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रिश्वत के आरोपी डीसीओ चौधरी के खिलाफ चार्जशीट फ्रेम, निलंबन बाकी
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हिसार। हॉलसेल मेडिकल हॉल का लाइसेंस जारी करने के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोपी हिसार के तत्कालीन दवा नियंत्रक अधिकारी (डीसीओ) सुरेश चौधरी के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मिल गई है। राज्य चौकसी ब्यूरो ने शनिवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार मित्तल की अदालत में चालान पेश किया। अदालत में बहस के बाद सुरेश चौधरी के खिलाफ चार्ज फ्रेम कर दिया। अब मामले में 17 अक्तूबर से गवाहियां दर्ज होंगी।
चालान पेश करने के बाद मामले की सुनवाई के दौरान सुरेश चौधरी के अधिवक्ता ने कहा कि मात्र सह अभियुक्तों के कथन के आधार पर उनके मुवक्किल को गलत तरीके से केस में फंसाया गया है जबकि प्रथम दृष्टया कोई केस नहीं बनता। वहीं, अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि सह अभियुक्त रामपाल व सुमित के कथन के अलावा शिकायतकर्ता रामबिलास के आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत दर्ज करवाए गए बयान, सुरेश चौधरी के खिलाफ पूरा मामला बनाते हैं। इससे पूर्व राज्य चौकसी ब्यूरो ने मामले के दो आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान प्रस्तुत कर दिया था।
अग्रिम जमानत याचिका हो चुकी खारिज
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार सिंगल की अदालत ने 14 अक्तूबर 2021 को सुरेश चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने सुरेश चौधरी को निलंबित कर विभागीय नियम 7 के तहत चार्जशीट कर दिया था। इसके तहत सुरेश चौधरी नौकरी से भी बर्खास्त भी हो सकता है। हालांकि चार्ज फ्रेम न होने के कारण सुरेश चौधरी को बहाल कर दिया गया था।
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ढाई माह पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा आरोपी
मामले में घटना वाले दिन ही फरार होने के बाद डीसीओ सुरेश चौधरी करीब ढाई माह तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा और फिर हाईकोर्ट से उसको अग्रिम जमानत मिल गई। इस सुनवाई के दौरान राज्य की तरफ से हाईकोर्ट में पेश हुई एएजी डिंपल जैन ने अग्रिम जमानत याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने अंतरिम उपाय के तौर पर आरोपी डीसीओ को एक सप्ताह के अंदर जांच में शामिल होकर वॉइस सैंपल देने के लिए कहा था, जिसके बाद विजिलेंस टीम ने आरोपी के वॉइस सैंपल लिए और जमानत पर रिहा कर दिया।
अब फिर होगा निलंबित
विभागीय उच्चाधिकारियों ने बताया कि सुरेश चौधरी को निलंबन के बाद इसलिए बहाल किया गया था कि उसके खिलाफ तय समयावधि में चालान प्रस्तुत नहीं किए गए। अब चालान प्रस्तुत होने के बाद चार्ज फ्रेम हो गए हैं। नियमानुसार अब सुरेश चौधरी को दोबारा निलंबित किया जाएगा।
गौरतलब है कि राज्य चौकसी ब्यूरो के इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने 6 अगस्त 2021 को रामायण गांव निवासी रामबिलास की शिकायत पर डीसीओ सुरेश चौधरी, सिवानी निवासी चपरासी रामपाल व दादरी के जगराम बास निवासी चालक सुमित के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। घटना वाले दिन शाम को सुरेश चौधरी की निजी कार के चालक व एक चपरासी को टीम ने आधार अस्पताल के समीप से गिरफ्तार किया था जबकि वह स्वयं फरार हो गया था। पुलिस ने दोनों के कब्जे से 40 हजार रुपये की नकदी बरामद की थी।
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चालान पेश करने के बाद मामले की सुनवाई के दौरान सुरेश चौधरी के अधिवक्ता ने कहा कि मात्र सह अभियुक्तों के कथन के आधार पर उनके मुवक्किल को गलत तरीके से केस में फंसाया गया है जबकि प्रथम दृष्टया कोई केस नहीं बनता। वहीं, अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि सह अभियुक्त रामपाल व सुमित के कथन के अलावा शिकायतकर्ता रामबिलास के आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत दर्ज करवाए गए बयान, सुरेश चौधरी के खिलाफ पूरा मामला बनाते हैं। इससे पूर्व राज्य चौकसी ब्यूरो ने मामले के दो आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान प्रस्तुत कर दिया था।
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अग्रिम जमानत याचिका हो चुकी खारिज
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार सिंगल की अदालत ने 14 अक्तूबर 2021 को सुरेश चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने सुरेश चौधरी को निलंबित कर विभागीय नियम 7 के तहत चार्जशीट कर दिया था। इसके तहत सुरेश चौधरी नौकरी से भी बर्खास्त भी हो सकता है। हालांकि चार्ज फ्रेम न होने के कारण सुरेश चौधरी को बहाल कर दिया गया था।
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ढाई माह पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा आरोपी
मामले में घटना वाले दिन ही फरार होने के बाद डीसीओ सुरेश चौधरी करीब ढाई माह तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा और फिर हाईकोर्ट से उसको अग्रिम जमानत मिल गई। इस सुनवाई के दौरान राज्य की तरफ से हाईकोर्ट में पेश हुई एएजी डिंपल जैन ने अग्रिम जमानत याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने अंतरिम उपाय के तौर पर आरोपी डीसीओ को एक सप्ताह के अंदर जांच में शामिल होकर वॉइस सैंपल देने के लिए कहा था, जिसके बाद विजिलेंस टीम ने आरोपी के वॉइस सैंपल लिए और जमानत पर रिहा कर दिया।
अब फिर होगा निलंबित
विभागीय उच्चाधिकारियों ने बताया कि सुरेश चौधरी को निलंबन के बाद इसलिए बहाल किया गया था कि उसके खिलाफ तय समयावधि में चालान प्रस्तुत नहीं किए गए। अब चालान प्रस्तुत होने के बाद चार्ज फ्रेम हो गए हैं। नियमानुसार अब सुरेश चौधरी को दोबारा निलंबित किया जाएगा।
गौरतलब है कि राज्य चौकसी ब्यूरो के इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने 6 अगस्त 2021 को रामायण गांव निवासी रामबिलास की शिकायत पर डीसीओ सुरेश चौधरी, सिवानी निवासी चपरासी रामपाल व दादरी के जगराम बास निवासी चालक सुमित के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। घटना वाले दिन शाम को सुरेश चौधरी की निजी कार के चालक व एक चपरासी को टीम ने आधार अस्पताल के समीप से गिरफ्तार किया था जबकि वह स्वयं फरार हो गया था। पुलिस ने दोनों के कब्जे से 40 हजार रुपये की नकदी बरामद की थी।