{"_id":"60f47a468ebc3e73577139d7","slug":"ayurvedic-hospital-deadline-extended-by-four-months-hisar-news-hsr6064534162","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार महीने बढ़ी आयुर्वेदिक अस्पताल की डेडलाइन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार महीने बढ़ी आयुर्वेदिक अस्पताल की डेडलाइन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिसार। मय्यड़ गांव के पास निर्माणाधीन आयुर्वेदिक अस्पताल इस साल के आखिर तक बनकर तैयार होगा। इससे पहले इसे अगस्त तक तैयार किया जाना प्रस्तावित था, मगर कोरोना व लॉकडाउन लगने से निर्माण अवधि चार माह और बढ़ा दी है। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल का 8.72 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण किया जा रहा है।
बता दें कि वर्ष 2017 में आयुर्वेदिक अस्पताल बनाने की घोषणा हुई थी। अस्पताल के निर्माण के लिए मय्यड़ की पंचायत से 33 साल के लिए 16 एकड़ जमीन लीज पर ली है। अस्पताल का भवन तीन मंजिला होगा। कोरोना की दूसरी लहर के समय संजीवनी अस्पताल के खोले जाने की जगह इस अस्पताल का निरीक्षण किया गया था, लेकिन अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं हुआ था, जिस कारण यहां पर कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। अस्पताल बनने के बाद इसका फायदा हिसार जिले के अलावा आसपास के जिले फतेहाबाद, सिरसा और जींद के मरीजों को भी होगा। प्रदेश भर के मात्र 3-4 जिलों में ही इस तरह का अस्पताल है।
50 बेड की होगी सुविधा
इस अस्पताल में 50 बेड की सुविधा होगी। यहां ओपीडी के अलावा ऑपरेशन की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जिले में यह आयुर्वेद का सरकारी पहला अस्पताल होगा, जहां पर सभी सुविधाएं उपलब्ध होगी। यहां पर आयुर्वेद चिकित्सकों से लेकर सर्जन तक की नई भर्तियां होगी। हिसार के आसपास के जिलों में ऐसा अस्पताल नहीं है। इसलिए इन जिलों के मरीज भी इलाज ले सकेंगे। इस समय जिला आयुर्वेदिक अधिकारी का कार्यालय अस्थायी तौर पर सेक्टर 1-4 स्थित अर्बन हेल्थ सेंटर में चल रहा है। अब वहां पर भी कोविड-19 लैब खोली जानी है, जिसके लिए जगह की व्यवस्था करनी है। इसलिए उन्होंने भी कार्यालय को शिफ्ट करने के लिए कहा है।
विज्ञापन
जिले में आयुर्वेद के करीब 44 एएमओ
जिलेभर में आयुर्वेद के करीब 44 एएमओ हैं, जो इस समय जिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी पर तैनात हैं। इनमें 25 स्थायी और 19 कांट्रेक्ट पर हैं। हर रोज इनकी 40 से 50 ओपीडी रहती है। अस्पताल के बनने से यह एएमओ भी अपनी सेवाएं नए अस्पताल में दे सकेंगे।
कोरोना की दोनों लहर में आयुर्वेद इलाज हुआ कारगर
कोरोना की पहली लहर में आयुर्वेद इलाज कारगर साबित हुआ है। कोरोना मरीजों को आयुर्वेद का इलाज दिया गया था और इन मरीजों ने 90 फीसदी जल्द रिकवरी पाई है। दूसरी लहर में ब्लैक फंगस के मरीजों ने आयुर्वेद इलाज पर अधिक विश्वास जताया है। अधिकतर मरीजों का अभी भी इलाज चल रहा हैं।
मैंने भी अस्पताल का निरीक्षण किया था और मुझे अभी हिसार जिला आयुर्वेदिक अधिकारी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। इसके लिए तीन लोगों की कमेटी बनाई गई है, जो निरीक्षण कर पता लगाएगी कि कब तक अस्पताल बनकर तैयार होगा। कोरोना के कारण देरी हुई है। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक काम पूरा हो जाएगा। - डॉ. धर्मपाल पूनिया, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, हिसार
विज्ञापन
बता दें कि वर्ष 2017 में आयुर्वेदिक अस्पताल बनाने की घोषणा हुई थी। अस्पताल के निर्माण के लिए मय्यड़ की पंचायत से 33 साल के लिए 16 एकड़ जमीन लीज पर ली है। अस्पताल का भवन तीन मंजिला होगा। कोरोना की दूसरी लहर के समय संजीवनी अस्पताल के खोले जाने की जगह इस अस्पताल का निरीक्षण किया गया था, लेकिन अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं हुआ था, जिस कारण यहां पर कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। अस्पताल बनने के बाद इसका फायदा हिसार जिले के अलावा आसपास के जिले फतेहाबाद, सिरसा और जींद के मरीजों को भी होगा। प्रदेश भर के मात्र 3-4 जिलों में ही इस तरह का अस्पताल है।
विज्ञापन
50 बेड की होगी सुविधा
इस अस्पताल में 50 बेड की सुविधा होगी। यहां ओपीडी के अलावा ऑपरेशन की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जिले में यह आयुर्वेद का सरकारी पहला अस्पताल होगा, जहां पर सभी सुविधाएं उपलब्ध होगी। यहां पर आयुर्वेद चिकित्सकों से लेकर सर्जन तक की नई भर्तियां होगी। हिसार के आसपास के जिलों में ऐसा अस्पताल नहीं है। इसलिए इन जिलों के मरीज भी इलाज ले सकेंगे। इस समय जिला आयुर्वेदिक अधिकारी का कार्यालय अस्थायी तौर पर सेक्टर 1-4 स्थित अर्बन हेल्थ सेंटर में चल रहा है। अब वहां पर भी कोविड-19 लैब खोली जानी है, जिसके लिए जगह की व्यवस्था करनी है। इसलिए उन्होंने भी कार्यालय को शिफ्ट करने के लिए कहा है।
विज्ञापन
जिले में आयुर्वेद के करीब 44 एएमओ
जिलेभर में आयुर्वेद के करीब 44 एएमओ हैं, जो इस समय जिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी पर तैनात हैं। इनमें 25 स्थायी और 19 कांट्रेक्ट पर हैं। हर रोज इनकी 40 से 50 ओपीडी रहती है। अस्पताल के बनने से यह एएमओ भी अपनी सेवाएं नए अस्पताल में दे सकेंगे।
कोरोना की दोनों लहर में आयुर्वेद इलाज हुआ कारगर
कोरोना की पहली लहर में आयुर्वेद इलाज कारगर साबित हुआ है। कोरोना मरीजों को आयुर्वेद का इलाज दिया गया था और इन मरीजों ने 90 फीसदी जल्द रिकवरी पाई है। दूसरी लहर में ब्लैक फंगस के मरीजों ने आयुर्वेद इलाज पर अधिक विश्वास जताया है। अधिकतर मरीजों का अभी भी इलाज चल रहा हैं।
मैंने भी अस्पताल का निरीक्षण किया था और मुझे अभी हिसार जिला आयुर्वेदिक अधिकारी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। इसके लिए तीन लोगों की कमेटी बनाई गई है, जो निरीक्षण कर पता लगाएगी कि कब तक अस्पताल बनकर तैयार होगा। कोरोना के कारण देरी हुई है। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक काम पूरा हो जाएगा। - डॉ. धर्मपाल पूनिया, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, हिसार