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Hisar News: डरें न लालच करें...साइबर अपराध से बचने का यही उपाय
Fri, 31 Oct 2025 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Fri, 31 Oct 2025 12:40 AM IST
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हिसार अमर उजाला कार्यालय में अपराजिता कार्यक्रम में आपस में चर्चा करती महिलाएं।
हिसार। आज के डिजिटल युग में साइबर अपराध इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं कि हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी रूप में इनका शिकार हो रहा है। ऐसे में डरें न लालच करें और सतर्क रहें, यही साइबर अपराध से बचने का सबसे बड़ा उपाय है। वीरवार को अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के तहत प्रेरणा क्लब की महिलाओं के लिए साइबर अपराधों से बचाव के लिए अमर उजाला कार्यालय में कार्यशाला का आयोजन किया गया।
साइबर थाना हिसार से पहुंची टीम ने महिलाओं को साइबर अपराधों के नए-नए रूप और उनसे बचाव के तरीके बताए। साइबर एक्सपर्ट व सिपाही समिति ने कहा कि जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, ठगों के तरीके भी आधुनिक होते जा रहे हैं। जानकारी की कमी, लालच और डर यही तीन कारण हैं, जो लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाते हैं। साइबर फ्रॉड से बचने का एक ही तरीका है डरें न लालच करें। किसी संदिग्ध कॉल, लिंक या संदेश मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करने की सलाह दी गई। इस अवसर पर प्रेरणा क्लब की सदस्य कमला सैनी, सुनीता गुप्ता, आशा, कौशल सहरावत, कुसुम, गगन रहेजा, संतोष सोनी और स्वाति ढींगड़ा मौजूद रहीं।
एआई आवाज और वीडियो कॉल से ठग रहे अपराधी
एक्सपर्ट ने बताया कि अब साइबर ठग एआई जनरेटेड आवाजों का इस्तेमाल कर लोगों को झांसे में ले रहे हैं। वे बच्चों या रिश्तेदारों की आवाज में कॉल कर कहते हैं कि वे किसी मुसीबत में फंसे हैं। लोग बिना सत्यापन किए डर के कारण ठगों को पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। इसी तरह फेक पार्सल स्कैम के जरिए भी लोगों को फंसाया जा रहा है। इसमें कॉल या स्काइप वीडियो कॉल के माध्यम से बताया जाता है कि आपके नाम से कोई पार्सल पकड़ा गया है, जिसमें अवैध सामान मिला है। ठग खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर डर का माहौल बनाते हैं और पैसों की मांग करते हैं। कई बार वीडियो कॉल में वे वर्दी पहने नजर आते हैं, जिससे लोग भ्रमित हो जाते हैं और डर के कारण स्थानीय पुलिस से संपर्क नहीं करते।
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थर्ड पार्टी एप्स और फर्जी ऑफर्स से रहें सावधान
साइबर थाने के सिपाही जोगिंदर ने कहा कि किसी भी थर्ड पार्टी एप जैसे जीबी व्हाट्सएप या अन्य अनजान एप का उपयोग न करें। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर आने वाले फर्जी ऑनलाइन शॉपिंग ऑफर्स या लिंक पर क्लिक न करें। अक्सर लोग पैसे बचाने के लालच में लिंक खोल देते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं। पुराने मोबाइल फोन खरीदते समय बिल और ओनरशिप प्रूफ लेना जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान संचालिका रमा ने पूछा कि अगर किसी को इस तरह की कॉल मिले तो क्या करें? इस पर एक्सपर्ट्स ने बताया कि तुरंत उस नंबर को ब्लॉक करें और नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। एक्सपर्ट्स ने कहा कि साइबर सुरक्षा का पहला नियम सावधानी है। अनजान नंबरों से वीडियो कॉल, मैसेज या ईमेल से बचें। समय-समय पर पासवर्ड बदलें और सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा न करें।
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साइबर थाना हिसार से पहुंची टीम ने महिलाओं को साइबर अपराधों के नए-नए रूप और उनसे बचाव के तरीके बताए। साइबर एक्सपर्ट व सिपाही समिति ने कहा कि जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, ठगों के तरीके भी आधुनिक होते जा रहे हैं। जानकारी की कमी, लालच और डर यही तीन कारण हैं, जो लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाते हैं। साइबर फ्रॉड से बचने का एक ही तरीका है डरें न लालच करें। किसी संदिग्ध कॉल, लिंक या संदेश मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करने की सलाह दी गई। इस अवसर पर प्रेरणा क्लब की सदस्य कमला सैनी, सुनीता गुप्ता, आशा, कौशल सहरावत, कुसुम, गगन रहेजा, संतोष सोनी और स्वाति ढींगड़ा मौजूद रहीं।
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एआई आवाज और वीडियो कॉल से ठग रहे अपराधी
एक्सपर्ट ने बताया कि अब साइबर ठग एआई जनरेटेड आवाजों का इस्तेमाल कर लोगों को झांसे में ले रहे हैं। वे बच्चों या रिश्तेदारों की आवाज में कॉल कर कहते हैं कि वे किसी मुसीबत में फंसे हैं। लोग बिना सत्यापन किए डर के कारण ठगों को पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। इसी तरह फेक पार्सल स्कैम के जरिए भी लोगों को फंसाया जा रहा है। इसमें कॉल या स्काइप वीडियो कॉल के माध्यम से बताया जाता है कि आपके नाम से कोई पार्सल पकड़ा गया है, जिसमें अवैध सामान मिला है। ठग खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर डर का माहौल बनाते हैं और पैसों की मांग करते हैं। कई बार वीडियो कॉल में वे वर्दी पहने नजर आते हैं, जिससे लोग भ्रमित हो जाते हैं और डर के कारण स्थानीय पुलिस से संपर्क नहीं करते।
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थर्ड पार्टी एप्स और फर्जी ऑफर्स से रहें सावधान
साइबर थाने के सिपाही जोगिंदर ने कहा कि किसी भी थर्ड पार्टी एप जैसे जीबी व्हाट्सएप या अन्य अनजान एप का उपयोग न करें। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर आने वाले फर्जी ऑनलाइन शॉपिंग ऑफर्स या लिंक पर क्लिक न करें। अक्सर लोग पैसे बचाने के लालच में लिंक खोल देते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं। पुराने मोबाइल फोन खरीदते समय बिल और ओनरशिप प्रूफ लेना जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान संचालिका रमा ने पूछा कि अगर किसी को इस तरह की कॉल मिले तो क्या करें? इस पर एक्सपर्ट्स ने बताया कि तुरंत उस नंबर को ब्लॉक करें और नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। एक्सपर्ट्स ने कहा कि साइबर सुरक्षा का पहला नियम सावधानी है। अनजान नंबरों से वीडियो कॉल, मैसेज या ईमेल से बचें। समय-समय पर पासवर्ड बदलें और सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा न करें।