसों में यात्रा की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इससे आक्रोशित हांसी उपमंडल के गांव भाटोल जाटान की निवासी छात्राओं और ग्रामीणों ने न्यायालय की शरण ली है। आरजू, आशा, पुष्पा, महक, मोनिका, पूजा, इशु, राज कुमार और किसान नेता राजकुमार बामल सहित कुल 9 याचिकाकर्ताओं ने सिविल सूट दाखिल किया है। इसमें निजी बस संचालकों पर सरकारी आदेशों की अनदेखी का आरोप लगाया है।
याचिका में बताया गया है कि याचिकाकर्ताओं को हरियाणा परिवहन विभाग की ओर से फ्री बस पास जारी किए गए हैं, जिनके आधार पर सरकारी, सहकारी और निजी परमिटधारक बसों में मुफ्त यात्रा की अनुमति स्पष्ट रूप से दर्ज है। इसके बावजूद पिछले एक महीने से निजी बसों के परिचालक उन्हें बस में नहीं चढ़ने दे रहे। अन्यथा उन पर किराया देने का दबाव बना रहे हैं। छात्राओं का कहना है कि निजी बसों में चढ़ने की कोशिश करने पर उनसे दुर्व्यवहार तक किया जा रहा है।
छात्रा आरजू ने बताया कि वह और उसके गांव की अन्य छात्राएं हिसार स्थित गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय समेत अन्य सरकारी कॉलेजों में पढ़ती हैं। हम रोजाना निजी बसों से आती-जाती हैं, लेकिन बस संचालक हमारे पास को मानने से इन्कार कर देते हैं। कई बार तो उन्हें बस से उतार दिया जाता है। इसी परेशानी के कारण उन्होंने कोर्ट की शरण ली है।
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गांव भाटोल जाटन निवासी किसान नेता राजकुमार बामल ने बताया कि 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों से कई बार निजी बस संचालक पूरा किराया वसूल रहे हैं, जिससे बुजुर्गों को काफी परेशानी होती है। छात्राओं के साथ हो रहे भेदभाव और बुजुर्गों की दिक्कतों को देखते हुए याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से निजी बस मालिकों को फ्री पास स्वीकार करने और किराया वसूलने पर रोक लगाने के आदेश जारी करने की गुहार लगाई है। अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह बामल ने बताया कि मामले की सुनवाई स्थानीय सिविल जज की अदालत में दो जनवरी 2026 को तय की गई है।
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याचिका में बताया गया है कि याचिकाकर्ताओं को हरियाणा परिवहन विभाग की ओर से फ्री बस पास जारी किए गए हैं, जिनके आधार पर सरकारी, सहकारी और निजी परमिटधारक बसों में मुफ्त यात्रा की अनुमति स्पष्ट रूप से दर्ज है। इसके बावजूद पिछले एक महीने से निजी बसों के परिचालक उन्हें बस में नहीं चढ़ने दे रहे। अन्यथा उन पर किराया देने का दबाव बना रहे हैं। छात्राओं का कहना है कि निजी बसों में चढ़ने की कोशिश करने पर उनसे दुर्व्यवहार तक किया जा रहा है।
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छात्रा आरजू ने बताया कि वह और उसके गांव की अन्य छात्राएं हिसार स्थित गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय समेत अन्य सरकारी कॉलेजों में पढ़ती हैं। हम रोजाना निजी बसों से आती-जाती हैं, लेकिन बस संचालक हमारे पास को मानने से इन्कार कर देते हैं। कई बार तो उन्हें बस से उतार दिया जाता है। इसी परेशानी के कारण उन्होंने कोर्ट की शरण ली है।
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गांव भाटोल जाटन निवासी किसान नेता राजकुमार बामल ने बताया कि 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों से कई बार निजी बस संचालक पूरा किराया वसूल रहे हैं, जिससे बुजुर्गों को काफी परेशानी होती है। छात्राओं के साथ हो रहे भेदभाव और बुजुर्गों की दिक्कतों को देखते हुए याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से निजी बस मालिकों को फ्री पास स्वीकार करने और किराया वसूलने पर रोक लगाने के आदेश जारी करने की गुहार लगाई है। अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह बामल ने बताया कि मामले की सुनवाई स्थानीय सिविल जज की अदालत में दो जनवरी 2026 को तय की गई है।