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उधार की इमारत और बिना हवालात के चल रहे थाने
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हिसार। पटवार भवन की बिल्डिंग में चल रहा आजाद नगर थाना। संवाद
- फोटो : Hisar
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हिसार। जिला पुलिस को स्मार्ट बनाने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन, जिले के कई थानों और चौकियों के हालत ऐसे हैं कि वहां काम करने वाले पुलिस कर्मचारी अपने आप को महफूज नहीं समझ रहे। कई थाने-चौकियों की इमारतें जर्जर हैं।
विडंबना ये है कि आजाद नगर पुलिस थाना तो उधार की इमारत में चल रहा है। दो थानों में हवालात तक नहीं है। पोक्सो एक्ट में कार्रवाई करने के लिए दूसरे थानों से जांच अधिकारी बुलाए जाते हैं। हिसार शहर में 11 थाने हैं। इसमें से आजाद नगर थाने और सदर थाने के अंतर्गत करीब 86 गांव आते हैं। इन गांवों में गश्त के लिए दोनों थानों व इनके अंडर आने वाली चौकियों में सिर्फ आठ वाहन हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों की सुरक्षा राम भरोसे है। पुलिस कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण जांच अधिकारियों पर बोझ बढ़ता जा रहा है। तनाव में पुलिस कर्मचारी काम कर रहे है। सप्ताह में पुलिस कर्मचारियों के लिए एक दिन का अवकाश कागजों में ही है लेकिन, धरातल पर सातों दिन काम किया जा रहा है। आंदोलन और वीआईपी ड्यूटी में पूरा दिन रात सड़कों पर तैनात रहते हैं। जिले की अनुमानित जनसंख्या करीब 19 लाख 88 हजार है। वहीं, सुरक्षा में करीब 2 हजार पुलिसकर्मचारी तैनात किए गए हैं। एसपी लोकेंद्र सिंह का दावा है कि विभिन्न बाधाओं के बावजूद पुलिस सम्मान के साथ सेवा कर रही है। जिले की पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर प्रस्तुत है संवाददाता सुरेश सहारण की विशेष रिपोर्ट...
आजाद नगर थाना : 33 गांव की रखवाली के लिए सिर्फ तीन वाहन
आजाद नगर पुलिस थाना के हालत सही नहीं है। उधार की इमारत में थाना चल रहा है। यह इमारत काफी जर्जर हो चुकी है। बारिश के मौसम में मालखाना में पानी भर जाता है। शौचालय के हालात भी सहीं नहीं है। हैरान कर देने वाली बात ये है कि थाना में हवालात तक नहीं है। ऐसे में पकड़े गए आरोपियों को सदर थाना की हवालात में बंद किया जाता है। अगले दिन अदालत में पेश करने के लिए सदर थाना से आरोपी को लेकर आना पड़ता है। अगर, कोई महिला आरोपी है तो उसे महिला थाना ले जाया जाता है।
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हैरान कर देने वाली बात यह है कि आजाद नगर पुलिस थाना का क्षेत्रफल अधिक होने के बावजूद यहां पर मात्र तीन वाहन है। एक पीसीआर, एक राइडर और एक बोलेरो गाड़ी है। वाहन कम होने के कारण कई बार पुलिस कर्मचारियों को वाहन का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में जांच अधिकारी घटना स्थल पर समय पर नहीं पहुंच पाता और बाद में आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हो जाता है। आजाद नगर पुलिस थाना के कर्मचारियों की बात करें तो यहां पर एक इंस्पेक्टर, तीन एसआई, छह एएसआई, आठ हेड कांस्टेबल, दस सिपाही, 15 एसपीओ और आठ होमगार्ड के जवान हैं। इस थाना के अंतर्गत मंगाली पुलिस चौकी भी आती है।
सदर थाना : शहर का सबसे बड़े थाने पर पोक्सो एक्ट का आईओ तक नहीं
