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परिवार की याद दिलाकर बढ़ा रहे मरीजों का हौसला, तीमारदारों की हो रही काउंसिलिंग

Fri, 14 May 2021 12:52 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 14 May 2021 12:52 AM IST
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counseling of patint and their attendent in agroha medical college Hisar
कुलदीप जांगड़ा
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हिसार। कोरोना संक्रमित को स्वस्थ करने के लिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में डायरेक्टर से लेकर डॉक्टर और स्टाफ इलाज करने के साथ ही हर वह तरकीब अपना रहे हैं, जिससे मरीज जल्द ठीक होकर अपने घर जा सके सके। परिवार को याद दिलाकर मरीज का मनोबल बढ़ाते हैं तो अपने मरीज की चिंता में डटे तीमारदारों की भी काउंसलिंग की जी रही है, ताकि वे भी हौसला बनाए रखें।
मेडिकल कॉलेज में मरीजों के खाने पीने की डाइट की मॉनीटिरंग की जा रही है। कौन सा मरीज किस समय, कब और कितनी डाइट ले रहा है। अच्छी तरह से खाना पीना कर रहा है या नहीं। यह जिम्मेदारी स्टाफ ने खुद संभाली है। समय पर पूरी डाइट नहीं लेने वाले मरीजों में रिकवरी देरी से होती है। अब अधिकतर मरीज अच्छी तरह खाना पीना शुरू कर देते हैं फिर भी बच नहीं पाते। मरीजों का हौसला बढ़ाने के लिए उनको बार-बार अपने परिजनों की याद दिलाते हैं, जिससे उनके अंदर घर जाने की बच्चों से मिलने की लालसा हो। अंदर से उत्साहित होंगे तो जल्द रिकवर होते हैं।
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डायरेक्टर स्टाफ और मरीजों के साथ ही तीमारदारों का भी बढ़ा रहीं मनोबल
मेडिकल कॉलेज की डायरेक्टर डॉ. गीतिका दुुुग्गल स्टाफ का मनोबल बढ़ाने के लिए खुद वार्ड में पहुंचती हैं। हर समय स्थिति का अपडेट लेेती हैं। मरीजों को हर सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत रहती हैं। उनके कार्यभार संभालने के बाद मेडिकल कॉलेज में काफी सुविधाओं में इजाफा हुआ है। वे मरीजों और उनके तीमारदारों की काउंसिलिंग करने वाली टीम के साथ भी मौजूद रहती हैं।
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2096 मरीजों में से 1401 हुए ठीक, 494 ने तोड़ा दम, 198 अभी उपचाराधीन
जिले के कोविड-19 घोषित अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में पिछले साल से अब तक कोरोना के 2096 मरीज उपचार के लिए पहुंचे हैं। 1401 मरीज ठीक होने के बाद घर लौट चुके हैं। 494 मरीज उपचार के दौरान दम तोड़ गए। इसकेे अलावा गंभीर हालत के चलते तीन संक्रमित मरीजों को रोहतक पीजीआई में भी रेफर किया किया गया है। 198 मरीज अभी उपचाराधीन हैं। 2020 में मार्च माह में मेडिकल कॉलेज में आइसोलेशन वार्ड बनाया गया था। पिछले साल से लेकर अभी तक मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में लगातार सेवाएं जारी हैं। 30 मार्च 2020 को जिले का पहला पॉजिटिव केस मिलने वाले मरीज को भी मेडिकल कॉलेज ने दाखिल कर उपचार दिया था।
कई बार स्वस्थ होने के नजदीक पहुंचने पर दम तोड़ देता है मरीज
मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मवीरों के अनुसार अबकी बार ठीक होने की स्थिति में जा रहे मरीज भी अचानक दम तोड़ रहे हैं। हमारे पास कई ऐसे मरीज हैं, जो संक्रमण से काफी हद तक ठीक हो जाते हैं। अचानक हम उनको अपनी आंखों के सामने खो देते हैं। फिर भी हम मरीजों को स्वस्थ करेन के लिए अपना और उनका मनोबल बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। अबकी बार 20 से 40 वर्ष तक के भी मरीजों की भी मौत हो रही है। पिछले साल मरने वालों की उम्र ज्यादातर 40 वर्ष से अधिक होती थी। कोरोना को हराने के लिए अच्छा भोजन, मानसिक और शारीरिक रूप से हर समय पॉजिटिव सोच के साथ मजबूत करना बेहद जरूरी है।
मौत का कारण यह भी
चिकित्सकों की मानें तो ज्यादातर मरीजों को संक्रमण के 10 या 12 दिन बाद सांस की अधिक तकलीफ होती है। तब वह अस्पताल में आते हैं। उस समय संक्रमण के कारण उनके फेफड़े बिल्कुल सिकुड़ जाते हैं, जिन्हें वेंटिलेटर के सहारे ही फेफड़ों को फुलाकर ऑक्सीजन देते हैं। ऐसे में बहुत कम मरीज रिकॉर्ड कर पाते हैं। (संवाद)
इधर, हर मोर्चे पर डटे हैं स्वास्थ्य कर्मवीर
मैं और मेरी टीम देश की सेवा कर रहे हैं। चिकित्सक होने के नाते मेरा फर्ज है कि मरीजों की सेवा करूं। मेरी हर संभव कोशिश है कि मैं इस पर खरा उतरूं। पिछले साल से कोविड वार्ड में ड्यूटी पर हूं। अस्पताल में आने वाले किसी भी मरीज को इलाज के लिए मना नहीं किया है।
- डॉ. राजीव चौहान, नोडल अधिकारी, आइसोलेशन वार्ड,मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा।
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ज्यादातर लोग खांसी, जुकाम एवं बुखार को हल्के में लेते हैं। चौथे या पांचवें दिन तो मरीजों की सांस फूलने लगती तब वे अस्पताल में आते हैं। ऐसे में वह 10 या 15 दिन में रिकवर तो कर जाते हैं। उनको काफी दिनों तक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। पिछले एक साल से अब तक मेरी ड्यूटी आइसोलेशन वार्ड में ही है। अभी तक मैंने खुद को संक्रमण से भी बचाया है।
-डॉ. अनुराधा, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, आइसोलेशन वार्ड, मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा।
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स्टाफ कम होने के कारण मरीजों के खाने पीने की जिम्मेदारी मैंने खुद ली है। जो मरीज खुद खाना नहीं खा पाते मैं उनको भोजन कराती हूं। उनका मनोबल भी बढ़ाती हूं। मरीजों को हनुमान चालीसा भी पढ़कर सुनाती हूं। ताकि हर समय उनकी सोच पॉजिटिव रहे। उन्हें घर जाकर बच्चों से मिलने के लिए प्रेरित करती हूं, ताकि मरीज जल्दी रिकवरी करें। मैं हर रोज सुबह जोगिंग और योगा भी करती हूं।

-लखवीर कौर, स्टाफ नर्स, आइसोलेशन वार्ड, मेडिकल कॉलेज ,अग्रोहा।
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आइसोलेशन वार्ड में दाखिल कई मरीजों के तीमारदार बिना मास्क ही सीधे अंदर आते हैं। उनको बार-बार समझाते हैं। ऐसे में मरीजों की हालत देखते हैं तो बहुत दुख होता है। मुझे सुपरवाइजर का कार्यभार सौंपा गया है। आइसोलेशन वार्ड में दवा एवं उपकरण की व्यवस्था को बनाए रखना मेरी जिम्मेदारी है।
- परजिंदर कौर, स्टाफ नर्स, सुपरवाइजर, आइसोलेशन वार्ड ,मेडिकल कॉलेज
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