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Hisar News: जुलाई में बारिश की देरी ने 25 फीसदी घटा दी धान की पैदावार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Nov 2024 11:57 PM IST
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Delay in rain in July reduced paddy yield by 25%
हिसार अनाज मंडी में धान की खरीद करते आढ़ती।
हिसार। कपास में गुलाबी सुंडी के प्रकोप की आशंका के कारण जिले के किसानों ने इस बार धान की बढ़चढ़ कर बिजाई की। नतीजतन कपास बेल्ट में पहली बार धान बिजाई का रकबा कपास से बढ़कर 173725 एकड़ पहुंच गया, लेकिन जुलाई में कम बारिश के कारण पैदावार उतनी नहीं हो सकी, जितना कृषि विभाग ने आकलन किया था। करीब 25 प्रतिशत कम पैदावार का अनुमान है। ऐसे में किसानों को अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से मदद की आस है।
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कृषि विभाग और निजी बीमा कंपनी के अधिकारी फील्ड में सर्वे कर रहे हैं। सर्वे में औसत पैदावार कम निकली तो किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। यह मुआवजा औसत पैदावार तथा वास्तविक पैदावार के बीच अंतर को पूरा करने के लिए होगा।
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कृषि विभाग के मुताबिक जिले में इस बार धान का रकबा पिछले साल के मुकाबले बढ़कर 173725 एकड़ तक पहुंच गया था। वहीं कपास का रकबा बीते साल के 181600 एकड़ से कम होकर 131565 एकड़ रह गया। गुलाबी सुंडी के प्रकोप की आशंका में किसानों ने कपास को छोड़कर धान को अपनाया। बिजाई रकबे के हिसाब से कृषि विभाग का आकलन था कि 80 हजार एमटी धान की आवक मंडियों में होगी।
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जिले में 51734 एमटी धान की हुई खरीद

जिले की 13 मंडियों में एक अक्तूबर से धान की खरीद हो रही है। 15 नवंबर तक खरीद जारी रहेगी। हिसार की मंडी में पहली बार धान की खरीद शुरू हुई है। इससे पहले केवल मूंग व बाजरा की खरीद होती थी। जिले की सभी मंडियों में अब तक 51734 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है और 45442 मीट्रिक टन धान की उठान की गई है। खाद्य आपूर्ति विभाग ने 8674 , हैफेड ने 25701 व एचडब्ल्यूसी ने 11067 मीट्रिक टन धान की उठान की है। खरीद के 33 दिन बीत चुके हैं और अब तक 50 हजार एमटी धान ही मंडियों में आया है। खरीद 15 नवंबर तक होनी है। ऐसे में आखिरी 12 दिन 10 हजार एमटी धान और होने की संभावना है। कृषि विभाग के अधिकारी भी मान रहे हैं कि इस बार धान की पैदावार सामान्य से कम हुई है। धान की पैदावार औसत पैदावार से कितनी कम रही इसको लेकर कृषि विभाग की टीम सर्वे कर रही है।
पैदावार कम होने के 5 प्रमुख कारण
जुलाई माह में करीब 25 दिन बारिश न होना

जुलाई में तापमान लगातार सामान्य से अधिक बना रहना

कम पानी उपलब्धता वाले एरिया में धान की बिजाई

समय पर खाद की उपलब्धता न होना

कुछ एरिया में धान की फसल में बीमारी, कीट का प्रभाव

धान की खरीद अब तक
51734
मीट्रिक टन धान की खरीद जिले में अब तक
9588
एमटी खाद्य आपूर्ति विभाग ने खरीदा
29630
एमटी धान हैफेड ने खरीदा
12516
एमटी धान एचडब्ल्यूसी ने खरीदा
किस मंडी में कितनी खरीद
बरवाला में 13906
हांसी मंडी में 6696
खेड़ी जालब मंडी में 1592
लोहारी राघो मंडी में 2901
नारनौंद मंडी में 4942
पाबड़ा मंडी में 724
सिसाय मंडी में 3194
उकलाना मंडी में 17618
हिसार मंडी में 161
(धान की खरीद एमटी में)
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जिले की 13 मंडियों में 1 अक्तूबर से 2 नवंबर तक 51734 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। सबसे अधिक उकलाना मंडी में खरीद हुई है। हमने 80 हजार एमटी आवक का अनुमान लगाया था। अब लग रहा कि 60 हजार एमटी तक आवक होगी।

अमित शेखावत, जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक, हिसार
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पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार धान का रकबा बढ़ा है। पहली बार कपास से अधिक एरिया धान का रहा। जुलाई महीने में कम बारिश होने से पैदावार कुछ कम रही। कृषि विभाग की टीम तथा बीमा कंपनी के प्रतिनिधि फील्ड सर्वे कर रहे हैं, जिसके आधार पर औसत पैदावार तय होगी। पैदावार कम होने पर किसानों को फसल बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा दिया जाएगा।

- डॉ. राजबीर सिंह, कृषि उप निदेशक, हिसार
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धान तथा कपास की पैदावार कम रही है। औसत से कम पैदावार होने पर सरकार को किसानों को मुआवजा देना चाहिए। बीमा कंपनी को फसल बीमा योजना का लाभ देना चाहिए।
- दिलबाग हुड्डा, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन


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