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Hisar News: मरीज की बाईपास सर्जरी करने के आरोपी डॉ. यशपाल गिरफ्तार
Sun, 01 Sep 2024 04:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 01 Sep 2024 04:49 AM IST
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हिसार। अर्बन एस्टेट थाना पुलिस ने गीतांजलि अस्पताल में रोगी के उपचार में लापरवाही बरतने के आरोप में डॉ. यशपाल को गिरफ्तार किया है। इस मामले में मरीज की शिकायत पर पुलिस ने अस्पताल के संचालक डॉ. कमल किशोर और डॉ. यशपाल पर केस दर्ज किया था।
चरखीदादरी के अटेला गांव निवासी भूपेंद्र ने शिकायत दी थी कि साल 2018 में उसकी किडनी में दर्द हुआ था। उपचार के लिए वह गीतांजलि अस्पताल गया। संचालक डॉ. कमल किशोर ने उसे अस्पताल में ही कार्यरत डॉक्टर यशपाल के पास भेज दिया। आरोप है कि उन्होंने उसकी बाईपास सर्जरी कर दी। उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो उसे किसी बड़े अस्पताल में जाने की सलाह दी। इस लापरवाही पर की शिकायत उसने चीफ मेडिकल ऑफिसर से की। इसके बाद रोहतक पीजीआई की टीम ने जांच की तो डॉक्टरों की लापरवाही का पता चला।
रिपोर्ट में बताया गया कि डॉ. यशपाल के पास न तो यूरोलॉजी एंडोस्कोपी का अनुभव है और न ही इससे संबंधित कोई डिग्री है। मरीज को थ्रो बोसाइटोपेनिया और सेप्सिस के लक्षण थे। उसे मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में रेफर किया जाना चाहिए था। बजाय इसके गीतांजलि अस्पताल के संचालक ने बिना अनुभव वाले डॉक्टर से मरीज का ऑपरेशन करवा दिया। भूपेंद्र जब गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उपचार कराने गया तो वहां उसे देख रहे डॉ. राकेश ने कहा कि आपका केस तो बिगाड़ दिया है।
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उन्होंने डॉ. यशपाल से बात कर कहा कि आपने मरीज की जान जोखिम में डाल दी है। डॉ. राकेश ने भूपेंद्र का ऑपरेशन कर मेरे पेट से खून की गांठ निकाली। इस इलाज में करीब 20 लाख रुपए खर्च हो गए। दोनों चिकित्सकों की लापरवाही सामने आने पर पुलिस ने केस दर्ज किया था।
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चरखीदादरी के अटेला गांव निवासी भूपेंद्र ने शिकायत दी थी कि साल 2018 में उसकी किडनी में दर्द हुआ था। उपचार के लिए वह गीतांजलि अस्पताल गया। संचालक डॉ. कमल किशोर ने उसे अस्पताल में ही कार्यरत डॉक्टर यशपाल के पास भेज दिया। आरोप है कि उन्होंने उसकी बाईपास सर्जरी कर दी। उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो उसे किसी बड़े अस्पताल में जाने की सलाह दी। इस लापरवाही पर की शिकायत उसने चीफ मेडिकल ऑफिसर से की। इसके बाद रोहतक पीजीआई की टीम ने जांच की तो डॉक्टरों की लापरवाही का पता चला।
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रिपोर्ट में बताया गया कि डॉ. यशपाल के पास न तो यूरोलॉजी एंडोस्कोपी का अनुभव है और न ही इससे संबंधित कोई डिग्री है। मरीज को थ्रो बोसाइटोपेनिया और सेप्सिस के लक्षण थे। उसे मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में रेफर किया जाना चाहिए था। बजाय इसके गीतांजलि अस्पताल के संचालक ने बिना अनुभव वाले डॉक्टर से मरीज का ऑपरेशन करवा दिया। भूपेंद्र जब गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उपचार कराने गया तो वहां उसे देख रहे डॉ. राकेश ने कहा कि आपका केस तो बिगाड़ दिया है।
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उन्होंने डॉ. यशपाल से बात कर कहा कि आपने मरीज की जान जोखिम में डाल दी है। डॉ. राकेश ने भूपेंद्र का ऑपरेशन कर मेरे पेट से खून की गांठ निकाली। इस इलाज में करीब 20 लाख रुपए खर्च हो गए। दोनों चिकित्सकों की लापरवाही सामने आने पर पुलिस ने केस दर्ज किया था।