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संकट : प्रदेश में पहली बार व्यापक स्तर पर गुलाबी सूंडी का प्रकोप
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हिसार। प्रदेश में पहली बार व्यापक स्तर पर गुलाबी सूंडी का प्रकोप हुआ है। इससे कपास की 40 से 50 प्रतिशत फसलें बर्बाद हो गई। हिसार, फतेहाबाद, सिरसा और जींद जिले के क्षेत्रों में गुलाबी सूंडी की दस्तक ने वैज्ञानिकों के लिए भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। बंद टींडे के अंदर पनपने के कारण किसी भी तरह की दवाई (पेस्टीसाइड) का असर भी सूंडी पर नहीं हो पा रहा। जिले में कुल 1 लाख 50 हजार हेक्टेयर में से लगभग 30 हजार हेक्टेयर में कपास की फसल पर गुलाबी सूंडी का प्रकोप है। इससे उत्पादन और गुणवत्ता में भी गिरावट आने की संभावना है।
दक्षिण भारत से आई रूई के साथ हुई गुलाबी सुंडी की दस्तक
प्रदेश में पहली बार पिछले वर्ष उचाना क्षेत्र में गुलाबी सूंडी ने दस्तक दी थी। टींडे नहीं खिलने को लेकर हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय को मिली शिकायत के बाद जांच में गुलाबी सूंडी की प्रदेश में दस्तक होने की जानकारी मिली। आशंका है कि रूई की पिनाई करने वाले कारखानों से गुलाबी सूंडी का प्रकोप बढ़ा था। फैक्ट्रियों में दक्षिणी भारत से सस्ती रूई आती है। इनके माध्यम से गुलाबी सूंडी प्रदेश में पनपने की आशंका है।
3 वर्ष पहले बढ़ा था गुलाबी सूंडी का प्रकोप
देश में 3 वर्ष पहले कर्नाटक, गुजरात और कर्नाटका में गुलाबी सूंडी का मामला सामने आया था। इसके बाद कपास उत्पादक किसानों और व्यापारियों के लिए चिंताएं बढ़ गई थी। इस बार जिले में उकलाना, बरवाला और नारनौंद के कुछ क्षेत्रों में अभी तक गुलाबी सूंडी का प्रकोप देखा गया है। एचएयू के वैज्ञानिकों ने गुलाबी सूंडी की दस्तक पर चिंता जताते हुए सावधान रहने का आह्वान किया है।
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अगली बार के लिए ये बरतें सावधानियां
एक बार क्षेत्र में सूंडी की दस्तक के बाद बनछटी में सूंडी का प्यूपा पनपता है। यानी 3-4 माह में यह सुप्त अवस्था में होती है। फरवरी-मार्च में पतंगे बनकर उड़ती है और अंडे देती है। इससे फिर सुंडी बनती है। जो अगली बार कपास के पौधे लगने के बाद फूल के अंदर चली जाती है। इसके बाद टींडा बनता है तो यह अंदर घूस जाती है और टींडा बंद हो जाता है। इसलिए खेत में बनछटी इकट्ठा करने की बजाय गांव में प्लाटों में रखें। अगर खेत मे ही रखनी है तो फरवरी मार्च में स्प्रे करके ढक दें, ताकि प्यूपा से पतंगे उड़कर अंडे न दे सके।
- किसान बाहर के राज्यों से खुला बीज नहीं खरीदें। बीज की अधिकृत दुकानों से बिल के साथ प्रमाणित बीज ही खरीदें।
- पिनिंग फैक्टरी के मालिक मार्च से पहले पिनिंग का कार्य पूरा कर लें या रूई को ढककर रखें, ताकि प्यूपा से निकलने वाला पतंगा उड़कर न जा सके।
मेरे पास 6 एकड़ जमीन पर नरमा है। बारिश में टींडे खराब हो गए थे। जो बचे थे, वे खिल नहीं रहे थे। अंदर से देखा तो गुलाबी सुण्डी का प्रकोप मिला। 60 प्रतिशत से अधिक फसल बर्बाद हो गई है।
- कालूराम, किसान, लुदास
गुलाबी सूंडी के कारण कपास की फसल पर संकट बढ़ा है। इसका कोई इलाज अभी तक नहीं है। हालांकि सावधानी रखकर इसे कंट्रोल कर सकते हैं। पिनिंग फैक्टरियों के मालिकों से बैठक कर अपील करेंगे कि मार्च से पहले पिनाई का कार्य पूरा कर लें, ताकि प्यूपा से पतंगे निकलकर न उड़ें। कपास न होने के कारण सूंडी न पनप सके।
- डॉ. आरपी सिहाग, संयुक्त निदेशक, (कपास) कृषि विभाग हरियाणा
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दक्षिण भारत से आई रूई के साथ हुई गुलाबी सुंडी की दस्तक
प्रदेश में पहली बार पिछले वर्ष उचाना क्षेत्र में गुलाबी सूंडी ने दस्तक दी थी। टींडे नहीं खिलने को लेकर हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय को मिली शिकायत के बाद जांच में गुलाबी सूंडी की प्रदेश में दस्तक होने की जानकारी मिली। आशंका है कि रूई की पिनाई करने वाले कारखानों से गुलाबी सूंडी का प्रकोप बढ़ा था। फैक्ट्रियों में दक्षिणी भारत से सस्ती रूई आती है। इनके माध्यम से गुलाबी सूंडी प्रदेश में पनपने की आशंका है।
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3 वर्ष पहले बढ़ा था गुलाबी सूंडी का प्रकोप
देश में 3 वर्ष पहले कर्नाटक, गुजरात और कर्नाटका में गुलाबी सूंडी का मामला सामने आया था। इसके बाद कपास उत्पादक किसानों और व्यापारियों के लिए चिंताएं बढ़ गई थी। इस बार जिले में उकलाना, बरवाला और नारनौंद के कुछ क्षेत्रों में अभी तक गुलाबी सूंडी का प्रकोप देखा गया है। एचएयू के वैज्ञानिकों ने गुलाबी सूंडी की दस्तक पर चिंता जताते हुए सावधान रहने का आह्वान किया है।
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अगली बार के लिए ये बरतें सावधानियां
एक बार क्षेत्र में सूंडी की दस्तक के बाद बनछटी में सूंडी का प्यूपा पनपता है। यानी 3-4 माह में यह सुप्त अवस्था में होती है। फरवरी-मार्च में पतंगे बनकर उड़ती है और अंडे देती है। इससे फिर सुंडी बनती है। जो अगली बार कपास के पौधे लगने के बाद फूल के अंदर चली जाती है। इसके बाद टींडा बनता है तो यह अंदर घूस जाती है और टींडा बंद हो जाता है। इसलिए खेत में बनछटी इकट्ठा करने की बजाय गांव में प्लाटों में रखें। अगर खेत मे ही रखनी है तो फरवरी मार्च में स्प्रे करके ढक दें, ताकि प्यूपा से पतंगे उड़कर अंडे न दे सके।
- किसान बाहर के राज्यों से खुला बीज नहीं खरीदें। बीज की अधिकृत दुकानों से बिल के साथ प्रमाणित बीज ही खरीदें।
- पिनिंग फैक्टरी के मालिक मार्च से पहले पिनिंग का कार्य पूरा कर लें या रूई को ढककर रखें, ताकि प्यूपा से निकलने वाला पतंगा उड़कर न जा सके।
मेरे पास 6 एकड़ जमीन पर नरमा है। बारिश में टींडे खराब हो गए थे। जो बचे थे, वे खिल नहीं रहे थे। अंदर से देखा तो गुलाबी सुण्डी का प्रकोप मिला। 60 प्रतिशत से अधिक फसल बर्बाद हो गई है।
- कालूराम, किसान, लुदास
गुलाबी सूंडी के कारण कपास की फसल पर संकट बढ़ा है। इसका कोई इलाज अभी तक नहीं है। हालांकि सावधानी रखकर इसे कंट्रोल कर सकते हैं। पिनिंग फैक्टरियों के मालिकों से बैठक कर अपील करेंगे कि मार्च से पहले पिनाई का कार्य पूरा कर लें, ताकि प्यूपा से पतंगे निकलकर न उड़ें। कपास न होने के कारण सूंडी न पनप सके।
- डॉ. आरपी सिहाग, संयुक्त निदेशक, (कपास) कृषि विभाग हरियाणा