शहर के सबसे बड़ा थाना सदर है। सदर थाना के अंतर्गत 53 गांव आते हैं। सदर थाना का क्षेत्रफल काफी बड़ा है। थाने का दायरा 30 से 35 किलोमीटर का है। बड़ा थाना होने के बाद भी यहां पर पुलिस कर्मचारियों की टोटा है। आईओ कम है, ऐसे में एक आईओ पर करीब पांच से छह गांव आते हैं। पुलिस कर्मी कम होने के कारण आईओ पर अतिरिक्त भार है। ऐसे में जांच अधिकारी तनाव में रहते हैं। हैैैरान करने वाली बात ये है कि पोक्सो एक्ट के मामलों की जांच करने वाली कोई महिला जांच अधिकारी नहीं हैं। ऐसे में दूसरे थानों से जांच अधिकारी को बुलाया जाता है। वह अधिकारी जांच करती है। इस थाने और इससे संबंधित पुलिस चौकी में वाहनों की बात करें तो यहां पर चार ही वाहन हैं। कर्मचारियों की बात करें तो थाने में एक इंस्पेक्टर, तीन एसआई, दस एएसआई, 15 हेड कांस्टेबल, 19 ओआरजे (जरनल ड्यूटी) है। इन कर्मचारियों की तादात देखकर आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि इस तनाव के बीच नौकरी कर रहे हैं। इस थाने में बालसमंद पुलिस चौकी आती है और 53 में से 16 गांव इस चौकी के अंतर्गत आते हैं। पुलिस चौकी में मात्र एक वाहन है।
एचटीएम थाना : पांच कमरे, हवालात की नहीं व्यवस्था
पुलिस विभाग द्वारा शहर में थानों का विस्तार करते हुए तीन नए थाने बनाए गए थे। इनमें से एक एचटीएम थाना था। यह थाना मिलगेट एरिया में पड़ता है। यह थाना पांच कमरों में चल रहा है। इस थाने में आरोपियों को रखने के लिए हवालात की व्यवस्था नहीं है। आरोपियों को शहर थाना की हवालात में रखा जाता है। यहां पर पोक्सो एक्ट मामलों के लिए एसआई महिला कर्मचारी है उसके बावजूद पोक्सो एक्ट के मामलों में महिला थाना की इंस्पेक्टर सरोज को जांच के लिए बुलाया जाता है। इस थाने का पुराना रिकॉर्ड शहर थाने के अंदर रखा हुआ है। इस थाने में सात वाहन हैं। कर्मचारियों की बात करें तो एक इंस्पेक्टर, चार एसआई, सात एएसआई, छह एचसी, छह, ईएचसी, दो ईएसआई, 17 एसपीओ हैं।
हिसार शहर में आने वाले थाने
- आजाद नगर
- सदर थाना
- एचटीएम थाना
- अर्बन एस्टेट थाना
- सिविल लाइन थाना
- शहर थाना
-महिला थाना
- साइबर थाना
- सीआईए थाना
- एसटीएफ थाना
बारिश में थाने-चौकियों में घुस जाता है पानी
बरसात के मौसम में एचटीएम थाना के अंतगर्त आने वाली डोगराना मोहल्ला पुलिस चौकी में पानी भर जाता है। ऐसे में यहां पर काम करने वाले पुलिस कर्मचारियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। कई दिनों तक यहां पर पानी खड़ा रहता है। पंप लगाने के बाद यहां से पानी लगाना पड़ता है। बरसात के मौसम में यहां पर शिकायत लेकर आने वाले लोगों को भी काफी दिक्कतें आती है। कई बार पुलिस के ऑला अधिकारियों के इस बारे में अवगत करवाया जा चुका है लेकिन, उसके बाद भी हालात पहले जैसे ही है।
तनाव के कारण कर्मचारियों का बदल रहा व्यवहार
जिले में पुलिस कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण पुलिस पर काम का अतिरिक्त दबाव भी रहता है। थानों में जांच अधिकारी कम होने और ज्यादा काम होने की वजह से तनाव में रहते हैं। इसके अलावा शहर में धरना, प्रदर्शन, आंदोलन और वीआईपी गतिविधि होने से पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटियां वहां लगा दी जाती है। पूरा दिन सड़कों पर खड़े रहते हैं। ऐसे मे लगातार काम करने के कारण पुलिस कर्मचारियों के व्यवहार में भी बदलाव आ रहा है।
लगातार कर रहे ड्यूटी, नहीं मिल रहे अवकाश
लगातार काम करने के बाद तनाव में आ रहे कर्मचारियों को देखते हुए सप्ताह में एक दिन अवकाश करने की घोषणा की गई थी। ये घोषणा शायद अभी तक कागजों के अंदर ही है। धरातल पर ऐसा नहीं है। पुलिस कर्मी 24 घंटे काम कर रहे है। सूत्रों की मानें तो कोई साप्ताहिक अवकाश नहीं दिया जा रहा। लगातार ड्यूटी ली जा रही है। लगातार काम करने से पुलिस कर्मचारी तनाव में आ रहे है। जरूरी काम होने पर भी अवकाश नहीं मिल रहा है।
बिल्डिंग बनाने के लिए पत्राचार जारी है
