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Hisar News: एथलीट नीलेश की दौड़... शब्द नहीं, संकल्प बोलते हैं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 Aug 2025 12:34 AM IST
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Athlete Nilesh's run... Determination speaks, not words
हिसार। एथलीट नीलेश बोल और सुन नहीं सकते हैं। मगर, नीलेश ने इस कमजोरी को मेहनत और जुनून के दम पर अपनी ताकत में बदल दिया। वे इशारे को समझकर अभ्यास करते हैं। इसी का नतीजा है कि अब नीलेश डेफलिम्पिक्स में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
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नवंबर माह में टोक्यो में होने वाले डेफलिम्पिक्स में आजाद नगर निवासी नीलेश (19) 100 मीटर, 200 मीटर और 4 गुणा 100 मीटर रिले रेस में दमखम दिखाएंगे। नीलेश महाबीर स्टेडियम में कोच पवन लांबा के पास अभ्यास कर रहे हैं। उनके पिता पिता धर्मबीर हरियाणा पुलिस में एएसआई के पद पर कार्यरत हैं।
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पिता बताते हैं कि वह अपने समय में गांव में कबड्डी और कुश्ती खेलते थे। वह स्टेट लेवल पर कुश्ती खेल चुके हैं। मगर, आगे बढ़ नहीं पाए तो उन्होंने अपने छोटे बेटे नीलेश के सपनों को पंख लगाए और मैदान में उतार दिया। किसी खिलाड़ी के लिए डेफलिम्पिक्स खेलना बहुत बड़ी बात है। बेटे से पदक की उम्मीद भी है। बेटे का डेफलिम्पिक्स के लिए चयन होने पर परिवार में खुशी का माहौल है।
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अहमदाबाद में हुए थे ट्रायल
कोच पवन लांबा बताते हैं कि हॉल ही में अहमदाबाद में डेफलिम्पिक्स के लिए ट्रायल लिए गए थे। इसमें नीलेश ने क्वालिफाई करते हुए ओलंपिक खेलने के लिए जगह बनाई। नीलेश ने पांच साल पहले एथलेटिक्स से अपने कॅरिअर की शुरुआत की थी। नीलेश ने श्रवण एवं वाणी निशक्त जन कल्याण केंद्र से बारहवीं पास की है। नीलेश की माता निर्मल कुमारी गृहिणी है।
डेढ़ साल की उम्र में नहीं बोलने का चला पता
नीलेश के पिता धर्मबीर बताते हैं कि उनके दो बेटे है। बड़ा बेटा रविकांत भी बोल और सुन नहीं पाता है। नीलेश की जब डेढ़ साल की उम्र हुई तो पिता ने सोचा कि धीरे-धीरे बोलना शुरू कर देंगे। मगर, वह नहीं बोले तो दुविधा में पड़ गए। दोनों बेटे को चंडीगढ़ पीजीआई में दिखाया। यहां सुनने की मशीन लगाई गई। फिर भी बेटे को सुनाई नहीं दिया। फिर दोनों बेटे को पढ़ाई के लिए श्रवण एवं वाणी निशक्त जन कल्याण केंद्र में भेज दिया।

डेफलिम्पिक्स के लिए हुए ट्रायल में नीलेश ने क्वालिफाई कर लिया है। अब नीलेश ने डेफलिम्पिक्स की तैयारी शुरू कर दी है। उम्मीद है कि नीलेश बेहतरीन प्रदर्शन कर देश की झोली में पदक डालेगा।
- पवन लांबा, कोच, एथलेटिक्स, खेल विभाग
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