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Hisar: बास महापंचायत में किसानों की हुंकार; हिंदू, मुस्लिम व सिख धर्म के लोगों ने लिए कड़े फैसले

Thu, 10 Aug 2023 01:31 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Thu, 10 Aug 2023 01:31 PM IST
सार

क्रांति दिवस के उपलक्ष्य में बास की अनाज मंडी में एक महापंचायत का आयोजन किया गया। किसान नेता सुरेश कोथ ने कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार हमारे को जाति और धर्म के नाम पर लड़ाई करवाकर आपसी भाईचारे को खराब करके अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करना चाहती है।

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Farmers roar in Bas Mahapanchayat in Hisar; People of Hindu, Muslim and Sikh religion took tough decisions
किसान नेता सुरेश कोथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय किसान मजदूर यूनियन के बैनर तले आयोजित महापंचायत ने एलान किया कि मुस्लिमों का बहिष्कार कर उन्हें गांव में न घुसने का प्रस्ताव पास करने वाले यहां आएं। किसी में हिम्मत है तो किसी भी समुदाय के व्यक्ति का रास्ता रोककर दिखाएं। महापंचायत में हिन्दू, मुस्लिम, सिख समुदाय के लोग शामिल हुए। महापंचायत के आयोजन सुरेश कोथ ने प्रस्ताव पढ़ा। सभी ने प्रस्ताव का समर्थन किया।

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हिन्दू, मुस्लिम व सिख धर्म के लोगों ने दिया भाईचारे को मजबूत करने का संदेश
क्रांति दिवस के उपलक्ष्य में बास की अनाज मंडी में एक महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत की अध्यक्षता बास गांव के बुजुर्ग रामचंद्र मोर ने की। किसान व खाप संगठनों ने शामिल होकर भाईचारे को मजबूत करने का संदेश दिया। किसान नेता सुरेश कोथ ने कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार हमारे को जाति और धर्म के नाम पर लड़ाई करवाकर आपसी भाईचारे को खराब करके अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करना चाहती है।
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कुछ लोगों ने प्रदेश को जलाने की साजिश रची थी। प्रदेश के बुद्धिजीवियों ने प्रदेश को जलने से बचा लिया है। हिंदू- मुस्लिम- सिख -ईसाई एकता का प्रस्ताव पढ़कर सुनाया और तीनों धर्मो के लोगों ने हाथ उठाकर इसका समर्थन किया। सुरेश कोथ ने कहा कि हमारे मुसलमान भाई यहां पर मौजूद हैं। उनको रोकने वालों की हिम्मत है तो यहां आकर इनको रोक कर दिखाएं।

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मुआवजा 50 हजार रुपये करने की मांग की

महापंचायत में बाढ़ग्रस्त किसानों को मुआवजा, एमएसपी गारंटी कानून, नूह में भाईचारे को कायम कराना, 22 अगस्त को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री घेराव को लेकर फैसले लिए गए। महापंचायत ने बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा 50 हजार रुपये करने की मांग की। अनुसूचित वर्ग के लोगो को घरों में नुकसान भरपाई के लिए 5 लाख रुपये दिए जाएं। बाढ़ में मारे गए पशुओं के लिए एक लाख रुपया प्रति मुआवजा दिया जाए।

मुस्लिम नेता शाहिद नवादा ने कहा कि सभी बंदे भगवान के है। सभी को कर्मो का फल मिलता है। हमें महाभारत और रामायण से सीखने की जरूरत है। सभी को मिलकर चलने की जरूरत है। किसी भी आदमी को मारने का अधिकार नहीं है। जब पानी, आकाश, सूर्य एक है तो हम सभी एक हैं। किसान नेता मंदीप नथवान ने कहा कि बीजेपी अंग्रेजों वाली फूट डालो राज करो की नीति अपनाकर राज करती है। लोगों को विकास के मुद्दे से हटाकर नूंह जैसी वारदातें करवाकर चुनाव जीतना चाहती है।

कामरेड इंद्रजीत ने कहा कि हमारा आंदोलन लूट और फूट के खिलाफ है। आपसी फूट से ऊपर उठकर यह आंदोलन लड़ना पड़ेगा। हमें सांप्रदायिकता और फूट के खिलाफ लड़ाई लड़नी है। 31 जुलाई को भी सरकार ने नूंह में फूट डालने की कोशिश की थी लेकिन हरियाणा के लोगों ने सरकार के मंसूबे को फेल कर दिया। 

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