{"_id":"625da5c23e57dc2e49546703","slug":"dabra-players-are-bringing-gold-by-sweating-in-the-mud-field-hisar-news-hsr62943014","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिट्टी के मैदान में पसीना बहाकर डाबड़ा के खिलाड़ी ला रहे सोना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिट्टी के मैदान में पसीना बहाकर डाबड़ा के खिलाड़ी ला रहे सोना
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिसार। खिलाड़ियों को अगर जमीनी स्तर से ही खेल सुविधाएं मिल जाए तो उन्हें पदक जीतने से कोई नहीं रोक सकता। मगर डाबड़ा में एस्ट्रोटर्फ और न ही खेल सुविधाएं होने के बावजूद यहां के खिलाड़ियों ने हौसला नहीं तोड़ा और प्रशिक्षण जारी रखा। आज गांव में खिलाड़ी मिट्टी के मैदान में पसीना बहाकर गोल्ड मेडल ला रहे हैं। ताजा उदाहरण भोपाल में हुई राष्ट्रीय पुरुष हॉकी प्रतियोगिता में देखने को मिला। हरियाणा टीम में शामिल प्रदीप, रवि और रोहित ने न केवल उम्दा प्रदर्शन किया, बल्कि टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका भी निभाई। इन खिलाड़ियों ने गांव से ही हॉकी में कॅरिअर बनाने की शुरुआत की और सपना पूरा किया, लेकिन आज भी खिलाड़ियों को सरकार से सुविधाएं मिलने का इंतजार है।
वर्तमान समय में 60 खिलाड़ी कर रहे अभ्यास
वर्तमान समय में डाबड़ा में 60 खिलाड़ी हॉकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें 30 से ज्यादा राष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे हैं। वहीं चार खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम चमका चुके हैं। इनमें संजय कालीरामण, अमित सिहाग, हिनवान और रोहित कुमार शामिल हैं।
20 साल से खिलाड़ियों को दे रहे निशुल्क प्रशिक्षण
गांव डाबड़ा में 20 साल से हॉकी कोच राजेंद्र सिहाग और उनकी धर्मपत्नी प्रवीणा सिहाग खिलाड़ियों को निशुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं। उनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ी आज सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। राजेंद्र सिहाग ने बताया कि कैमरी गांव की ओलंपियन शर्मिला गोदारा ने उनके पास ही हॉकी की शुरुआत की थी। शर्मिला आज टोक्यो ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन कर चुकी है।
विज्ञापन
मिट्टी के मैदान व एस्ट्रोटर्फ पर अभ्यास करने में जमीन आसमान का अंतर है। यदि खिलाड़ियों को जमीनी स्तर से ही एस्ट्रोटर्फ की सुविधा मिल जाए तो उनको पदक लाने से कोई नहीं रोक सकता। मिट्टी के मैदान में अभ्यास करने से चोटिल हो सकते हैं। सरकार से मांग है कि गांव में भी एस्ट्रोटर्फ की सुविधा मुहैया करवाई जाए।
- अमित कालीरावण, नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट, हॉकी
एस्ट्रोटर्फ पर तेजी से खेलना होता है। यदि हमें एस्ट्रोटर्फ की सुविधा मिल जाए तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता खेलने में दिक्कत नहीं आएगी। मिट्टी के मैदान पर अभ्यास कर सीधा एस्ट्रोटर्फ पर खेलना काफी मुश्किल होता है। हमारी मांग है कि गांव में ही सरकार की ओर से एस्ट्रोटर्फ बनवाया जाए।
- कर्मवीर यादव, नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट, हॉकी
हिसार में बने एस्ट्रोटर्फ पर तीन दिन लड़कियां और तीन दिन लड़कों को खेलने की अनुमति मिली हुई हैं। मगर हमें तीन दिन भी एस्ट्रोटर्फ नहीं मिलता। हॉकी खिलाड़ियों के लिए एस्ट्रोटर्फ पर अभ्यास करना जरूरी है, तभी वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत सकता है।
- रमन, नेशनल प्रतियोगिता में प्रतिभागी, हॉकी
विज्ञापन
वर्तमान समय में 60 खिलाड़ी कर रहे अभ्यास
वर्तमान समय में डाबड़ा में 60 खिलाड़ी हॉकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें 30 से ज्यादा राष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे हैं। वहीं चार खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम चमका चुके हैं। इनमें संजय कालीरामण, अमित सिहाग, हिनवान और रोहित कुमार शामिल हैं।
विज्ञापन
20 साल से खिलाड़ियों को दे रहे निशुल्क प्रशिक्षण
गांव डाबड़ा में 20 साल से हॉकी कोच राजेंद्र सिहाग और उनकी धर्मपत्नी प्रवीणा सिहाग खिलाड़ियों को निशुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं। उनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ी आज सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। राजेंद्र सिहाग ने बताया कि कैमरी गांव की ओलंपियन शर्मिला गोदारा ने उनके पास ही हॉकी की शुरुआत की थी। शर्मिला आज टोक्यो ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन कर चुकी है।
विज्ञापन
मिट्टी के मैदान व एस्ट्रोटर्फ पर अभ्यास करने में जमीन आसमान का अंतर है। यदि खिलाड़ियों को जमीनी स्तर से ही एस्ट्रोटर्फ की सुविधा मिल जाए तो उनको पदक लाने से कोई नहीं रोक सकता। मिट्टी के मैदान में अभ्यास करने से चोटिल हो सकते हैं। सरकार से मांग है कि गांव में भी एस्ट्रोटर्फ की सुविधा मुहैया करवाई जाए।
- अमित कालीरावण, नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट, हॉकी
एस्ट्रोटर्फ पर तेजी से खेलना होता है। यदि हमें एस्ट्रोटर्फ की सुविधा मिल जाए तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता खेलने में दिक्कत नहीं आएगी। मिट्टी के मैदान पर अभ्यास कर सीधा एस्ट्रोटर्फ पर खेलना काफी मुश्किल होता है। हमारी मांग है कि गांव में ही सरकार की ओर से एस्ट्रोटर्फ बनवाया जाए।
- कर्मवीर यादव, नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट, हॉकी
हिसार में बने एस्ट्रोटर्फ पर तीन दिन लड़कियां और तीन दिन लड़कों को खेलने की अनुमति मिली हुई हैं। मगर हमें तीन दिन भी एस्ट्रोटर्फ नहीं मिलता। हॉकी खिलाड़ियों के लिए एस्ट्रोटर्फ पर अभ्यास करना जरूरी है, तभी वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत सकता है।
- रमन, नेशनल प्रतियोगिता में प्रतिभागी, हॉकी