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Hisar: चार्जशीट के बाद रिश्वत के आरोपी डीसीओ चौधरी फिर निलंबित, मामले की सुनवाई 15 दिसंबर को होगी
Thu, 27 Oct 2022 02:42 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Thu, 27 Oct 2022 02:42 AM IST
सार
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अनुमति मिलने के बाद अदालत में काफी देरी से चालान प्रस्तुत किया था। आरोप साबित होने पर सुरेश चौधरी नौकरी से भी बर्खास्त भी हो सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
होलसेल मेडिकल हॉल का लाइसेंस जारी कराने के लिए आवेदक से 40 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोपी डीसीओ को फिर निलंबित कर दिया गया है। हिसार के पूर्व दवा नियंत्रक अधिकारी (डीसीओ) सुरेश चौधरी के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने यह कार्रवाई की है। स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जी अनुपमा ने इस बारे में 20 अक्तूबर को आदेश जारी कर आरोपी को 20 अगस्त से निलंबित किया है।
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राज्य चौकसी ब्यूरो के इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने 6 अगस्त 2021 को रामायण गांव निवासी रामबिलास की शिकायत पर डीसीओ सुरेश चौधरी, सिवानी निवासी चपरासी रामपाल व दादरी के जगराम बास निवासी चालक सुमित के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
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घटना वाले दिन शाम को सुरेश चौधरी की निजी कार के चालक व एक चपरासी को टीम ने हिसार स्थित आधार अस्पताल के समीप से गिरफ्तार किया था जबकि वह स्वयं फरार हो गया था। पुलिस ने दोनों के कब्जे से 40 हजार रुपये बरामद किए थे। उसके बाद अगस्त 2021 में ही विभाग ने डीसीओ सुरेश चौधरी को निलंबित कर दिया था। उसके बाद उसे बहाल कर दिया गया था।
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हिसार के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार सिंगल की अदालत ने 14 अक्तूबर 2021 को सुरेश चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी। इससे पूर्व स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने सुरेश चौधरी को निलंबित कर विभागीय नियमों के नियम 7 के तहत चार्जशीट कर दिया था। आरोप साबित होने पर सुरेश चौधरी नौकरी से भी बर्खास्त भी हो सकता है।
आरोपी दो माह पुलिस की आंखों में झोंकता रहा धूल
इस मामले में घटना वाले दिन ही फरार होने के बाद डीसीओ सुरेश चौधरी करीब ढाई माह तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा और फिर हाईकोर्ट से उसको अग्रिम जमानत मिल गई। इसके बाद पुलिस ने सुरेश चौधरी को जांच में शामिल किया लेकिन विभाग ने मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी। पुलिस ने सुरेश चौधरी को छोड़कर बाकी आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर दिया। इसके बाद जब अनुमति मिली तो पुलिस ने 20 अगस्त 2022 को सुरेश चौधरी के खिलाफ चालान पेश कर दिया और अदालत ने चार्ज फ्रेम कर दिया।
इसके बाद गत 17 अक्टूबर को मामले की सुनवाई हुई तो कोई भी गवाह अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार मित्तल की अदालत ने दो गवाह इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह व अखिल पोपली के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं और उनको 15 दिसंबर को अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं।