मेयर प्रत्याशी बनने की लालसा में साधा संपर्क तो मिला जवाब-रैली में ताकत दिखाओ तो टिकट का जुगाड़ भी करेंगे

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Sun, 25 Nov 2018 01:06 AM IST
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हिसार। नगर निगम चुनाव में हर बड़ा नेता अपनी किस्मत आजमाना चाहता है। मेयर का प्रत्यक्ष चुनाव होने के कारण यह एक तरह से ‘मिनी एमएलए’ का चुनाव नजर आता है। यही कारण है कि चुनाव लड़ने का इच्छुक नेता अपने घोड़े दौड़ा रहा है और टिकट पाने की कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार 25 नवंबर को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की बरवाला में जनक्रांति रैली का आयोजन किया जाएगा। इस रैली के लिए हुड्डा गुट के कांग्रेसी नेताओं ने तो प्रयास किए ही हैं, साथ ही मेयर चुनाव की घोषणा होने से भी रैली में भीड़ जुटनी तय है। इसका कारण है कि पिछले दिनों एक नेता मेयर की टिकट की चाह में बड़े नेता के दरबार में पहुंचा। उसने जैसे ही टिकट की इच्छा जाहिर की तो उसे जवाब मिला कि 25 की रैली में अपनी ताकत दिखाओ, टिकट का जुगाड़ भी करवा देंगे। अब ऐसे में उस नेता के लिए मजबूरी है कि वह रैली में भीड़ जुटाने के लिए प्रयास कर रहा है।
कांग्रेस में अलग-अलग दरबार में लग रही हाजिरी
मेयर पद के लिए कांग्रेस पार्टी में अलग-अलग नेताओं के दरबार में हाजिरी लगना शुरू हो गई है। कुछ लोग जहां पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं तो कुछ लोग पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पास हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं। हालांकि कुछ लोग जिंदल हाउस की शरण लिए हुए हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि हिसार में जिंदल हाउस के आशीर्वाद के बिना टिकट पाना मुश्किल है। खास बात यह है कि कांग्रेस ने फिलहाल कोई पत्ते नहीं खोले हैं, हालांकि प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने पार्टी चिन्ह पर चुनाव लड़ने की घोषणा जरूर कर दी है।

विधायक के समान नजर आ रहा मेयर पद
प्रदेश के पांच नगर निगमों के चुनावों में हिसार, रोहतक और यमुनागर में मेयर का पद ओपन रखा गया है, जबकि करनाल में महिला वर्ग के लिए आरक्षित है और पानीपत मेयर का पद पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित किया गया है। अब हिसार में मेयर पद ओपन होने से बड़े-बड़े नेताओं की लार टपक रही है। यह पद पाने के लिए नेता जुगत भिड़ा रहे हैं और दिन-रात एक किए हुए हैं। इन नेताओं को मेयर का यह पद विधायक के समान नजर आ रहा है। पहले जहां पार्षद बनने के बाद मेयर बनने के लिए चयनित पार्षदों को अपने पाले में करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाने पड़ते थे, वहीं अब चुनाव जीते तो सीधे मेयर पद पर पहुंचने से यह चुनाव एमएलए चुनाव के बराबर हो गया है।
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