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तीन प्रयासों में असफल रहने पर भी हार न मानी, देवयानी ने चौथे प्रयास में हासिल की 222वीं रैंक
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बेटी देवयानी को मिठाई खिलाते मंडलायुक्त विनय सिंह।
- फोटो : Hisar
हिसार मंडलायुक्त विनय सिंह की बेटी देवयानी ने यूपीएससी की परीक्षा में 222वीं रैंक हासिल की है। देवयानी का यह चौथा प्रयास था। इससे पहले देवयानी ने वर्ष 2015, 2016 व 2017 में भी यह परीक्षा दी थी।
वर्ष 2017 में तो वह इंटरव्यू स्टेज तक पहुंच गई थीं। तीन बार परीक्षा में असफल होने के बाद भी देवयानी ने हार नहीं मानी और चौथी बार में सफलता हासिल की। देवयानी फिलहाल राजस्थान के अलवर जिले में चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं।
पिता ही प्रेरणास्रोत रहे
देवयानी ने बताया कि उन्होंने दसवीं व बारहवीं की परीक्षा एसएच सीनियर सेकेंडरी स्कूल चंडीगढ़ से पास की। इसके बाद वर्ष 2014 में बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग की। चूंकि उन्होंने शुरू से ही अपने पिता को सिविल सर्विस में देखा है तो उनकी भी इच्छा इसी फील्ड में जाने की थी। उनके पिता ही उनके प्रेरणास्रोत रहे हैं। देवयानी के मुताबिक उन्होंने कभी भी यह नहीं देखा कि वह कितने घंटे पढ़ती थी। वह जितने घंटे भी पढ़ाई करती थीं, उस दौरान पूरी गंभीरता से पढ़ाई करती थीं। चूंकि वह फिलहाल जॉब भी कर रही हैं तो पढ़ने के लिए ज्यादा समय नहीं मिलता था तो वीकेंड पर पढ़ने के लिए समय निकालती थीं। इस बार उन्होंने लक्ष्य रखा था कि ऑप्शनल विषय में स्कोर हाई रखना है। इंटरव्यू की तैयारी के लिए उन्होंने मॉक इंटरव्यू की मदद ली। इसके अलावा वह प्रतिदिन न्यूज पेपर पढ़ती थीं। उन्होंने राइटिंग पर भी फोकस किया। उन्हें इस बात की खुशी है कि इस बार उनकी मेहनत रंग लाई।
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वर्ष 2017 में तो वह इंटरव्यू स्टेज तक पहुंच गई थीं। तीन बार परीक्षा में असफल होने के बाद भी देवयानी ने हार नहीं मानी और चौथी बार में सफलता हासिल की। देवयानी फिलहाल राजस्थान के अलवर जिले में चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं।
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पिता ही प्रेरणास्रोत रहे
देवयानी ने बताया कि उन्होंने दसवीं व बारहवीं की परीक्षा एसएच सीनियर सेकेंडरी स्कूल चंडीगढ़ से पास की। इसके बाद वर्ष 2014 में बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग की। चूंकि उन्होंने शुरू से ही अपने पिता को सिविल सर्विस में देखा है तो उनकी भी इच्छा इसी फील्ड में जाने की थी। उनके पिता ही उनके प्रेरणास्रोत रहे हैं। देवयानी के मुताबिक उन्होंने कभी भी यह नहीं देखा कि वह कितने घंटे पढ़ती थी। वह जितने घंटे भी पढ़ाई करती थीं, उस दौरान पूरी गंभीरता से पढ़ाई करती थीं। चूंकि वह फिलहाल जॉब भी कर रही हैं तो पढ़ने के लिए ज्यादा समय नहीं मिलता था तो वीकेंड पर पढ़ने के लिए समय निकालती थीं। इस बार उन्होंने लक्ष्य रखा था कि ऑप्शनल विषय में स्कोर हाई रखना है। इंटरव्यू की तैयारी के लिए उन्होंने मॉक इंटरव्यू की मदद ली। इसके अलावा वह प्रतिदिन न्यूज पेपर पढ़ती थीं। उन्होंने राइटिंग पर भी फोकस किया। उन्हें इस बात की खुशी है कि इस बार उनकी मेहनत रंग लाई।
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