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सांसद ने नहीं की थी ऑफिस ब्लॉक व टॉयलेट की अनुशंसा
Updated Wed, 06 Dec 2017 12:46 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
सांसद कुमारी सैलजा की ग्रांट के दुरुपयोग मामले मे डीसी ने सरकार को रिपोर्ट भेज दी है। डीसी ने इसी रिपोर्ट के साथ निगम के संबंधित एमई और जेई पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा भी भेजी है। उन्होंने लिखा है कि देखने में यह प्रतीत हो रहा है कि मूक-बधिर स्कूल के कार्य में निर्माण सामग्री उच्च गुणवत्ता वाली प्रयोग नहीं की गई। क्योंकि बैडमिंटन कोर्ट और कमरों के फर्श में दरारें आई हुई हैं।
सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में लिखा है कि सांसद ने ऑफिस ब्लॉक चमकाने और शौचालय के लिए पैसा नहीं दिया गया। इसके अतिरिक्त चारदीवारी को और ऊंचा करने के लिए भी पैसा नहीं दिया गया था। अधिकारियों ने बिना सांसद की जानकारी या अनुमति के ये अतिरिक्त काम करवा दिया।
22 लाख में होना था काम
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सांसद ने जो 25 लाख की ग्रांट दी थी, वह काम 22 लाख 17 हजार रुपये में ही पूरा हो गया था। करीब 2 लाख 82 हजार रुपये बच गए। बिना सांसद की अनुमति के अधिकारियों ने मूक-बधिर स्कूल के सहायक निदेशक और धर्मेंद्र गोयल के कहने पर उस बचे हुए पैसे से ऑफिस ब्लॉक और टायलेट चमका दिए।
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टेक्निकल टीम की रिपोर्ट भेजी जाएगी बाद में
डीसी निखिल गजराज ने सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में लिखा है कि टेक्निकल जांच के लिए पीडब्ल्यूडी एक्सईएन, पंचायती राज एक्सईएन और निगम एक्सईएन की कमेटी बनाई गई है। यह रिपोर्ट आने के सात दिन के अंदर ठेकेदार के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
निगम आयुक्त ने कराई थी जांच
राज्यसभा सदस्य कुमारी सैलजा की ओर से इस बारे में शिकायत दिए जाने के बाद प्रशासन ने जांच कमेटी बनाई थी। इसमें निगम आयुक्त अशोक बंसल ने जांच कराई थी। जांच में निगम के जेई और एमई को दोषी माना गया है। निगम आयुक्त ने यह रिपोर्ट डीसी को भेजी। इसके बाद डीसी ने कार्रवाई के लिए सरकार को भेजा है।
अमर उजाला ने ब्रेक की थी खबर
अमर उजाला ने यह खबर सबसे पहले प्रकाशित की थी। इस बारे में बाद में राज्यसभा सदस्य सैलजा खुद भी जांच करने के लिए मौके पर पहुंची थीं। इसके बाद निगम की ओर से जांच टीम बनाई गई थी।
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हिसार।
सांसद कुमारी सैलजा की ग्रांट के दुरुपयोग मामले मे डीसी ने सरकार को रिपोर्ट भेज दी है। डीसी ने इसी रिपोर्ट के साथ निगम के संबंधित एमई और जेई पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा भी भेजी है। उन्होंने लिखा है कि देखने में यह प्रतीत हो रहा है कि मूक-बधिर स्कूल के कार्य में निर्माण सामग्री उच्च गुणवत्ता वाली प्रयोग नहीं की गई। क्योंकि बैडमिंटन कोर्ट और कमरों के फर्श में दरारें आई हुई हैं।
सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में लिखा है कि सांसद ने ऑफिस ब्लॉक चमकाने और शौचालय के लिए पैसा नहीं दिया गया। इसके अतिरिक्त चारदीवारी को और ऊंचा करने के लिए भी पैसा नहीं दिया गया था। अधिकारियों ने बिना सांसद की जानकारी या अनुमति के ये अतिरिक्त काम करवा दिया।
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22 लाख में होना था काम
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सांसद ने जो 25 लाख की ग्रांट दी थी, वह काम 22 लाख 17 हजार रुपये में ही पूरा हो गया था। करीब 2 लाख 82 हजार रुपये बच गए। बिना सांसद की अनुमति के अधिकारियों ने मूक-बधिर स्कूल के सहायक निदेशक और धर्मेंद्र गोयल के कहने पर उस बचे हुए पैसे से ऑफिस ब्लॉक और टायलेट चमका दिए।
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टेक्निकल टीम की रिपोर्ट भेजी जाएगी बाद में
डीसी निखिल गजराज ने सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में लिखा है कि टेक्निकल जांच के लिए पीडब्ल्यूडी एक्सईएन, पंचायती राज एक्सईएन और निगम एक्सईएन की कमेटी बनाई गई है। यह रिपोर्ट आने के सात दिन के अंदर ठेकेदार के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
निगम आयुक्त ने कराई थी जांच
राज्यसभा सदस्य कुमारी सैलजा की ओर से इस बारे में शिकायत दिए जाने के बाद प्रशासन ने जांच कमेटी बनाई थी। इसमें निगम आयुक्त अशोक बंसल ने जांच कराई थी। जांच में निगम के जेई और एमई को दोषी माना गया है। निगम आयुक्त ने यह रिपोर्ट डीसी को भेजी। इसके बाद डीसी ने कार्रवाई के लिए सरकार को भेजा है।
अमर उजाला ने ब्रेक की थी खबर
अमर उजाला ने यह खबर सबसे पहले प्रकाशित की थी। इस बारे में बाद में राज्यसभा सदस्य सैलजा खुद भी जांच करने के लिए मौके पर पहुंची थीं। इसके बाद निगम की ओर से जांच टीम बनाई गई थी।