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26 दिन बाद ब्लैक फंगस से एक की मौत
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हिसार। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में 26 दिन बाद ब्लैक फंगस से एक मरीज की मौत हो गई। कई दिनों बाद एक मरीज की मौत हुई है, जो चिंताजनक विषय है। चिकित्सकों के मुताबिक 52 वर्षीय मृतक महिला में फंगस चौथी स्टेज में पहुंच चुका था। इस वजह से उसकी शनिवार को मौत हो गई। इसे मिलाकर ब्लैक फंगस से होने वाली मौत का आंकड़ा 107 हो गया है। हालांकि इन दिनों फंगस के नए मरीज आना बंद हो गए हैं। वहीं, अब तक 410 मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं।
इस समय मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के 10 मरीज दाखिल हैं। चिकित्सकों के अनुसार चार मरीजों की हालत गंभीर है, क्योंकि इनमें फंगस फेफड़ों तक जा पहुंचा है। इसके अलावा चार मरीजों में फंगस नाक व जबड़े में फैला है। इनकी हालत भी नाजुक है। इनके ऑपरेशन होना भी नहीं हो पा रहे हैं। इससे पहले पिछले सप्ताह तक अस्पताल में 15 मरीज दाखिल थे। एक मरीज की मौत हो गई और चार मरीजों को छुट्टी देकर घर भेज दिया गया।
ओरल सर्जन दे रहीं सेवाएं
अब मेडिकल कॉलेज में वॉलंटियर के तौर पर केवल ओरल सर्जन हैं और वहीं अपनी निशुल्क सेवाएं दे रही हैं। वहीं मरीजों के जबड़े के ऑपरेशन करती है। इस माह ओरल सर्जन डॉ. बंसीलाल बेनिवाल का जिला अस्पताल में तबादला हो गया। सीएमओ ने डॉ. बंसीलाल की ड्यूटी दो माह के डेपुटेशन पर मेडिकल कॉलेज में लगाई थी। उन्होंने करीब 50 मरीजों के ऑपरेशन किए।
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अंग खो जाने से मरीज परेशान
इधर अस्पताल में वे मरीज भी आ रहे हैं, जो इलाज लेकर फंगस से निजात पाने के बाद घर जा चुके हैं, क्योंकि इन मरीजों का 6 माह से 1 साल तक इलाज चलना जरूरी है। काउंसिलिंग के दौरान कई मरीजों की पीड़ा सामने आती है। मरीज अपने उन अंगों को सर्जरी आदि से ठीक करवाने की बात चिकित्सक के सामने रखते हैं, जो अंग उन्होंने फंगस से खोए हैं। आंख, नाक व जबड़े के अंग खो जाने के बाद मरीजों का चेहरा भी बदल गया है।
महिला की हालत गंभीर थी
इस समय हमारे पास ब्लैक फंगस के 10 मरीज दाखिल हैं। 4 मरीजों में फंगस फेफड़ों में फैला है। इनकी हालत नाजुक है। एक मरीज को छुट्टी देकर घर भेजा है और एक मरीज की मौत हो गई। 52 वर्षीय महिला की हालत गंभीर थी, जिससे उसकी मौत हो गई।
- डॉ. अनूप ग्रोवर, प्रोफसर, दंत विभाग, मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा।
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इस समय मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के 10 मरीज दाखिल हैं। चिकित्सकों के अनुसार चार मरीजों की हालत गंभीर है, क्योंकि इनमें फंगस फेफड़ों तक जा पहुंचा है। इसके अलावा चार मरीजों में फंगस नाक व जबड़े में फैला है। इनकी हालत भी नाजुक है। इनके ऑपरेशन होना भी नहीं हो पा रहे हैं। इससे पहले पिछले सप्ताह तक अस्पताल में 15 मरीज दाखिल थे। एक मरीज की मौत हो गई और चार मरीजों को छुट्टी देकर घर भेज दिया गया।
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ओरल सर्जन दे रहीं सेवाएं
अब मेडिकल कॉलेज में वॉलंटियर के तौर पर केवल ओरल सर्जन हैं और वहीं अपनी निशुल्क सेवाएं दे रही हैं। वहीं मरीजों के जबड़े के ऑपरेशन करती है। इस माह ओरल सर्जन डॉ. बंसीलाल बेनिवाल का जिला अस्पताल में तबादला हो गया। सीएमओ ने डॉ. बंसीलाल की ड्यूटी दो माह के डेपुटेशन पर मेडिकल कॉलेज में लगाई थी। उन्होंने करीब 50 मरीजों के ऑपरेशन किए।
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अंग खो जाने से मरीज परेशान
इधर अस्पताल में वे मरीज भी आ रहे हैं, जो इलाज लेकर फंगस से निजात पाने के बाद घर जा चुके हैं, क्योंकि इन मरीजों का 6 माह से 1 साल तक इलाज चलना जरूरी है। काउंसिलिंग के दौरान कई मरीजों की पीड़ा सामने आती है। मरीज अपने उन अंगों को सर्जरी आदि से ठीक करवाने की बात चिकित्सक के सामने रखते हैं, जो अंग उन्होंने फंगस से खोए हैं। आंख, नाक व जबड़े के अंग खो जाने के बाद मरीजों का चेहरा भी बदल गया है।
महिला की हालत गंभीर थी
इस समय हमारे पास ब्लैक फंगस के 10 मरीज दाखिल हैं। 4 मरीजों में फंगस फेफड़ों में फैला है। इनकी हालत नाजुक है। एक मरीज को छुट्टी देकर घर भेजा है और एक मरीज की मौत हो गई। 52 वर्षीय महिला की हालत गंभीर थी, जिससे उसकी मौत हो गई।
- डॉ. अनूप ग्रोवर, प्रोफसर, दंत विभाग, मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा।