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अपहरणकर्ता का पिता अंत्येष्टि में शामिल होकर देता रहा सहानुभूति
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
Updated Sun, 24 Jan 2016 01:32 AM IST
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कॉलोनाइजर कुलदीप बूरा के अपहरण व ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। बूरा का अपहरण करने वाला उनके खास दोस्त का बेटा था। वह बेटा जिसे बूरा ने कभी अपनी गोद में खिलाया था। दोनों परिवारों के रिश्ते बड़े ही गहरे थे। घर में अकसर आना जाना था।
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शुरुआत में पुलिस भी असमंजस में थी आखिर कहां से जांच शुरू करें। किसी पर न कोई शक था और न ही कोई ऐसा पुलिस को कोई सुराग मिला जिससे जांच आगे बढ़ सके। हालात ऐसे थे की जिस पार्टनर के बेटे ने बूरा का अपहरण किया उसके पिता शुरुआत से लेकर अंत तक परिवार को सहानुभूति देने में लगे थे।
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जब वारदात के बाद बूरा को अस्पताल में ले जाया गया तब अपहरणकर्ता के पिता अस्पताल में थे। अंतिम संस्कार में भी वे शामिल हुए। मृतक के परिजनों का कहना है कि पिता इस मामले में शामिल हैं या नहीं यह जांच का विषय है। मगर बेटा दो दिन से घर से बाहर था। इस बात का पिता ने ना तो परिवार के सामने जिक्र किया और ना ही पुलिस के सामने।
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पार्टनर का बेटा नहीं हुआ शामिल तो शक की सुई घूमी
पुलिस व परिवार को तब शक हुआ जब पार्टनर सुरेंद्र का बेटा परिवार से बढ़कर ताऊ के साथ हुई ऐसी वारदात के बाद भी घर नहीं आया। पार्टनर से पूछताछ की गई तो उसने बेटे के दो दिन से घर से बाहर होने की बात कही। पुलिस की शक की सुई अब पार्टनर के बेटे पर टिक गई। जब जांच आगे बढ़ी तो कड़ियां जुड़ गईं।
परिवार से बढ़कर था रिश्ता, अब हर किसी पर होने लगा शक
परिवार के लोगों का कहना है कि पार्टनर के बेटे ने ऐसी वारदात की यह सुनकर हमारे पांव तले जमीन खिसक सी गई। जिन लोगों के साथ परिवार से बढ़कर रिश्ता था उन्होंने कॉलोनाइजर कुलदीप बूरा के साथ ही ऐसी वारदात कर डाली। परिवार के लोगों का कहना है कि अब तो हर किसी पर शक होने लगा है। किसको अपना समझें और किसको पराया।
परिजनों का आरोप चेन कड़ा और अंगूठी गायब
बूरा के परिवार के सदस्यों ने बताया कि अपहरणकर्ताओं की प्लानिंग फिरौती मांगने की थी। उन्होंने वारदात के दौरान बूरा के हाथ से सोने का कड़ा, एक सोने की चेन व एक सोने की अंगूठी तक निकाल ली।
इकलौता बेटा है सुरेंद्र फौजी का
आरोपी अपहरणकर्ता मृतक बूरा के पार्टनर सुरेंद्र पंघाल का इकलौता बेटा है। करीब सात आठ महीने पहले ही पंघाल ने बड़ी धूमधाम से बेटे की शादी की थी। उसके पास कोई कामधंधा नहीं था। कई सालों से दोनों परिवारों में दोस्ती थी। घर तक आना जाना था। पिता के दोस्त की प्रॉपर्टी और पैसों पर उसकी शुरुआत से ही नजर थी। उसने अपने दोस्तों का सहारा लिया और वारदात कर डाली।