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एयर कंडीशन कहीं स्वाइन फ्लू का नहीं दे जाए दर्द
Updated Fri, 23 Jun 2017 12:44 AM IST
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राजेश स्वामी
हिसार।
यदि आपका घर एयरकंडीशंड है तो सेहत के नजरिये से यह आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। वजह, सर्दी में पनपने वाला स्वाइन फ्लू का वायरस 40 से अधिक डिग्री सेल्सियस तापमान में भी सेहत पर हमला कर रहा है। जबकि इतने तापमान में यह वायरस जीवित नहीं रह सकता है, लेकिन एयरकंडीशंड इस वायरस को जीवित रखे हुआ है। हाल ही में स्वाइन फ्लू के पांच रोगी मिलने से इस बात का खुलासा हुआ है। लू और भीषण गर्मी में स्वाइन फ्लू के मरीज मिलने पर स्वास्थ्य विभाग हैरत में है। सिविल अस्पताल की मलेरिया शाखा की बात मानें तो यह बात सही है। स्वाइन फ्लू रोग सर्दी में पांव पसारता रहा है, लेकिन अबकी बार स्वाइन फ्लू के रोगी मई महीने में मिले हैं। यह हैरान करने वाली बात है कि मई में स्वाइन फ्लू रोग कैसे फैला। जून के साथ मई भीषण लू चलने वाला महीना होता है। एसी यूज होने वाले कमरे का तापमान औसतन 20-25 डिग्री रहता है, जोकि मई के में बाहर के तापमान से लगभग आधा होता है। स्वाइन फ्लू वायरस से फैलता है। एसी वाले रूम में जहां आम आदमी को गर्मी से राहत मिलती है, वहीं कई लोग वायरस से स्वाइन फ्लू की चपेट में आ जाते हैं।
जांच में हुई स्वाइन फ्लू की पुष्टि
शहर के अलग-अलग प्राइवेट अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के पांच संदिग्ध मरीज दाखिल हुए थे। स्वास्थ्य विभाग ने उनके सैंपल लिए थे। जांच में इन पांचों मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। इनमें एक मरीज न्यू मॉडल टाउन, दो मरीज आजाद नगर और दो मरीज भिवानी के हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी रिपोर्ट स्टेट हेडक्वार्टर को भेज दी है।
यह है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू एक ऐसी बीमारी है, जो कि रोगी व्यक्ति (संक्रमित) से स्वस्थ मनुष्य में फैलती है। स्वाइन फ्लू मौसमी फ्लू की तरह एक-दूसरे में फैलता है। स्वाइन फ्लू नए वायरस की तरह सामने आया है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भारतीय में नहीं है।
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ऐसे फैलता है स्वाइन फ्लू
जिला मलेरिया अधिकारी के अनुसार जब एक संक्रमित मनुष्य खांसता या छींकता है और उसके कण स्वस्थ मनुष्य पर गिरते हैं तो उसे भी संक्रमित कर देते हैं। जब संक्रमित मनुष्य अपने हाथ पर खांसता है या छींकता है और उन्हीं संक्रमित हाथों से अन्य वस्तुओं कंप्यूटर, मोबाइल, दरवाजा, टीवी, रिमोट आदि छूता है या दूसरे लोगों से हाथ मिलाता है तो वह संक्रमण उनमें भी हो जाता है। स्वाइन फ्लू एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
तीव्र गति से बुखार, खांसी, गला खराब होना, जुकाम, बदन दर्द होना, तेज सिर दर्द होना, सांस में तकलीफ, उल्टी आना या दस्त लगना स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं। ऐसे लक्षण होने पर मरीज को ढील नहीं बरतनी चाहिए। ढील बरतना रोगी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
स्वाइन फ्लू से ऐसे करें बचाव
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. जया गोयल का कहना है कि मनुष्य को खांसते या छींकते समय रुमाल या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करना चाहिए। संक्रमित व्यक्ति से उचित दूसरी बनाएं या मास्क का प्रयोग करें, साबुन से 30 सेकंड तक अपने हाथ अच्छी तरह धोएं, भीड़ वाली जगह पर न जाएं, उचित मात्रा में पानी पीएं, पौष्टिक आहार और अच्छी नींद लें, बच्चे में स्वाइन फ्लू की आशंका होने पर उसे स्कूल व खेलने न भेजें।
