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रिश्वत मामला
Updated Sat, 28 Apr 2018 01:36 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
सिविल लाइन पुलिस ने वीरवार को आखिरकार काफी जद्दोजहद के बाद रिश्वत मामले में फतेहाबाद विजिलेंस के इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा समेत सात आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। सीआईडी की टीम ने शुक्रवार को फतेहाबाद के वेयर हाउस कार्पोरेशन के दफ्तर में दबिश दी, लेकिन वहां आरोपी रिटायर्ड जेई नहीं मिला। इसके अलावा टीम ने फतेहाबाद के विजिलेंस दफ्तर की निगरानी कराई। वहां इंस्पेक्टर भूपेंद्र मौजूद न होने की सूचना मिली। टीम बाद में लौट आई है। पुलिस प्रशासन ने केस दर्ज कर डीएसपी हेडक्वार्टर मोह्ममद जमाल को जांच अधिकारी बनाकर कार्रवाई का जिम्मा सौंपा है।
जानकारी के अनुसार फतेहाबाद जिले के गांव ढांड में हरियाणा वेयर हाउस कार्पोरेशन ने साल 2016 में गोदाम बनाए थे। सरकार के पास शिकायत पहुंची थी कि निर्माण में घटिया सामग्री लगाई गई है। सरकार ने जांच के बाद ठेकेदार को 32 लाख रुपये वापस जमा कराने के आदेश दिए थे और उसके बाद जांच विजिलेंस को करने केे लिए कहा था। पुलिस के अनुसार कार्पोरेशन अधिकारियों और कर्मचारियों को फंसने से बचाने के लिए इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा से 40 लाख रुपये की डील हुई थी। बताया जाता है कि इंस्पेक्टर 25 लाख रुपये पहले ले चुका है। रिटायर्ड जेई मोहन लाल वीरवार को इंस्पेक्टर भूपेंद्र को सात लाख रुपये देने के लिए कैंप चौक के पास आया था। टीम ने उसे नकदी समेत पकड़ लिया था। सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस संबंध में विजिलेंस इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा, कार्पोरेशन के रिटायर्ड जेई मोहन लाल नारंग, एक्सईएन विनीत चावला, सचिव प्रकाश वीर और तीन अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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हिसार।
सिविल लाइन पुलिस ने वीरवार को आखिरकार काफी जद्दोजहद के बाद रिश्वत मामले में फतेहाबाद विजिलेंस के इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा समेत सात आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। सीआईडी की टीम ने शुक्रवार को फतेहाबाद के वेयर हाउस कार्पोरेशन के दफ्तर में दबिश दी, लेकिन वहां आरोपी रिटायर्ड जेई नहीं मिला। इसके अलावा टीम ने फतेहाबाद के विजिलेंस दफ्तर की निगरानी कराई। वहां इंस्पेक्टर भूपेंद्र मौजूद न होने की सूचना मिली। टीम बाद में लौट आई है। पुलिस प्रशासन ने केस दर्ज कर डीएसपी हेडक्वार्टर मोह्ममद जमाल को जांच अधिकारी बनाकर कार्रवाई का जिम्मा सौंपा है।
जानकारी के अनुसार फतेहाबाद जिले के गांव ढांड में हरियाणा वेयर हाउस कार्पोरेशन ने साल 2016 में गोदाम बनाए थे। सरकार के पास शिकायत पहुंची थी कि निर्माण में घटिया सामग्री लगाई गई है। सरकार ने जांच के बाद ठेकेदार को 32 लाख रुपये वापस जमा कराने के आदेश दिए थे और उसके बाद जांच विजिलेंस को करने केे लिए कहा था। पुलिस के अनुसार कार्पोरेशन अधिकारियों और कर्मचारियों को फंसने से बचाने के लिए इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा से 40 लाख रुपये की डील हुई थी। बताया जाता है कि इंस्पेक्टर 25 लाख रुपये पहले ले चुका है। रिटायर्ड जेई मोहन लाल वीरवार को इंस्पेक्टर भूपेंद्र को सात लाख रुपये देने के लिए कैंप चौक के पास आया था। टीम ने उसे नकदी समेत पकड़ लिया था। सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस संबंध में विजिलेंस इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा, कार्पोरेशन के रिटायर्ड जेई मोहन लाल नारंग, एक्सईएन विनीत चावला, सचिव प्रकाश वीर और तीन अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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