आजाद नगर पुलिस थाना की नई बिल्डिंग बनाने के लिए पत्राचार जारी है। पुलिस के पास वाहनों की कोई कमी नहीं है जितने की जरूरत है उतने वाहन है। कर्मचारियों और उनके परिजनों के लिए स्वास्थ्य कैंप लगाए जाते है। साबइर पुलिस थाना है और साइबर से जुड़े मामले सुलझाने के लिए आधुनिक तकनीक है। - लोकेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक, हिसार
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विडंबना ये है कि आजाद नगर पुलिस थाना तो उधार की इमारत में चल रहा है। दो थानों में हवालात तक नहीं है। पोक्सो एक्ट में कार्रवाई करने के लिए दूसरे थानों से जांच अधिकारी बुलाए जाते हैं। हिसार शहर में 11 थाने हैं। इसमें से आजाद नगर थाने और सदर थाने के अंतर्गत करीब 86 गांव आते हैं। इन गांवों में गश्त के लिए दोनों थानों व इनके अंडर आने वाली चौकियों में सिर्फ आठ वाहन हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों की सुरक्षा राम भरोसे है। पुलिस कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण जांच अधिकारियों पर बोझ बढ़ता जा रहा है। तनाव में पुलिस कर्मचारी काम कर रहे है। सप्ताह में पुलिस कर्मचारियों के लिए एक दिन का अवकाश कागजों में ही है लेकिन, धरातल पर सातों दिन काम किया जा रहा है। आंदोलन और वीआईपी ड्यूटी में पूरा दिन रात सड़कों पर तैनात रहते हैं। जिले की अनुमानित जनसंख्या करीब 19 लाख 88 हजार है। वहीं, सुरक्षा में करीब 2 हजार पुलिसकर्मचारी तैनात किए गए हैं। एसपी लोकेंद्र सिंह का दावा है कि विभिन्न बाधाओं के बावजूद पुलिस सम्मान के साथ सेवा कर रही है। जिले की पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर प्रस्तुत है संवाददाता सुरेश सहारण की विशेष रिपोर्ट...
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आजाद नगर थाना : 33 गांव की रखवाली के लिए सिर्फ तीन वाहन
आजाद नगर पुलिस थाना के हालत सही नहीं है। उधार की इमारत में थाना चल रहा है। यह इमारत काफी जर्जर हो चुकी है। बारिश के मौसम में मालखाना में पानी भर जाता है। शौचालय के हालात भी सहीं नहीं है। हैरान कर देने वाली बात ये है कि थाना में हवालात तक नहीं है। ऐसे में पकड़े गए आरोपियों को सदर थाना की हवालात में बंद किया जाता है। अगले दिन अदालत में पेश करने के लिए सदर थाना से आरोपी को लेकर आना पड़ता है। अगर, कोई महिला आरोपी है तो उसे महिला थाना ले जाया जाता है।
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हैरान कर देने वाली बात यह है कि आजाद नगर पुलिस थाना का क्षेत्रफल अधिक होने के बावजूद यहां पर मात्र तीन वाहन है। एक पीसीआर, एक राइडर और एक बोलेरो गाड़ी है। वाहन कम होने के कारण कई बार पुलिस कर्मचारियों को वाहन का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में जांच अधिकारी घटना स्थल पर समय पर नहीं पहुंच पाता और बाद में आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हो जाता है। आजाद नगर पुलिस थाना के कर्मचारियों की बात करें तो यहां पर एक इंस्पेक्टर, तीन एसआई, छह एएसआई, आठ हेड कांस्टेबल, दस सिपाही, 15 एसपीओ और आठ होमगार्ड के जवान हैं। इस थाना के अंतर्गत मंगाली पुलिस चौकी भी आती है।
सदर थाना : शहर का सबसे बड़े थाने पर पोक्सो एक्ट का आईओ तक नहीं
शहर के सबसे बड़ा थाना सदर है। सदर थाना के अंतर्गत 53 गांव आते हैं। सदर थाना का क्षेत्रफल काफी बड़ा है। थाने का दायरा 30 से 35 किलोमीटर का है। बड़ा थाना होने के बाद भी यहां पर पुलिस कर्मचारियों की टोटा है। आईओ कम है, ऐसे में एक आईओ पर करीब पांच से छह गांव आते हैं। पुलिस कर्मी कम होने के कारण आईओ पर अतिरिक्त भार है। ऐसे में जांच अधिकारी तनाव में रहते हैं। हैैैरान करने वाली बात ये है कि पोक्सो एक्ट के मामलों की जांच करने वाली कोई महिला जांच अधिकारी नहीं हैं। ऐसे में दूसरे थानों से जांच अधिकारी को बुलाया जाता है। वह अधिकारी जांच करती है। इस थाने और इससे संबंधित पुलिस चौकी में वाहनों की बात करें तो यहां पर चार ही वाहन हैं। कर्मचारियों की बात करें तो थाने में एक इंस्पेक्टर, तीन एसआई, दस एएसआई, 15 हेड कांस्टेबल, 19 ओआरजे (जरनल ड्यूटी) है। इन कर्मचारियों की तादात देखकर आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि इस तनाव के बीच नौकरी कर रहे हैं। इस थाने में बालसमंद पुलिस चौकी आती है और 53 में से 16 गांव इस चौकी के अंतर्गत आते हैं। पुलिस चौकी में मात्र एक वाहन है।
