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आओ परीक्षा की करें तैयारी: बच्चों के लिखने व समझने की क्षमता में आई कमी, भरपाई करना बड़ी चुनौती

Wed, 23 Mar 2022 10:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 23 Mar 2022 10:42 PM IST
सार

कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं ठीक से नहीं चल सकीं। कोरोना काल का सबसे ज्यादा असर पहली से पांचवीं कक्षा तक विद्यार्थियों पर पड़ा, क्योंकि प्राथमिक स्तर पर डायरेक्ट मैथ की पढ़ाई सबसे ज्यादा कारगर साबित होती है।

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Decreased ability of children to write and understand
राजकीय प्राथमिक पाठशाला खारिया में अपने शिक्षक के साथ खुशी जाहिर करते विद्यार्थी।

विस्तार

कोरोना महामारी से राहत मिलने के बाद अब स्कूली विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया फिर से शुरू हुई है। स्कूल बंद रहने का सबसे ज्यादा असर प्राथमिक पाठशाला के विद्यार्थियों पर पड़ा है। बच्चों के लिखने और समझने की क्षमता में आई कमी की भरपाई करना अब बड़ी चुनौती है। शिक्षकों का कहना है पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थी लिखना तक भूल गए हैं। अब उनको जीरो स्तर से पढ़ाना शुरू किया गया है।

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शिक्षकों ने कहा कि प्राइमरी स्कूल के विद्यार्थियों के साथ-साथ मिडल व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के विद्यार्थियों में भी अब लगातार तीन घंटे पढ़ाई करने की कैपेसिटी नहीं रही है। 10वीं व 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों की परीक्षा को कुछ दिन शेष हैं। ऐसे में उन्हें मन लगाकर परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षा शेरनी का दूध है जो पीएगा वह दहाड़ेगा। यह दूध हमें स्कूल प्रांगण में ही पीने को मिला है।
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शिक्षकों का कहना है कि ऑनलाइन शिक्षण तकनीक नई होने के चलते बच्चों को समझने में समय लगा। कोरोना महामारी ने शिक्षा प्रक्रिया को काफी कमजोर कर दिया था। अब हालात सामान्य होने पर शिक्षकों ने एक बार फिर शिक्षा की कमजोर हुई प्रक्रिया को मजबूत करने का बीड़ा उठा लिया है।
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कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं ठीक से नहीं चल सकीं। कोरोना काल का सबसे ज्यादा असर पहली से पांचवीं कक्षा तक विद्यार्थियों पर पड़ा, क्योंकि प्राथमिक स्तर पर डायरेक्ट मैथ की पढ़ाई सबसे ज्यादा कारगर साबित होती है। छोटे बच्चे डायरेक्ट मैथ से ही ज्यादा सीखते हैं।

दो साल बाद पूर्ण रूप से स्कूल खुलने से ही पढ़ाई का रूटीन बना है। स्कूल खुलने पर जब प्राइमरी स्कूल के बच्चे स्कूलों में आए तो पता चला कि वे पहले का सीखा हुआ लगभग भूल गए हैं। अधिकतर तो ऐसे मिले जो लिखना भी भूल गए हैं। मिडल व मैट्रिक तक विद्यार्थियों में तीन घंटे तक लिखने की क्षमता भी नहीं रही है। - सुनील बास, शिक्षक, जीपीएस खारिया, जिला महासचिव राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा


वर्तमान स्तर में परीक्षाएं दो वर्ष बाद विधिवत तरीके से हो रही हैं। इस दौर में कोरोना काल का भयंकर दौर भी रहा है। 2 साल में अधिकतम समय स्कूल बंद रहे। सुव्यवस्थित शिक्षण की व्यवस्था भी नहीं हो पाई। ऑनलाइन से शिक्षण के प्रयास किए गए लेकिन ढांचागत सुविधाओं के अभाव में गरीब, वंचित तबके के छात्र इसका लाभ नहीं उठा पाए। बोर्ड ने कुछ पाठ्यक्रम भी घटाने का प्रयास किया लेकिन उसे घटाने में अध्यापक की भागीदारी को बहुत ही कम शामिल किया गया। सीबीएसई की भांति दो विषयों में तय सीमा तक अंक न प्राप्त करने पर कंपार्टमेंट का प्रावधान जारी रखा जाए। अब पूर्णत: स्कूल खुलने से पढ़ाई की व्यवस्था फिर से सही हो रही है। - प्रभु सिंह महासचिव, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ

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