हिसार: डॉ. विनोद कुमार वर्मा बने लुवास के कुलपति, रैंकिंग में सुधार, नया कैंपस, आधुनिक लैब, पशुपालकों की आय बढ़ाना लक्ष्य
डॉ. गुरदियाल सिंह 28 मार्च 2017 को कुलपति बने थे और मार्च 2021 में उनका कार्यकाल पूरा हो गया था। इसके बाद से ही नए कुलपति के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई थी।
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हरियाणा के हिसार में स्थित लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार वर्मा को नया कुलपति नियुक्त किया गया है। चंडीगढ़ में आयोजित बैठक में कुलपति के नाम का एलान कर दिया गया।
लुवास के कुलपति का चयन करने के लिए वीरवार को प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक आहूत की गई। बैठक में कृषि एवं वित्त विभाग के मुख्य सचिव, लुवास के कुलसचिव भी शामिल हुए। बैठक में काफी मंथन के बाद डॉ. विनोद वर्मा को विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त किया गया।
डॉ. विनोद वर्मा ने विश्वविद्यालय में 1993 में सहायक प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं शुरू की थी। 2009 में वह प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत हुए। 2014 से वह वेटरनेरी फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष के रूप में तैनात हैं। नवनियुक्त कुलपति को लुवास्ता प्रधान डॉ. अशोक मलिक ने संगठन की ओर से बधाई दी।
बता दें कि डॉ. गुरदियाल सिंह 28 मार्च 2017 को कुलपति बने थे और मार्च 2021 में उनका कार्यकाल पूरा हो गया था। इसके बाद से ही नए कुलपति के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। मार्च 2021 में कोविड-19 की दूसरी लहर के कारण बैठक नहीं हो सकी थी। इस कारण प्रो. गुरदियाल सिंह ही कार्यभार संभाल रहे थे।
लुवास को रैंकिंग में सुधार, नया कैंपस, आधुनिक लैब, पशुपालकों की आय बढ़ाना लक्ष्य
लुवास के नवनियुक्त कुलपति प्रो. डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि लुवास को देश की टॉप 10 यूनिवर्सिटी में लाना हमारी प्राथमिकता रहेगी। एक टीम के तौर पर सभी को साथ लेकर काम करेंगे। पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों में लुवास को देश का पहला संस्थान बनाने का लक्ष्य लेकर काम करेंगे। लुवास के नए कैंपस को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा।
अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी की रैंकिंग में सुधार पहली प्राथमिकता होगी। जिससे भविष्य के गुणवत्तापरक विद्यार्थी-शिक्षक यहां तैयार किए जा सकेंगे। फिलहाल 33वीं रैकिंग है। जिसे हम टॉप 10 में लाने का प्रयास करेंगे। पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों में पांचवीं रैंक है, जिसे पहले नंबर पर लाने का लक्ष्य लेकर काम करेंगे। किसानों व पशुुपालकों की आय बढ़ाने के लिए काम किया जाएगा। इसके लिए पशु पालकों को नए प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाएंगे। हर स्तर पर उनका सहयोग किया जाएगा। एनीमल हसबेंडरी को हम एनीमल इंडस्ट्री के तौर पर विकसित करने का प्रयास करेंगे। इससे पशुपालकों की आय को बढ़ाया जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुसार पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए काम करेंगे।
फैकल्टी को इंटरनेशनल लेवल पर दिलाएंगे ट्रेनिंग
यूनिवर्सिटी की लैब को आधुनिक स्तर पर विकसित करेंगे। आधुनिक उपकरण यहां स्थापित किए जाएंगे। इससे नए शोध कार्यों में आसानी हो सके। फैकल्टी को नेशनल-इंटरनेशनल लेवल पर ट्रेनिंग दिलाएंगे। देश विदेश के प्रमुख संस्थानों के साथ एमओयू किए जाएंगे। इससे वहां के विद्यार्थी-शिक्षक लुवास आ सकेंगे।
हमारे शिक्षक-विद्यार्थी वहां जाकर शिक्षण-प्रशिक्षण ले सकेंगे। डिजिटलाइजेशन के लिए पूरी शक्ति के साथ काम करेंगे। यूनिक आइडिया को डेवलेप करने पर काम होगा। नए कैंपस को जल्द से जल्द पूरा कराया जाएगा। नया कैंपस आधुनिक मानकों के अनुसार पूरा होगा। जहां स्टाफ की कमी होगी उसे पूरा कराया जाएगा।
पीएम नरेंद्र मोदी के लोकल फोर वोकल के अनुसार हम नई टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए काम करेंगे। नए आइडिया पर काम किया जाएगा। युवाओं को पशु क्षेत्र के उद्यमों के लिए प्रेरित करेंगे। उनको इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मदद की जाएगी।
सरकारी स्कूल के विद्यार्थी रहे कुलपति
कुलपति प्रो. विनोद कुमार पहली से बारहवीं कक्षा तक राजकीय स्कूल के विद्यार्थी रहे हैं। मूल रूप से महेंद्रगढ़ जिले के गांव भूषणकलां के रहने प्रो. विनोद कुमार ने आठवीं तक की शिक्षा अपने गांव के राजकीय स्कूल से ली। इसके बाद नौंवी से बारहवीं कक्षा नारनौल राजकीय स्कूल व कॉलेज से पूरी की। एचएयू से बीवीएससी, एमवीएससी की डिग्री ली। इसके बाद एचएयू में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नौकरी शुरू की। नौकरी के दौरान ही पीएचडी की। 2009 में प्रोफेसर बने। वर्ष 2014 से वर्तमान तक वेटरनरी फार्माकोलॉजी विभाग के हेड के तौर पर काम कर रहे हैं।
पशुओं का हर्बल उत्पादों से करेंगे उपचार
कुलपति प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि हर्बल उत्पादों से पशुओं के उपचार के लिए दवा तैयार कराने पर विस्तार से काम कराएंगे। पशुओं में दवाओं का उपयोग किया जाता है। बाद में पशुओं में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। जिस कारण दवा का असर कम होना शुरू हो जाता है। डब्ल्यूएचओ का भी इसी पर फोकस है। हर्बल प्रोडक्ट के जरिए नई दवा विकसित करेंगे। जिनका प्रभाव लंबे समय तक रहे, उनका दुष्प्रभाव न हो।