एचटीएम थाना : पांच कमरे, हवालात की नहीं व्यवस्था
पुलिस विभाग द्वारा शहर में थानों का विस्तार करते हुए तीन नए थाने बनाए गए थे। इनमें से एक एचटीएम थाना था। यह थाना मिलगेट एरिया में पड़ता है। यह थाना पांच कमरों में चल रहा है। इस थाने में आरोपियों को रखने के लिए हवालात की व्यवस्था नहीं है। आरोपियों को शहर थाना की हवालात में रखा जाता है। यहां पर पोक्सो एक्ट मामलों के लिए एसआई महिला कर्मचारी है उसके बावजूद पोक्सो एक्ट के मामलों में महिला थाना की इंस्पेक्टर सरोज को जांच के लिए बुलाया जाता है। इस थाने का पुराना रिकॉर्ड शहर थाने के अंदर रखा हुआ है। इस थाने में सात वाहन हैं। कर्मचारियों की बात करें तो एक इंस्पेक्टर, चार एसआई, सात एएसआई, छह एचसी, छह, ईएचसी, दो ईएसआई, 17 एसपीओ हैं।
हिसार शहर में आने वाले थाने
- आजाद नगर
- सदर थाना
- एचटीएम थाना
- अर्बन एस्टेट थाना
- सिविल लाइन थाना
- शहर थाना
-महिला थाना
- साइबर थाना
- सीआईए थाना
- एसटीएफ थाना
बारिश में थाने-चौकियों में घुस जाता है पानी
बरसात के मौसम में एचटीएम थाना के अंतगर्त आने वाली डोगराना मोहल्ला पुलिस चौकी में पानी भर जाता है। ऐसे में यहां पर काम करने वाले पुलिस कर्मचारियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। कई दिनों तक यहां पर पानी खड़ा रहता है। पंप लगाने के बाद यहां से पानी लगाना पड़ता है। बरसात के मौसम में यहां पर शिकायत लेकर आने वाले लोगों को भी काफी दिक्कतें आती है। कई बार पुलिस के ऑला अधिकारियों के इस बारे में अवगत करवाया जा चुका है लेकिन, उसके बाद भी हालात पहले जैसे ही है।
तनाव के कारण कर्मचारियों का बदल रहा व्यवहार
जिले में पुलिस कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण पुलिस पर काम का अतिरिक्त दबाव भी रहता है। थानों में जांच अधिकारी कम होने और ज्यादा काम होने की वजह से तनाव में रहते हैं। इसके अलावा शहर में धरना, प्रदर्शन, आंदोलन और वीआईपी गतिविधि होने से पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटियां वहां लगा दी जाती है। पूरा दिन सड़कों पर खड़े रहते हैं। ऐसे मे लगातार काम करने के कारण पुलिस कर्मचारियों के व्यवहार में भी बदलाव आ रहा है।
लगातार कर रहे ड्यूटी, नहीं मिल रहे अवकाश
लगातार काम करने के बाद तनाव में आ रहे कर्मचारियों को देखते हुए सप्ताह में एक दिन अवकाश करने की घोषणा की गई थी। ये घोषणा शायद अभी तक कागजों के अंदर ही है। धरातल पर ऐसा नहीं है। पुलिस कर्मी 24 घंटे काम कर रहे है। सूत्रों की मानें तो कोई साप्ताहिक अवकाश नहीं दिया जा रहा। लगातार ड्यूटी ली जा रही है। लगातार काम करने से पुलिस कर्मचारी तनाव में आ रहे है। जरूरी काम होने पर भी अवकाश नहीं मिल रहा है।
बिल्डिंग बनाने के लिए पत्राचार जारी है
आजाद नगर पुलिस थाना की नई बिल्डिंग बनाने के लिए पत्राचार जारी है। पुलिस के पास वाहनों की कोई कमी नहीं है जितने की जरूरत है उतने वाहन है। कर्मचारियों और उनके परिजनों के लिए स्वास्थ्य कैंप लगाए जाते है। साबइर पुलिस थाना है और साइबर से जुड़े मामले सुलझाने के लिए आधुनिक तकनीक है। - लोकेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक, हिसार