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छह गुना मुनाफा के लिए बुक डिपो संचालक नहीं बेच रहे एनसीईआरटी की किताबें
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एनसीईआरटी की दूसरी कक्षा की किताब। संवाद
- फोटो : Hisar
हिसार। छह गुना मुनाफा कमाने के लिए बुक डिपो संचालक एनसीईआरटी की किताबें नहीं बेच रहे हैं। जिस कारण पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। तीनों कक्षाओं की एनसीईआरटी किताबों के दाम 60 से 150 रुपये के बीच है। जबकि अगर निजी प्रकाशक की किताबें बेचे तो बुक डिपो संचालक को छह गुना मुनाफा होता है। किसी भी विषय की एनसीईआरटी की किताब का रेट 60 रुपये है तो निजी प्रकाशक की इसी विषय की किताब 350 रुपये में मिलती है।
13 दिसंबर से शुरू होनी सेट नंबर 3 की परीक्षाएं
मार्केट में किताबें न मिलने से विद्यार्थी परेशान है, जबकि शिक्षा निदेशालय की ओर से 1 दिसंबर को होने वाली सेट नंबर 3 परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया है। इससे किताबें न होने के कारण विद्यार्थी असमंजस में फंस चुके हैं। इस स्थिति से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विद्यार्थियों ने बिना किताबें किस प्रकार से अपने पाठ्यक्रमों को पूरा किया है।
कुछ विद्यार्थियों को पुरानी किताबें तक नहीं हुई नसीब
बीते माह शिक्षा निदेशालय के आदेश पर सभी सरकारी स्कूलों में पुरानी किताबें बांटने की मुहिम चलाई थी। जिसमें संबंधित स्कूल प्राचार्य व शिक्षकों को पुरानी कक्षा की किताबें लेकर दाखिला लेने वाले नए विद्यार्थियों को पुस्तकें उपलब्ध करवानी थी, लेकिन अधिकांश विद्यार्थियों को पुरानी किताबें नसीब नहीं हो पाई, जिससे आने वाले परीक्षा के समय विद्यार्थियों के लिए परेशानी खड़ी हो चुकी है।
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जिले के 73093 विद्यार्थियों के खाते में पहुंची किताबों की राशि
जिले में पहली से 8वीं कक्षा के सरकारी स्कूलों में कुल 112653 विद्यार्थी पढ़ते हैं। जिनमें से अभी तक 73093 विद्यार्थियों के खातों में ही किताबो की राशि पहुंची है। जबकि अभी भी 39560 विद्यार्थियों के खातों में किताबों की राशि आनी बाकि है। बता दें कि पहली से 5वीं कक्षा के विद्यार्थी को 250 रुपये और 6 से 8वीं कक्षा के विद्यार्थी को 400 रुपये किताबों की राशि भेजी जाएगी।
मार्केट में पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा की किताबें नहीं है। आनन-फानन में शिक्षा निदेशालय ने किताबों की राशि खातों में डालने की योजना बनाई है। जाकि गलत है। शिक्षा निदेशालय को इस पर संज्ञान लेने की जरूरत है। - सुनील बास, जिला महासचिव, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
250 रुपये और 400 रुपये की राशि विभाग ने इसलिए जारी की है कि जिन विद्यार्थियों के पास किताबें नहीं है तो वे साइट पर जाकर संबंधित विषय के पाठ्यक्रम को प्रिंट के तौर पर निकाल सकता है। इसलिए प्रिंट पर खर्च होने वाली राशि के लिए विभाग ने पहली से 5वीं कक्षा के विद्यार्थी को 250 रुपये और 6 से 8वीं कक्षा के विद्यार्थी को 400 रुपये खातों में डालने की योजना बनाई थी। - धनपत राम, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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13 दिसंबर से शुरू होनी सेट नंबर 3 की परीक्षाएं
मार्केट में किताबें न मिलने से विद्यार्थी परेशान है, जबकि शिक्षा निदेशालय की ओर से 1 दिसंबर को होने वाली सेट नंबर 3 परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया है। इससे किताबें न होने के कारण विद्यार्थी असमंजस में फंस चुके हैं। इस स्थिति से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विद्यार्थियों ने बिना किताबें किस प्रकार से अपने पाठ्यक्रमों को पूरा किया है।
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कुछ विद्यार्थियों को पुरानी किताबें तक नहीं हुई नसीब
बीते माह शिक्षा निदेशालय के आदेश पर सभी सरकारी स्कूलों में पुरानी किताबें बांटने की मुहिम चलाई थी। जिसमें संबंधित स्कूल प्राचार्य व शिक्षकों को पुरानी कक्षा की किताबें लेकर दाखिला लेने वाले नए विद्यार्थियों को पुस्तकें उपलब्ध करवानी थी, लेकिन अधिकांश विद्यार्थियों को पुरानी किताबें नसीब नहीं हो पाई, जिससे आने वाले परीक्षा के समय विद्यार्थियों के लिए परेशानी खड़ी हो चुकी है।
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जिले के 73093 विद्यार्थियों के खाते में पहुंची किताबों की राशि
जिले में पहली से 8वीं कक्षा के सरकारी स्कूलों में कुल 112653 विद्यार्थी पढ़ते हैं। जिनमें से अभी तक 73093 विद्यार्थियों के खातों में ही किताबो की राशि पहुंची है। जबकि अभी भी 39560 विद्यार्थियों के खातों में किताबों की राशि आनी बाकि है। बता दें कि पहली से 5वीं कक्षा के विद्यार्थी को 250 रुपये और 6 से 8वीं कक्षा के विद्यार्थी को 400 रुपये किताबों की राशि भेजी जाएगी।
मार्केट में पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा की किताबें नहीं है। आनन-फानन में शिक्षा निदेशालय ने किताबों की राशि खातों में डालने की योजना बनाई है। जाकि गलत है। शिक्षा निदेशालय को इस पर संज्ञान लेने की जरूरत है। - सुनील बास, जिला महासचिव, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
250 रुपये और 400 रुपये की राशि विभाग ने इसलिए जारी की है कि जिन विद्यार्थियों के पास किताबें नहीं है तो वे साइट पर जाकर संबंधित विषय के पाठ्यक्रम को प्रिंट के तौर पर निकाल सकता है। इसलिए प्रिंट पर खर्च होने वाली राशि के लिए विभाग ने पहली से 5वीं कक्षा के विद्यार्थी को 250 रुपये और 6 से 8वीं कक्षा के विद्यार्थी को 400 रुपये खातों में डालने की योजना बनाई थी। - धनपत राम, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी