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कोरोना संक्रमित होने के बाद भी नहीं टूटा सेवा का हौसला
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वेदव्रत।
- फोटो : Hisar
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हिसार। कोरोना काल में फ्रंटलाइन ड्यूटी दे रहे स्वास्थ्य कर्मवीरों को सलाम है, जो करीब नौ महीनों से लगातार कोरोना को हराने में लगे हुए हैं। इसे देखते हुए अमर उजाला की अपील है कि स्वास्थ्य विभाग और जिले वासियों को इन फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मवीरों का हमेशा सम्मान करें, जो वास्तव में सराहनीय है, क्योंकि कुछ विभागीय अधिकारी और आम जनता इनके साथ अभद्र व्यवहार व बदसलूकी कर रहे हैं।
कुछ ऐसे ही चार स्वास्थ्य कर्मवीरों की कहानी आज आपके सामने हैं, जो शुरू से लेकर अब तक आमजन की सेवा में जुटे हुए हैं। इनमें से एक स्वास्थ्य कर्मवीर तो खुद ही दो बार कोरोना पॉजिटिव आ चुका है और एक स्वास्थ्य कर्मवीर के बुजुर्ग माता-पिता भी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। इसके बावजूद भी उनके हौसले बुलंद हैं और अभी भी वे फील्ड में ड्यूटी दे रहे हैं। सभी स्वास्थ्य कर्मवीर बोले कि ऐसे में बचाव बेहद आवश्यक है। यदि हम भी लापरवाही बरतने लगे तो आमजन पर इसका गलत प्रभाव पड़ सकता है।
मिलकर पाएंगे काबू
इस समय बचाव भी जरूरी है, इसलिए शुरू से लेकर अब तक मैंने काफी ध्यान रखा। यही नहीं घर पर भी मैंने खुद को बच्चों से अलग रखा है। जब मेरी टीम का एक सदस्य संक्रमित मिला तो उस समय मैं सहम गया था, मगर बाकी टीम को देखकर मैंने हौसला किया और अब तक कोरोना की जंग में डटा हुआ हूं। यह संकट की घड़ी है और इससे मिलजुलकर ही पार पाया जा सकता है।
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-डॉ. बंसीलाल बेनीवाल, दंत चिकित्सक, नागरिक अस्पताल, हिसार।
यह न सोचें कि फिर से कोरोना की चपेट में नहीं आएंगे
जब पूरी टीम साथ रहती है तो हौसला बढ़ता है और उन्हें देखकर कभी डर नहीं लगा। अभी भी मैं फील्ड में ड्यूटी दे रहा हूं। जब मैं पहली बार संक्रमित आया था तो उस समय कोई लक्षण नहीं थे, मगर दूसरी बार कोरोना पॉजिटिव मिला तो दूसरा प्रभाव काफी गहरा रहा। इससे सांस लेने, तेज बुखार और हड्डियों के जोड़ों में भी दर्द रहा, इसलिए कोई भी व्यक्ति यह न सोचे कि एक बार पॉजिटिव आने के बाद दूसरी बार कोरोना की चपेट में नहीं आ आएंगे। मैं कोरोना की चपेट आ चुका हूं, इसलिए दूसरों को बेहतर तरीके से इसके बारे में बता सकता हूं, यही सोचकर जल्दी से ठीक होकर फिर से ड्यूटी पर लौट आता हूं।
-वेदव्रत, टेक्नीशियन ऑफिसर, नागरिक अस्पताल, हिसार।
ध्यान रखने से ही बचा जा सकता है
मैं आइसोलेशन वार्ड या कोविड-19 ब्लॉक से लेकर फील्ड तक ड्यूटी दे चुका हूं। अभी भी सैंपल लेने में मेरी ड्यूटी लगी हुई है। शुरू से ही मैंने काफी एहतियात बरती है, इसलिए ध्यान रखने से ही बचाव किया जा सकता है। इस समय संक्रमण बढ़ गया है तो हमारा फर्ज भी अधिक बढ़ जाता है।
-डॉ. मनीष पचार, पैथोलॉजिस्ट, नागरिक अस्पताल, हिसार।
डॉक्टरों की भूमिका अधिक बढ़ जाती है
अपना कार्य दूसरों पर थोपने से कभी भी कार्य पूरा नहीं किया जा सकता। इसी तरह ऐसे में डॉक्टरों की भूमिका अधिक बढ़ जाती है। मैंने भी शुरू से लेकर अब तक अपनी ड्यूटी बखूबी निभाई है। बीच में मेरे बुजुर्ग माता-पिता संक्रमित आ गए थे। एक बार डर महसूस हुआ था, क्योंकि उनका काफी दिनों तक उपचार चला था, लेकिन दूसरों की सेवा के बारे में सोचकर फील्ड में डटा रहा और अभी भी मैं फील्ड में ड्यूटी दे रहा हूं।
