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हवा में जहर घोल रहीं कोयले की 72 सुलगती भट्ठियां तोड़ीं
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हिसार। मिर्जापुर रोड पर हवा में जहर घोल रहीं कोयले की 72 अवैध सुलगती भट्ठियों को शुक्रवार को तोड़ दिया गया। जिला नगर योजनाकार विभाग की टीम ने करीब छह घंटे अभियान चलाकर मिर्जापुर रोड पर बने अवैध निर्माणों पर पीला पंजा चलाया। इस मौके पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट जेपी खासा मौजूद रहे।
विभाग की टीम ने सुबह साढ़े 11 बजे कार्रवाई शुरू की जो शाम करीब साढ़े पांच बजे तक चली। इस दौरान टीम ने इंटरलॉकिंग टाइल फैक्टरी, तीन आरा मशीन, दो दुकान, दो धर्मकांटे, 10 निर्माण, 3 चहारदीवारी, पांच डीपीसी और कोयले की 72 भट्ठियों को गिराया। कार्रवाई के दौरान टीम का कुछ विरोध भी हुआ। इधर भट्ठियां तोड़ते समय उनमें आग लग गई। इस पर तुरंत दमकल विभाग को सूचित किया गया। करीब आधे घंटे के बाद दमकल की एक गाड़ी मौके पर पहुंची और आग को बुझाया। बता दें कि जिला नगर योजनाकार की तरफ से मिर्जापुर रोड पर बने अवैध निर्माणों को नोटिस जारी किए गए थे। मगर अवैध निर्माण करने वालों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया तो विभाग की तरफ से यह कार्रवाई की गई।
करीब एक दशक से प्रदूषण फैला रही थीं भट्ठियां
मिर्जापुर रोड पर तोड़ी गईं कोयले की भट्ठियां करीब एक दशक से बेरोकटोक चलाई जा रही थीं। खास बात यह है कि इन भट्ठियों के निर्माण से पूर्व किसी भी विभाग ने अनुमति तक नहीं ली गई थी। इन भट्ठियों में लकड़ी को जलाकर कच्चा कोयला तैयार किया जाता है, जिससे काफी धुआं पैदा होता है और हवा जहरीली हो रही थी।
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मिर्जापुर के अलावा रायपुर, नियाणा व शिकारपुर के लोग इन भट्ठियों को बंद कराने के लिए काफी बार जिला प्रशासन को शिकायत दे चुके थे। हालांकि बीच में एक-दो बार इन भट्ठियों को बंद भी करवाया गया था, लेकिन कुछ समय बाद फिर लोग इन्हें शुरू कर देते। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा था। मिर्जापुर रोड पर कोयले की भट्ठी चला रहे मनोहर लाल ने बताया कि यह भट्ठी शुरू करने के लिए किसी विभाग की अनुमति की जरूरत नहीं होती।
भट्ठियां तोड़ने का नोटिस देने के बाद भी बनाया जा रहा था कोयला
जिला नगर योजनाकार की तरफ से इन भट्ठी मालिकों को पहले सात दिन का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस का जवाब न दिए जाने पर फिर इन्हें सात दिन के अंदर खुद ही इन्हें तोड़ने का नोटिस दिया गया था। बावजूद इसके शुक्रवार को विभाग की टीम जब इन्हें तोड़ने पहुंची तो कुछ भट्ठियों में कोयला तैयार किया जा रहा था।
भट्ठी मालिक ने किया विरोध तो पकड़कर पीसीआर में बैठाया
एक कोयला भट्ठी मालिक ने विभाग की कार्रवाई का विरोध किया। इस मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़कर पीसीआर में बैठा दिया ताकि वह कार्रवाई में बाधा न डाल सके। हालांकि कुछ देर बाद उसे छोड़ दिया गया। भट्ठी मालिक के अनुसार यह मामला कोर्ट में चल रहा है और 15 दिसंबर की सुनवाई है। कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने तक भट्ठी न तोड़ने के आदेश दिए हैं। इसे लेकर जिला नगर योजनकार विभाग को भी एक नोटिस जारी किया गया है। वहीं एक भट्ठी मालिक ने महिला मजदूरों को आगे कर दिया ताकि महिलाओं पर दया खाकर अधिकारी कार्रवाई रोक दें।
डेयरी के नाम पर रखी हुई थी एक भैंस, कमरों में बना रखे स्क्रैप गोदाम
मिर्जापुर रोड पर ही एक व्यक्ति ने डेयरी के नाम पर एक भैंस रखी हुई थी, जबकि कमरों में स्टील का स्क्रैप रखा हुआ था। अधिकारियों ने उससे पूछा तो उसने कहा कि यहां वह पशु डेयरी ही चल रहा है। उसके कुछ पशु मर गए थे। यह स्क्रैप किसी ने तीन माह के लिए यहां रखा हुआ है। यह सुन अधिकारियों ने उससे कमरों में रखे सामान को उठाने को कहा ताकि अवैध निर्माण को तोड़ा जा सके। मगर उक्त व्यक्ति ने सिर्फ पशुओं व एक सोफा ही बाहर निकाला, जबकि स्क्रैप कमरों में रखा रहा। इस पर अधिकारियों ने सिर्फ उसकी एक तरफ की दीवार, एक शेड व मुख्य गेट के साथ बना हुआ कमरा ही तोड़ा, जबकि जिन कमरों में स्क्रैप रखा हुआ था, उन्हें छुआ तक नहीं।
