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कोरोना का असर, ट्रेनों में 50 व बसों में 30 प्रतिशत सवारियां हुईं कम
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हिसार बस स्टैंड पर बिना मास्क के यात्री एवं रोडवेज कर्मचारी। संवाद
- फोटो : Hisar
हिसार। कोरोना का असर ट्रेनों व बसों में दिखना शुरू हो चुका है। ट्रेनों में 50 प्रतिशत व बसों में 30 प्रतिशत सवारियां कम हो गई हैं। रोजाना रेलवे और रोडवेज को पांच से छह लाख का नुकसान हो रहा है।
बता दें कि कोरोना की तीसरी लहर से पहले रेलवे को रोजाना साढ़े पांच लाख से ज्यादा आमदनी होती थी, मगर अब घटकर करीब तीन लाख रह गई हैं। जहां एक ओर पहले ट्रेनों में रोजाना 4700-4800 यात्री सफर करते थे।
अब करीब ढाई हजार यात्री ही सफर कर रहे हैं। इसी प्रकार रोडवेज को पहले रोजाना करीब 18 लाख आय होती थी, जो अब घटकर 15 लाख रह गई हैं।
दोनों जगह नहीं जांचे जा रहे सर्टिफिकेट
बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर रोजाना हजारों यात्री सफर करने पहुंचते हैं, लेकिन दोनों ही जगह यात्रियों के वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट तक नहीं जांचे जा रहे हैं। वहीं अब भी काफी यात्री ट्रेनों व बसों में बिना मास्क सफर कर रहे हैं। यहां तक कि रोडवेज चालक-परिचालक भी बिना मास्क देखे जा सकते हैं। सामाजिक दूरी का तो नामोनिशान तक नहीं हैं।
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बस स्टैंड पर लिए जा रहे प्रतिदिन 300 सैंपल
रेलवे स्टेशन पर वैक्सीनेशन तो दूर यहां सैंपल तक नहीं लिए जा रहे हैं। ऐसे में संक्रमण तेजी से बढ़ सकता हैं। उधर, बस स्टैंड पर मास्क नहीं पहनने वाले यात्रियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। यहां प्रतिदिन चार-पांच बिना मास्क चालान काटे जा रहे हैं। साथ ही यहां बिना मास्क पहुंचने वाले यात्रियों के प्रतिदिन करीब 300 कोरोना के सैंपल लिए जा रहे हैं।
रोडवेज को ढाई से तीन लाख का नुकसान
बसों में सवारियां कम होने से आय पर असर पड़ा है। स्कूल-कॉलेजों के लिए जाने वाली बसें बंद हो गई हैं। इसके अलावा 30 प्रतिशत सवारियां भी कम हो गई है। रोजाना रोडवेज को ढाई से तीन लाख का नुकसान हो रहा है।
- राहुल मित्तल, महाप्रबंधक, हिसार डिपो।
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बता दें कि कोरोना की तीसरी लहर से पहले रेलवे को रोजाना साढ़े पांच लाख से ज्यादा आमदनी होती थी, मगर अब घटकर करीब तीन लाख रह गई हैं। जहां एक ओर पहले ट्रेनों में रोजाना 4700-4800 यात्री सफर करते थे।
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अब करीब ढाई हजार यात्री ही सफर कर रहे हैं। इसी प्रकार रोडवेज को पहले रोजाना करीब 18 लाख आय होती थी, जो अब घटकर 15 लाख रह गई हैं।
दोनों जगह नहीं जांचे जा रहे सर्टिफिकेट
बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर रोजाना हजारों यात्री सफर करने पहुंचते हैं, लेकिन दोनों ही जगह यात्रियों के वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट तक नहीं जांचे जा रहे हैं। वहीं अब भी काफी यात्री ट्रेनों व बसों में बिना मास्क सफर कर रहे हैं। यहां तक कि रोडवेज चालक-परिचालक भी बिना मास्क देखे जा सकते हैं। सामाजिक दूरी का तो नामोनिशान तक नहीं हैं।
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बस स्टैंड पर लिए जा रहे प्रतिदिन 300 सैंपल
रेलवे स्टेशन पर वैक्सीनेशन तो दूर यहां सैंपल तक नहीं लिए जा रहे हैं। ऐसे में संक्रमण तेजी से बढ़ सकता हैं। उधर, बस स्टैंड पर मास्क नहीं पहनने वाले यात्रियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। यहां प्रतिदिन चार-पांच बिना मास्क चालान काटे जा रहे हैं। साथ ही यहां बिना मास्क पहुंचने वाले यात्रियों के प्रतिदिन करीब 300 कोरोना के सैंपल लिए जा रहे हैं।
रोडवेज को ढाई से तीन लाख का नुकसान
बसों में सवारियां कम होने से आय पर असर पड़ा है। स्कूल-कॉलेजों के लिए जाने वाली बसें बंद हो गई हैं। इसके अलावा 30 प्रतिशत सवारियां भी कम हो गई है। रोजाना रोडवेज को ढाई से तीन लाख का नुकसान हो रहा है।
- राहुल मित्तल, महाप्रबंधक, हिसार डिपो।