-डॉ. पुलकित बिमल, दंत चिकित्सक, नागरिक अस्पताल, हिसार।
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कुछ ऐसे ही चार स्वास्थ्य कर्मवीरों की कहानी आज आपके सामने हैं, जो शुरू से लेकर अब तक आमजन की सेवा में जुटे हुए हैं। इनमें से एक स्वास्थ्य कर्मवीर तो खुद ही दो बार कोरोना पॉजिटिव आ चुका है और एक स्वास्थ्य कर्मवीर के बुजुर्ग माता-पिता भी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। इसके बावजूद भी उनके हौसले बुलंद हैं और अभी भी वे फील्ड में ड्यूटी दे रहे हैं। सभी स्वास्थ्य कर्मवीर बोले कि ऐसे में बचाव बेहद आवश्यक है। यदि हम भी लापरवाही बरतने लगे तो आमजन पर इसका गलत प्रभाव पड़ सकता है।
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मिलकर पाएंगे काबू
इस समय बचाव भी जरूरी है, इसलिए शुरू से लेकर अब तक मैंने काफी ध्यान रखा। यही नहीं घर पर भी मैंने खुद को बच्चों से अलग रखा है। जब मेरी टीम का एक सदस्य संक्रमित मिला तो उस समय मैं सहम गया था, मगर बाकी टीम को देखकर मैंने हौसला किया और अब तक कोरोना की जंग में डटा हुआ हूं। यह संकट की घड़ी है और इससे मिलजुलकर ही पार पाया जा सकता है।
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-डॉ. बंसीलाल बेनीवाल, दंत चिकित्सक, नागरिक अस्पताल, हिसार।
यह न सोचें कि फिर से कोरोना की चपेट में नहीं आएंगे
जब पूरी टीम साथ रहती है तो हौसला बढ़ता है और उन्हें देखकर कभी डर नहीं लगा। अभी भी मैं फील्ड में ड्यूटी दे रहा हूं। जब मैं पहली बार संक्रमित आया था तो उस समय कोई लक्षण नहीं थे, मगर दूसरी बार कोरोना पॉजिटिव मिला तो दूसरा प्रभाव काफी गहरा रहा। इससे सांस लेने, तेज बुखार और हड्डियों के जोड़ों में भी दर्द रहा, इसलिए कोई भी व्यक्ति यह न सोचे कि एक बार पॉजिटिव आने के बाद दूसरी बार कोरोना की चपेट में नहीं आ आएंगे। मैं कोरोना की चपेट आ चुका हूं, इसलिए दूसरों को बेहतर तरीके से इसके बारे में बता सकता हूं, यही सोचकर जल्दी से ठीक होकर फिर से ड्यूटी पर लौट आता हूं।
-वेदव्रत, टेक्नीशियन ऑफिसर, नागरिक अस्पताल, हिसार।
ध्यान रखने से ही बचा जा सकता है
मैं आइसोलेशन वार्ड या कोविड-19 ब्लॉक से लेकर फील्ड तक ड्यूटी दे चुका हूं। अभी भी सैंपल लेने में मेरी ड्यूटी लगी हुई है। शुरू से ही मैंने काफी एहतियात बरती है, इसलिए ध्यान रखने से ही बचाव किया जा सकता है। इस समय संक्रमण बढ़ गया है तो हमारा फर्ज भी अधिक बढ़ जाता है।
-डॉ. मनीष पचार, पैथोलॉजिस्ट, नागरिक अस्पताल, हिसार।
डॉक्टरों की भूमिका अधिक बढ़ जाती है
अपना कार्य दूसरों पर थोपने से कभी भी कार्य पूरा नहीं किया जा सकता। इसी तरह ऐसे में डॉक्टरों की भूमिका अधिक बढ़ जाती है। मैंने भी शुरू से लेकर अब तक अपनी ड्यूटी बखूबी निभाई है। बीच में मेरे बुजुर्ग माता-पिता संक्रमित आ गए थे। एक बार डर महसूस हुआ था, क्योंकि उनका काफी दिनों तक उपचार चला था, लेकिन दूसरों की सेवा के बारे में सोचकर फील्ड में डटा रहा और अभी भी मैं फील्ड में ड्यूटी दे रहा हूं।
-डॉ. पुलकित बिमल, दंत चिकित्सक, नागरिक अस्पताल, हिसार।

डॉ. बंसीलाल बेनिवाल। - फोटो : Hisar

डॉ. पुलकित।- फोटो : Hisar

डॉ. मनीष पचार। - फोटो : Hisar