{"_id":"60ff0f5f8ebc3e789d23eb20","slug":"donated-blood-tribute-to-the-martyrs-of-kargil-war-hisar-news-hsr6071908133","type":"story","status":"publish","title_hn":"रक्तदान कर दी कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रक्तदान कर दी कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिवानी मंडी। कारगिल विजय दिवस के अवसर युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए सोमवार को सेठ मेघराज जिंदल राजकीय महाविद्यालय में रक्तदान शिविर लगाया गया। अमर उजाला फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित शिविर में 108 युवाओं ने रक्तदान किया। इस दौरान रक्तदानियों को स्मृति चिह्न के अलावा एक-एक पौधा देकर सम्मानित किया गया।
‘लहू देश के लिए’ स्लोगन के तहत आयोजित रक्तदान शिविर का शुभारंभ मुख्य अतिथि बाबूलाल जिंदल ने किया। कॉलेज प्राचार्य डॉ. राजकुमार ख्यालिया ने सबसे पहले रक्तदान किया। प्राचार्य से प्रेरित होकर डॉ. कार्तिक अरोड़ा, डॉ. मुनीष, डॉ. मीनाक्षी, शकुंतला, सुजाता, सुनील कुमार, सुुनीता जनावा, सुनील, महीपाल सिंह, अमित, शीशराम, नरेश ने भी रक्तदान कर किसी जरूरतमंद का जीवन बचाने में सहयोग किया। हिसार व भिवानी रेडक्रॉस की टीम ने रक्त एकत्र किया। इस दौरान नेहरू युवा केंद्र बड़वा की ओर से पौधे भेंट किए गए। शिविर में एनएसएस प्रभारी डॉ. सुनीता जनावा, डॉ. येशु, डॉ. शकुंतला, सुनैना, स्वंयसेवक सचिन जांगड़ा, सिवानी जन जागृति मंच, युवा जागृृति क्लब, जयहिंद युवा क्लब लीलस का सहयोग रहा।
हर स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए। रक्त का कोई विकल्प नहीं है। हम एक यूनिट रक्तदान कर किसी के अमूल्य जीवन को बचा सकते हैं। रक्तदान को महादान माना जाता है। - डॉ. राजकुमार ख्यालिया, प्राचार्य, राजकीय कॉलेज
विज्ञापन
जिन लोगों ने हमारे लिए अपने प्राणों की आहुति दी, उनके लिए इस तरह रक्तदान कर युवाओं ने अच्छा संदेश दिया है। प्राचार्य आरके ख्यालिया की अच्छी सोच के चलते यह कार्य पूरा हो पाया। युवाओं को इससे प्ररेणा मिलेगी। - बाबूलाल जिंदल, समाजसेवी एवं उद्योगपति
हमने 200 से अधिक पंजीकरण किए थे। रेडक्रॉस टीम की एक तय क्षमता होने के कारण हमें शिविर को बीच में ही रोकना पड़ा। शिविर 108 युवाओं ने रक्तदान किया। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के युवा भी शामिल रहे। - डॉ. सुनीता जनावा, एनएसएस प्रभारी
एनएसएस के स्वंयसेवकों ने सबसे अधिक संख्या में रक्तदान किया है। रक्तदान के बाद इन युवाओं ने व्यवस्था बनाने में सहयोग किया। कोरोना के नियमों के अनुसार सभी कमरों, बेड को सैनिटाइज किया गया। रक्तदान कर हम किसी जरूरतमंद का जीवन बचा सकते हैं। - सचिन जांगड़ा, स्वंयसेवक
हर तीन महीने में रक्तदान करना चाहिए। छात्राएं भी अब रक्तदान करने में पीछे नहीं हैं। सोमवार को आयोजित शिविर में 32 छात्राओं ने रक्तदान किया। कुछ छात्राओं को पंजीकरण होने के बाद वापस जाना पड़ा। रक्तदान युवाओं की प्राथमिकता होनी चाहिए। - मनीषा, रक्तदाता
