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कालवास में डेरा प्रेमी ने रेलगाड़ी से कटकर की आत्महत्या
Updated Wed, 13 Sep 2017 12:59 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
हिसार-राजगढ़ रेलमार्ग पर गांव कालवास में सोमवार रात गांव निवासी डेरा प्रेमी 55 वर्षीय भूपसिंह ने ट्रेन से कटकर खुदकुशी कर ली। वह 20 साल से डेरे में रह रहा था। वह डेरामुखी प्रकरण से उपजे हालात के बाद 12 दिन पहले डेरा छोड़कर आया था। वह परिवार समेत मॉडल टाउन में रहने लगा और सोमवार को भाई प्रह्लाद के पास कालवास गया था।
मृतक के बेटे प्रदीप कुमार ने बताया कि उनका परिवार सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में रहता था। उसके पिता 20 साल से डेरे में रह रहे थे। वह परिवार को भी 10 साल पहले डेरे में ले गए थे। प्रदीप ने बताया कि वह वहां ड्राईक्लीन का काम करता था और उसके पिता फीटर रेहड़ा चलाते थे। उसने बताया कि कोर्ट ने डेरामुखी को सजा सुनाने के बाद वहां पुलिस ने सख्ती कर दी है। उसके बाद काफी परिवार डेरे से निकल गए हैं। हम परिवार समेत 30 अगस्त को डेरा छोड़कर यहां मॉडल टाउन में आ गए और किराये पर मकान लेकर रहने लगे। यहां आने पर उसके पिता को नींद नहीं आती थी और वे मानसिक तौर पर परेशान रहने लगे थे। वह सोमवार को अपने गांव जाने की बात कहकर घर से निकले थे। वह सोमवार रात को अपने भाई प्रह्लाद के घर खाना खाकर सो गए थे। प्रदीप ने बताया कि उसके चाचा प्रह्लाद ने मंगलवार सुबह घर से निकलकर देखा कि पास में रेलवे लाइन पर कुछ आदमी खड़े हैं। वह वहां गए तो मेरे पिता का शव पड़ा था। जीआरपी केे एसआई सुरेंद्र सिंह और जयकर्ण की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव कब्जे में ले लिया। शव का पोस्टमार्टम सिविल अस्पताल में किया गया। जीआरपी ने इस संबंध में इत्तफाकिया कार्रवाई की है।
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हिसार।
हिसार-राजगढ़ रेलमार्ग पर गांव कालवास में सोमवार रात गांव निवासी डेरा प्रेमी 55 वर्षीय भूपसिंह ने ट्रेन से कटकर खुदकुशी कर ली। वह 20 साल से डेरे में रह रहा था। वह डेरामुखी प्रकरण से उपजे हालात के बाद 12 दिन पहले डेरा छोड़कर आया था। वह परिवार समेत मॉडल टाउन में रहने लगा और सोमवार को भाई प्रह्लाद के पास कालवास गया था।
मृतक के बेटे प्रदीप कुमार ने बताया कि उनका परिवार सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में रहता था। उसके पिता 20 साल से डेरे में रह रहे थे। वह परिवार को भी 10 साल पहले डेरे में ले गए थे। प्रदीप ने बताया कि वह वहां ड्राईक्लीन का काम करता था और उसके पिता फीटर रेहड़ा चलाते थे। उसने बताया कि कोर्ट ने डेरामुखी को सजा सुनाने के बाद वहां पुलिस ने सख्ती कर दी है। उसके बाद काफी परिवार डेरे से निकल गए हैं। हम परिवार समेत 30 अगस्त को डेरा छोड़कर यहां मॉडल टाउन में आ गए और किराये पर मकान लेकर रहने लगे। यहां आने पर उसके पिता को नींद नहीं आती थी और वे मानसिक तौर पर परेशान रहने लगे थे। वह सोमवार को अपने गांव जाने की बात कहकर घर से निकले थे। वह सोमवार रात को अपने भाई प्रह्लाद के घर खाना खाकर सो गए थे। प्रदीप ने बताया कि उसके चाचा प्रह्लाद ने मंगलवार सुबह घर से निकलकर देखा कि पास में रेलवे लाइन पर कुछ आदमी खड़े हैं। वह वहां गए तो मेरे पिता का शव पड़ा था। जीआरपी केे एसआई सुरेंद्र सिंह और जयकर्ण की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव कब्जे में ले लिया। शव का पोस्टमार्टम सिविल अस्पताल में किया गया। जीआरपी ने इस संबंध में इत्तफाकिया कार्रवाई की है।
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