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कोरोना संक्रमण ने एक महीने में लील लीं दो पीढ़ियां
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जय कुमार
नारनौंद (हिसार)। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने एक महीने में अंतर में भैणी अमीरपुर के पूर्व सरपंच व उनके बेटे को छीन लिया। परिवार में सास-बहू अकेली रह गईं। दो पीढ़ियों का इस तरह से चला जाना बेहद दुखद है।
भैणी अमीरपुर निवासी 76 वर्षीय मास्टर रामकुमार कौशिक 2005 से 2010 तक गांव के सरपंच रहे। सर्व कर्मचारी संघ में किसानों की आवाज को बुलंद किया। सेवानिवृत्ति के बाद भी रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए काम कर रहे थे। 15 अप्रैल को कोरोना के कारण एक निजी अस्पताल में उनका देहांत हो गया। उनके 53 वर्षीय बेटे डॉ. राजेंद्र शर्मा छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता रहे। वे हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय छात्र संघ के प्रधान भी रहे। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से एग्रीकल्चर इकनॉमिक्स में पीएचडी की पढ़ाई की थी। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमण से लड़ते हुए 14 मई को उन्हें दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई थी। उनका शादी सुशीला के साथ हुई थी। उनका कोई बच्चा नहीं हुआ।
छोटे भाई रमेश कौशिक ने बताया कि डॉ. राजेंद्र शर्मा की केंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान से भी अच्छी मित्रता थी, जब वे एचएयू के प्रेजिडेंट थे तो उनके साथ संजीव बाल्यान उनकी कार्यकारिणी में सचिव के पद पर उनके साथ कार्य करते थे।
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एचएयू में उनके जूनियर रहे डॉ. सुशील गोयत ने बताया कि डॉ. राजेंद्र ने एचएयू में 1992 में एचएयू स्टूडेंट यूनियन प्रेसिडेंट का पद संभालने के बाद छात्र हितों के लिए काम किया था। उनके प्रयासों से उत्तम कृषि स्नातक जैसी स्कॉलरशिप लागू हुई। 2012 में कृषि विभाग में नौकरी शुरू की। एडीओ एसोसिएशन के स्टेट के प्रेसिडेंट भी रहे थे। कई आंदोलनों व संगठनों से जुड़े रहे। उन्होंने परमाणु विरोधी मंच बनाकर हिसार के गांव गोरखपुर में परमाणु संयंत्र का भी विरोध किया था। अन्ना आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। मेधा पाटकर के नर्मदा बचाओ आंदोलन से भी जुड़े रहे। (संवाद)
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नारनौंद (हिसार)। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने एक महीने में अंतर में भैणी अमीरपुर के पूर्व सरपंच व उनके बेटे को छीन लिया। परिवार में सास-बहू अकेली रह गईं। दो पीढ़ियों का इस तरह से चला जाना बेहद दुखद है।
भैणी अमीरपुर निवासी 76 वर्षीय मास्टर रामकुमार कौशिक 2005 से 2010 तक गांव के सरपंच रहे। सर्व कर्मचारी संघ में किसानों की आवाज को बुलंद किया। सेवानिवृत्ति के बाद भी रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए काम कर रहे थे। 15 अप्रैल को कोरोना के कारण एक निजी अस्पताल में उनका देहांत हो गया। उनके 53 वर्षीय बेटे डॉ. राजेंद्र शर्मा छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता रहे। वे हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय छात्र संघ के प्रधान भी रहे। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से एग्रीकल्चर इकनॉमिक्स में पीएचडी की पढ़ाई की थी। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमण से लड़ते हुए 14 मई को उन्हें दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई थी। उनका शादी सुशीला के साथ हुई थी। उनका कोई बच्चा नहीं हुआ।
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छोटे भाई रमेश कौशिक ने बताया कि डॉ. राजेंद्र शर्मा की केंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान से भी अच्छी मित्रता थी, जब वे एचएयू के प्रेजिडेंट थे तो उनके साथ संजीव बाल्यान उनकी कार्यकारिणी में सचिव के पद पर उनके साथ कार्य करते थे।
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एचएयू में उनके जूनियर रहे डॉ. सुशील गोयत ने बताया कि डॉ. राजेंद्र ने एचएयू में 1992 में एचएयू स्टूडेंट यूनियन प्रेसिडेंट का पद संभालने के बाद छात्र हितों के लिए काम किया था। उनके प्रयासों से उत्तम कृषि स्नातक जैसी स्कॉलरशिप लागू हुई। 2012 में कृषि विभाग में नौकरी शुरू की। एडीओ एसोसिएशन के स्टेट के प्रेसिडेंट भी रहे थे। कई आंदोलनों व संगठनों से जुड़े रहे। उन्होंने परमाणु विरोधी मंच बनाकर हिसार के गांव गोरखपुर में परमाणु संयंत्र का भी विरोध किया था। अन्ना आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। मेधा पाटकर के नर्मदा बचाओ आंदोलन से भी जुड़े रहे। (संवाद)