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विभाग की टीम ने सुबह साढ़े 11 बजे कार्रवाई शुरू की जो शाम करीब साढ़े पांच बजे तक चली। इस दौरान टीम ने इंटरलॉकिंग टाइल फैक्टरी, तीन आरा मशीन, दो दुकान, दो धर्मकांटे, 10 निर्माण, 3 चहारदीवारी, पांच डीपीसी और कोयले की 72 भट्ठियों को गिराया। कार्रवाई के दौरान टीम का कुछ विरोध भी हुआ। इधर भट्ठियां तोड़ते समय उनमें आग लग गई। इस पर तुरंत दमकल विभाग को सूचित किया गया। करीब आधे घंटे के बाद दमकल की एक गाड़ी मौके पर पहुंची और आग को बुझाया। बता दें कि जिला नगर योजनाकार की तरफ से मिर्जापुर रोड पर बने अवैध निर्माणों को नोटिस जारी किए गए थे। मगर अवैध निर्माण करने वालों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया तो विभाग की तरफ से यह कार्रवाई की गई।
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करीब एक दशक से प्रदूषण फैला रही थीं भट्ठियां
मिर्जापुर रोड पर तोड़ी गईं कोयले की भट्ठियां करीब एक दशक से बेरोकटोक चलाई जा रही थीं। खास बात यह है कि इन भट्ठियों के निर्माण से पूर्व किसी भी विभाग ने अनुमति तक नहीं ली गई थी। इन भट्ठियों में लकड़ी को जलाकर कच्चा कोयला तैयार किया जाता है, जिससे काफी धुआं पैदा होता है और हवा जहरीली हो रही थी।
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मिर्जापुर के अलावा रायपुर, नियाणा व शिकारपुर के लोग इन भट्ठियों को बंद कराने के लिए काफी बार जिला प्रशासन को शिकायत दे चुके थे। हालांकि बीच में एक-दो बार इन भट्ठियों को बंद भी करवाया गया था, लेकिन कुछ समय बाद फिर लोग इन्हें शुरू कर देते। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा था। मिर्जापुर रोड पर कोयले की भट्ठी चला रहे मनोहर लाल ने बताया कि यह भट्ठी शुरू करने के लिए किसी विभाग की अनुमति की जरूरत नहीं होती।
भट्ठियां तोड़ने का नोटिस देने के बाद भी बनाया जा रहा था कोयला
जिला नगर योजनाकार की तरफ से इन भट्ठी मालिकों को पहले सात दिन का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस का जवाब न दिए जाने पर फिर इन्हें सात दिन के अंदर खुद ही इन्हें तोड़ने का नोटिस दिया गया था। बावजूद इसके शुक्रवार को विभाग की टीम जब इन्हें तोड़ने पहुंची तो कुछ भट्ठियों में कोयला तैयार किया जा रहा था।
भट्ठी मालिक ने किया विरोध तो पकड़कर पीसीआर में बैठाया
एक कोयला भट्ठी मालिक ने विभाग की कार्रवाई का विरोध किया। इस मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़कर पीसीआर में बैठा दिया ताकि वह कार्रवाई में बाधा न डाल सके। हालांकि कुछ देर बाद उसे छोड़ दिया गया। भट्ठी मालिक के अनुसार यह मामला कोर्ट में चल रहा है और 15 दिसंबर की सुनवाई है। कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने तक भट्ठी न तोड़ने के आदेश दिए हैं। इसे लेकर जिला नगर योजनकार विभाग को भी एक नोटिस जारी किया गया है। वहीं एक भट्ठी मालिक ने महिला मजदूरों को आगे कर दिया ताकि महिलाओं पर दया खाकर अधिकारी कार्रवाई रोक दें।
डेयरी के नाम पर रखी हुई थी एक भैंस, कमरों में बना रखे स्क्रैप गोदाम
मिर्जापुर रोड पर ही एक व्यक्ति ने डेयरी के नाम पर एक भैंस रखी हुई थी, जबकि कमरों में स्टील का स्क्रैप रखा हुआ था। अधिकारियों ने उससे पूछा तो उसने कहा कि यहां वह पशु डेयरी ही चल रहा है। उसके कुछ पशु मर गए थे। यह स्क्रैप किसी ने तीन माह के लिए यहां रखा हुआ है। यह सुन अधिकारियों ने उससे कमरों में रखे सामान को उठाने को कहा ताकि अवैध निर्माण को तोड़ा जा सके। मगर उक्त व्यक्ति ने सिर्फ पशुओं व एक सोफा ही बाहर निकाला, जबकि स्क्रैप कमरों में रखा रहा। इस पर अधिकारियों ने सिर्फ उसकी एक तरफ की दीवार, एक शेड व मुख्य गेट के साथ बना हुआ कमरा ही तोड़ा, जबकि जिन कमरों में स्क्रैप रखा हुआ था, उन्हें छुआ तक नहीं।