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निजी अस्पताल संचालकों ने चोरी छिपे गेट बंद कर जारी रखी ओपीडी
Updated Wed, 03 Jan 2018 12:57 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर जिला इकाई ने मंगलवार को निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल के विरोध स्वरूप 250 के करीब अस्पतालों ने ओपीडी बंद रखने का दावा किया, लेकिन शहर के निजी अस्पतालों में मरीज औसतन सामान्य दिनों के बराबर ही पहुंचे। कई निजी अस्पतालों में गेट बंद कर ओपीडी चलती रही। हालांकि आईएमए के डॉक्टरों ने दावा किया है कि निजी अस्पतालों में मंगलवार सुबह छह से दोपहर दो बजे तक ओपीडी बंद रही। इस दौरान केवल इमरजेंसी सेवाएं जारी थीं।
दूसरी तरफ निजी अस्पतालों में दोपहर तक ओपीडी बंद रहने से सिविल अस्पताल में मरीजों की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई। हालांकि सोमवार की अपेेक्षा मंगलवार को 243 मरीजों की संख्या ज्यादा थी। सिविल अस्पताल में औसतन रोज की ओपीडी लगभग 1100 रहती है। मंगलवार को ओपीडी संख्या 1149 थी। ईएमए का कहना है कि लोकसभा से बिल वापस लेने के बाद सवा दो बजे हड़ताल वापस ले ली गई थी।
नए बिल से चलेगी सरकारी प्रतिनिधियों की मनमानी : डॉ. नलवा
आईएमए के जिलाध्यक्ष डॉ. जेपीएस नलवा ने कहा कि उनके संगठन का विरोध नेशनल मेडिकल कमीशन बिल को लेकर है। सरकार इस कमीशन के लिए बिल ला रही है। उन्होंने कहा कि यदि बिल पास होता है तो चिकित्सा केे क्षेत्र में वह दिन काला दिन होगा। उन्होंने बताया कि पहले आईएमसी में 130 सदस्य होते थे। अब केेेंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए बिल के अनुसार इसमें कुल 25 सदस्य होंगे। इससे सरकारी प्रतिनिधियों की मनमानी चलेगी। उन्होंने कहा कि आईएमए को यह बिल कतई मंजूर नहीं।
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डॉक्टरों ने मीटिंग कर रोष जताया
इस दौरान आईएमए के बैनर तले निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने होटल में बैठक की और सरकार द्वारा बनाए जा रहे नेशनल मेडिकल कमीशन बिल का विरोध किया। डॉ. नलवा ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती, तब तक वे समय-समय पर अपना विरोध प्रकट करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से जो नियम निजी अस्पताल संचालकों पर थोपे जा रहे हैं, उनका असर सीधे आम जन की जेब पर पड़ेगा। स्वास्थ्य सेवाएं महंगी हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि उनका मकसद आम जन को महंगी की बजाय सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं देेना है।
निजी अस्पताल में ओपीडी बंद, राजेश पहुंचा नागरिक अस्पताल
उकलाना के राजेश को बुखार था। उसने चार दिन पहले मॉडल टाउन के एक निजी अस्पताल से दवा ली थी। उसे मंगलवार को डॉक्टर से फिर दवा लेनी थी, लेकिन उसने ओपीडी बंद होने के चलते सिविल अस्पताल में दवा लेनी पड़ी।
अस्पताल की ओपीडी में ज्यादा फर्क नहीं
आईएमए ने मंगलवार को निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद होने का दावा किया। दूसरी तरफ सिविल अस्पताल में औसतन रोज की करीब 1100 की ओपीडी रहती है। हालांकि नए साल वाले दिन सोमवार को मरीज कम आए थे और ओपीडी 906 रही थी, जबकि औसतन रोज की ओपीडी संख्या करीब 1100 रहती है। मंगलवार को 1149 मरीज आए।
सवा दो बजे हड़ताल खत्म : डॉ. सेतिया
आईएमए के राज्य अध्यक्ष डॉ. एपी सेतिया ने बताया कि यह बिल चर्चा के लिए लोकसभा में रखा गया था। उस पर चर्चा होनी थी। आईएमए के ओपीडी बंद करने के बाद सरकार ने बिल वापस लेकर स्टैंडिंग कमेटी ऑफ पार्लियामेंट को सौंप दिया। यही हमारी मांग थी। उसके बाद हमने 2.15 बजे हड़ताल वापस ले ली। डॉ. सेतिया ने एक सवाल के जवाब में कहा कि सिविल अस्पताल में ओपीडी इसलिए ज्यादा नहीं बढ़ी होगी कि मरीज प्राइवेट अस्पतालों पर ज्यादा विश्वास करते हैं।