रक्तदान हमें कई तरह की बीमारियों से बचाता है। 18 से 60 साल की आयु के सभी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकते हैं। रक्तदान के समय इसके कई टेस्ट होते हैं। सामान्य तौर पर हम ऐसे टेस्ट नहीं कराते। इन टेस्ट से बीमारियों की संभावना का भी पता लग जाता है। - पूनम, रक्तदाता
विज्ञापन
‘लहू देश के लिए’ स्लोगन के तहत आयोजित रक्तदान शिविर का शुभारंभ मुख्य अतिथि बाबूलाल जिंदल ने किया। कॉलेज प्राचार्य डॉ. राजकुमार ख्यालिया ने सबसे पहले रक्तदान किया। प्राचार्य से प्रेरित होकर डॉ. कार्तिक अरोड़ा, डॉ. मुनीष, डॉ. मीनाक्षी, शकुंतला, सुजाता, सुनील कुमार, सुुनीता जनावा, सुनील, महीपाल सिंह, अमित, शीशराम, नरेश ने भी रक्तदान कर किसी जरूरतमंद का जीवन बचाने में सहयोग किया। हिसार व भिवानी रेडक्रॉस की टीम ने रक्त एकत्र किया। इस दौरान नेहरू युवा केंद्र बड़वा की ओर से पौधे भेंट किए गए। शिविर में एनएसएस प्रभारी डॉ. सुनीता जनावा, डॉ. येशु, डॉ. शकुंतला, सुनैना, स्वंयसेवक सचिन जांगड़ा, सिवानी जन जागृति मंच, युवा जागृृति क्लब, जयहिंद युवा क्लब लीलस का सहयोग रहा।
विज्ञापन
हर स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए। रक्त का कोई विकल्प नहीं है। हम एक यूनिट रक्तदान कर किसी के अमूल्य जीवन को बचा सकते हैं। रक्तदान को महादान माना जाता है। - डॉ. राजकुमार ख्यालिया, प्राचार्य, राजकीय कॉलेज
विज्ञापन
जिन लोगों ने हमारे लिए अपने प्राणों की आहुति दी, उनके लिए इस तरह रक्तदान कर युवाओं ने अच्छा संदेश दिया है। प्राचार्य आरके ख्यालिया की अच्छी सोच के चलते यह कार्य पूरा हो पाया। युवाओं को इससे प्ररेणा मिलेगी। - बाबूलाल जिंदल, समाजसेवी एवं उद्योगपति
हमने 200 से अधिक पंजीकरण किए थे। रेडक्रॉस टीम की एक तय क्षमता होने के कारण हमें शिविर को बीच में ही रोकना पड़ा। शिविर 108 युवाओं ने रक्तदान किया। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के युवा भी शामिल रहे। - डॉ. सुनीता जनावा, एनएसएस प्रभारी
एनएसएस के स्वंयसेवकों ने सबसे अधिक संख्या में रक्तदान किया है। रक्तदान के बाद इन युवाओं ने व्यवस्था बनाने में सहयोग किया। कोरोना के नियमों के अनुसार सभी कमरों, बेड को सैनिटाइज किया गया। रक्तदान कर हम किसी जरूरतमंद का जीवन बचा सकते हैं। - सचिन जांगड़ा, स्वंयसेवक
हर तीन महीने में रक्तदान करना चाहिए। छात्राएं भी अब रक्तदान करने में पीछे नहीं हैं। सोमवार को आयोजित शिविर में 32 छात्राओं ने रक्तदान किया। कुछ छात्राओं को पंजीकरण होने के बाद वापस जाना पड़ा। रक्तदान युवाओं की प्राथमिकता होनी चाहिए। - मनीषा, रक्तदाता
रक्तदान हमें कई तरह की बीमारियों से बचाता है। 18 से 60 साल की आयु के सभी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकते हैं। रक्तदान के समय इसके कई टेस्ट होते हैं। सामान्य तौर पर हम ऐसे टेस्ट नहीं कराते। इन टेस्ट से बीमारियों की संभावना का भी पता लग जाता है। - पूनम, रक्तदाता