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एमए बीएड, एमटेक, बीएससी पास और राष्ट्रीय खिलाड़ी रोडवेज में बसों की करेंगी मरम्मत
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हिसार। अब एमए बीएड, एमटेक, बीएससी पास और राष्ट्रीय खिलाड़ी रोडवेज में बसों की करेंगी मरम्मत करती नजर आएंगी। ग्रुप डी की भर्ती के दौरान पांच बेटियों का हिसार डिपो की वर्कशॉप में चयन हुआ है। फिलहाल तो बेटियां सहायक के रूप में ट्रेनिंग लेंगी, उसके बाद वह जल्द ही बसों की मरम्मत का काम भी संभालेंगी।
गौरतलब है कि इससे पहले उकलाना के पंचग्रामी चौतरा के गांव फरीदपुर की 25 वर्षीय सोनिया ढुल ने कंडक्टर के रूप में ड्यूटी ज्वाइन की थी। सोनिया फिलहाल महिला स्पेशल बस को संभाल रही हैं।
भिवानी के गांव नलोई निवासी नीतू ने वेल्डर हेल्पर के पद पर ज्वाइन किया है। नीतू के पिता सज्जन सिंह किसान है। नीतू ने बीटेक करने के बाद गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से एम टेक पास है। नीतू कहती हैं कि कोई भी काम ऐसा नहीं है, जिसे महिलाएं नहीं कर सकती। अब वह अपनी नई जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाएगी।
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हिसार के गांव भाटोल रांगड़ान की रहने वाली प्रवीन कुमारी ने हांसी के एसडी गर्ल्स कॉलेज से बीएससी नॉन मेडिकल किया है। प्रवीन ने बैटरी अटेंडेंट के पद पर ज्वाइन किया है। प्रवीन के पिता कर्मबीर बिजली निगम में जेई है। प्रवीन भी रोडवेज महकमा मिलने को नए एक्सपीरियंस के तौर पर ले रही है।
नारनौंद के गांव राखी गढ़ी की निवासी सुषमा ने इलेक्ट्रीशियन हेल्पर के पद पर ज्वाइन किया है। अब तक तो सुषमा प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाती रही हैं, लेकिन अब बस के पुर्जे खोलती दिखेंगी। सुषमा की शैक्षणिक योग्यता एमए हिंदी, बीएड, जेेबीटी पास हैं। उन्होंने एचटेट व सीटेट की परीक्षा भी पास की हुई है। सुषमा ने सात साल तक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया है। सुषमा के पिता पवन सैनी किसान है।
हिसार के गांव राजली निवासी कुमारी सोनी ने मैकेनिक हेल्पर का पद संभाला है। 27 जनवरी को सोनी के पिता नरसीराम का लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया था। सोनी के पिता गांव में हलवाई का काम करते थे। सोनी मार्शल आर्ट की नेशनल खिलाड़ी हैं। वह पांच बार नेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल भी जीत चुकी हैं। अब वह इस नौकरी के जरिये परिवार की जिम्मेदारी उठाएंगी।
नारनौंद के गांव पेटवाड़ निवासी सीमा रानी की जिम्मेदारी वर्कशॉप के स्टोर में लगी है। उन्होंने स्टोर हेल्पर का पद संभाला है। सीमा बीए, बीएड, जेबीटी व एचटेट-सीटेट पास हैं। सीमा कहती हैं कि प्रतिस्पर्धा के इस जमाने में सरकारी नौकरी मिलना बड़ी बात है।
पांचों बेटियों ने अपना पदभार संभाला है। इन बेटियों ने अपनी मेहनत के बल पर नौकरी पाई है। हमें गर्व है कि अब हमारे महकमे में भी बेटियां जोखिम भरे काम भी संभालने लगी हैं। सभी स्टाफ सदस्यों से उन्हें पूरा सहयोग मिलेगा।
-जितेंद्र यादव, मैनेजर, रोडवेज वर्कशॉप
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गौरतलब है कि इससे पहले उकलाना के पंचग्रामी चौतरा के गांव फरीदपुर की 25 वर्षीय सोनिया ढुल ने कंडक्टर के रूप में ड्यूटी ज्वाइन की थी। सोनिया फिलहाल महिला स्पेशल बस को संभाल रही हैं।
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भिवानी के गांव नलोई निवासी नीतू ने वेल्डर हेल्पर के पद पर ज्वाइन किया है। नीतू के पिता सज्जन सिंह किसान है। नीतू ने बीटेक करने के बाद गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से एम टेक पास है। नीतू कहती हैं कि कोई भी काम ऐसा नहीं है, जिसे महिलाएं नहीं कर सकती। अब वह अपनी नई जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाएगी।
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हिसार के गांव भाटोल रांगड़ान की रहने वाली प्रवीन कुमारी ने हांसी के एसडी गर्ल्स कॉलेज से बीएससी नॉन मेडिकल किया है। प्रवीन ने बैटरी अटेंडेंट के पद पर ज्वाइन किया है। प्रवीन के पिता कर्मबीर बिजली निगम में जेई है। प्रवीन भी रोडवेज महकमा मिलने को नए एक्सपीरियंस के तौर पर ले रही है।
नारनौंद के गांव राखी गढ़ी की निवासी सुषमा ने इलेक्ट्रीशियन हेल्पर के पद पर ज्वाइन किया है। अब तक तो सुषमा प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाती रही हैं, लेकिन अब बस के पुर्जे खोलती दिखेंगी। सुषमा की शैक्षणिक योग्यता एमए हिंदी, बीएड, जेेबीटी पास हैं। उन्होंने एचटेट व सीटेट की परीक्षा भी पास की हुई है। सुषमा ने सात साल तक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया है। सुषमा के पिता पवन सैनी किसान है।
हिसार के गांव राजली निवासी कुमारी सोनी ने मैकेनिक हेल्पर का पद संभाला है। 27 जनवरी को सोनी के पिता नरसीराम का लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया था। सोनी के पिता गांव में हलवाई का काम करते थे। सोनी मार्शल आर्ट की नेशनल खिलाड़ी हैं। वह पांच बार नेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल भी जीत चुकी हैं। अब वह इस नौकरी के जरिये परिवार की जिम्मेदारी उठाएंगी।
नारनौंद के गांव पेटवाड़ निवासी सीमा रानी की जिम्मेदारी वर्कशॉप के स्टोर में लगी है। उन्होंने स्टोर हेल्पर का पद संभाला है। सीमा बीए, बीएड, जेबीटी व एचटेट-सीटेट पास हैं। सीमा कहती हैं कि प्रतिस्पर्धा के इस जमाने में सरकारी नौकरी मिलना बड़ी बात है।
पांचों बेटियों ने अपना पदभार संभाला है। इन बेटियों ने अपनी मेहनत के बल पर नौकरी पाई है। हमें गर्व है कि अब हमारे महकमे में भी बेटियां जोखिम भरे काम भी संभालने लगी हैं। सभी स्टाफ सदस्यों से उन्हें पूरा सहयोग मिलेगा।
-जितेंद्र यादव, मैनेजर, रोडवेज वर्कशॉप