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हिसार।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर जिला इकाई ने मंगलवार को निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल के विरोध स्वरूप 250 के करीब अस्पतालों ने ओपीडी बंद रखने का दावा किया, लेकिन शहर के निजी अस्पतालों में मरीज औसतन सामान्य दिनों के बराबर ही पहुंचे। कई निजी अस्पतालों में गेट बंद कर ओपीडी चलती रही। हालांकि आईएमए के डॉक्टरों ने दावा किया है कि निजी अस्पतालों में मंगलवार सुबह छह से दोपहर दो बजे तक ओपीडी बंद रही। इस दौरान केवल इमरजेंसी सेवाएं जारी थीं।
दूसरी तरफ निजी अस्पतालों में दोपहर तक ओपीडी बंद रहने से सिविल अस्पताल में मरीजों की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई। हालांकि सोमवार की अपेेक्षा मंगलवार को 243 मरीजों की संख्या ज्यादा थी। सिविल अस्पताल में औसतन रोज की ओपीडी लगभग 1100 रहती है। मंगलवार को ओपीडी संख्या 1149 थी। ईएमए का कहना है कि लोकसभा से बिल वापस लेने के बाद सवा दो बजे हड़ताल वापस ले ली गई थी।
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नए बिल से चलेगी सरकारी प्रतिनिधियों की मनमानी : डॉ. नलवा
आईएमए के जिलाध्यक्ष डॉ. जेपीएस नलवा ने कहा कि उनके संगठन का विरोध नेशनल मेडिकल कमीशन बिल को लेकर है। सरकार इस कमीशन के लिए बिल ला रही है। उन्होंने कहा कि यदि बिल पास होता है तो चिकित्सा केे क्षेत्र में वह दिन काला दिन होगा। उन्होंने बताया कि पहले आईएमसी में 130 सदस्य होते थे। अब केेेंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए बिल के अनुसार इसमें कुल 25 सदस्य होंगे। इससे सरकारी प्रतिनिधियों की मनमानी चलेगी। उन्होंने कहा कि आईएमए को यह बिल कतई मंजूर नहीं।
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डॉक्टरों ने मीटिंग कर रोष जताया
इस दौरान आईएमए के बैनर तले निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने होटल में बैठक की और सरकार द्वारा बनाए जा रहे नेशनल मेडिकल कमीशन बिल का विरोध किया। डॉ. नलवा ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती, तब तक वे समय-समय पर अपना विरोध प्रकट करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से जो नियम निजी अस्पताल संचालकों पर थोपे जा रहे हैं, उनका असर सीधे आम जन की जेब पर पड़ेगा। स्वास्थ्य सेवाएं महंगी हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि उनका मकसद आम जन को महंगी की बजाय सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं देेना है।
निजी अस्पताल में ओपीडी बंद, राजेश पहुंचा नागरिक अस्पताल
उकलाना के राजेश को बुखार था। उसने चार दिन पहले मॉडल टाउन के एक निजी अस्पताल से दवा ली थी। उसे मंगलवार को डॉक्टर से फिर दवा लेनी थी, लेकिन उसने ओपीडी बंद होने के चलते सिविल अस्पताल में दवा लेनी पड़ी।
अस्पताल की ओपीडी में ज्यादा फर्क नहीं
आईएमए ने मंगलवार को निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद होने का दावा किया। दूसरी तरफ सिविल अस्पताल में औसतन रोज की करीब 1100 की ओपीडी रहती है। हालांकि नए साल वाले दिन सोमवार को मरीज कम आए थे और ओपीडी 906 रही थी, जबकि औसतन रोज की ओपीडी संख्या करीब 1100 रहती है। मंगलवार को 1149 मरीज आए।
सवा दो बजे हड़ताल खत्म : डॉ. सेतिया
आईएमए के राज्य अध्यक्ष डॉ. एपी सेतिया ने बताया कि यह बिल चर्चा के लिए लोकसभा में रखा गया था। उस पर चर्चा होनी थी। आईएमए के ओपीडी बंद करने के बाद सरकार ने बिल वापस लेकर स्टैंडिंग कमेटी ऑफ पार्लियामेंट को सौंप दिया। यही हमारी मांग थी। उसके बाद हमने 2.15 बजे हड़ताल वापस ले ली। डॉ. सेतिया ने एक सवाल के जवाब में कहा कि सिविल अस्पताल में ओपीडी इसलिए ज्यादा नहीं बढ़ी होगी कि मरीज प्राइवेट अस्पतालों पर ज्यादा विश्वास करते हैं।