स्वाइन फ्लू आमतौर पर ठंड के मौसम में होता है। मई में स्वाइन फ्लू के पांच रोगी मिले। ये पांचों मरीज शहर के प्राइवेट अस्पतालों में दाखिल थे। घर में एसी के यूज होने के चलते वायरस फैलने से वे स्वाइन फ्लू की चपेट में आए थे।
-डॉ. जया गोयल, जिला मलेरिया अधिकारी, हिसार
स्वास्थ्य विभाग का दावा, लू के मौसम में भी एसी ने जीवित रखा स्वाइन फ्लू का वायरस
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हिसार।
यदि आपका घर एयरकंडीशंड है तो सेहत के नजरिये से यह आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। वजह, सर्दी में पनपने वाला स्वाइन फ्लू का वायरस 40 से अधिक डिग्री सेल्सियस तापमान में भी सेहत पर हमला कर रहा है। जबकि इतने तापमान में यह वायरस जीवित नहीं रह सकता है, लेकिन एयरकंडीशंड इस वायरस को जीवित रखे हुआ है। हाल ही में स्वाइन फ्लू के पांच रोगी मिलने से इस बात का खुलासा हुआ है। लू और भीषण गर्मी में स्वाइन फ्लू के मरीज मिलने पर स्वास्थ्य विभाग हैरत में है। सिविल अस्पताल की मलेरिया शाखा की बात मानें तो यह बात सही है। स्वाइन फ्लू रोग सर्दी में पांव पसारता रहा है, लेकिन अबकी बार स्वाइन फ्लू के रोगी मई महीने में मिले हैं। यह हैरान करने वाली बात है कि मई में स्वाइन फ्लू रोग कैसे फैला। जून के साथ मई भीषण लू चलने वाला महीना होता है। एसी यूज होने वाले कमरे का तापमान औसतन 20-25 डिग्री रहता है, जोकि मई के में बाहर के तापमान से लगभग आधा होता है। स्वाइन फ्लू वायरस से फैलता है। एसी वाले रूम में जहां आम आदमी को गर्मी से राहत मिलती है, वहीं कई लोग वायरस से स्वाइन फ्लू की चपेट में आ जाते हैं।
जांच में हुई स्वाइन फ्लू की पुष्टि
शहर के अलग-अलग प्राइवेट अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के पांच संदिग्ध मरीज दाखिल हुए थे। स्वास्थ्य विभाग ने उनके सैंपल लिए थे। जांच में इन पांचों मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। इनमें एक मरीज न्यू मॉडल टाउन, दो मरीज आजाद नगर और दो मरीज भिवानी के हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी रिपोर्ट स्टेट हेडक्वार्टर को भेज दी है।
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यह है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू एक ऐसी बीमारी है, जो कि रोगी व्यक्ति (संक्रमित) से स्वस्थ मनुष्य में फैलती है। स्वाइन फ्लू मौसमी फ्लू की तरह एक-दूसरे में फैलता है। स्वाइन फ्लू नए वायरस की तरह सामने आया है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भारतीय में नहीं है।
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ऐसे फैलता है स्वाइन फ्लू
जिला मलेरिया अधिकारी के अनुसार जब एक संक्रमित मनुष्य खांसता या छींकता है और उसके कण स्वस्थ मनुष्य पर गिरते हैं तो उसे भी संक्रमित कर देते हैं। जब संक्रमित मनुष्य अपने हाथ पर खांसता है या छींकता है और उन्हीं संक्रमित हाथों से अन्य वस्तुओं कंप्यूटर, मोबाइल, दरवाजा, टीवी, रिमोट आदि छूता है या दूसरे लोगों से हाथ मिलाता है तो वह संक्रमण उनमें भी हो जाता है। स्वाइन फ्लू एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
तीव्र गति से बुखार, खांसी, गला खराब होना, जुकाम, बदन दर्द होना, तेज सिर दर्द होना, सांस में तकलीफ, उल्टी आना या दस्त लगना स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं। ऐसे लक्षण होने पर मरीज को ढील नहीं बरतनी चाहिए। ढील बरतना रोगी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
स्वाइन फ्लू से ऐसे करें बचाव
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. जया गोयल का कहना है कि मनुष्य को खांसते या छींकते समय रुमाल या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करना चाहिए। संक्रमित व्यक्ति से उचित दूसरी बनाएं या मास्क का प्रयोग करें, साबुन से 30 सेकंड तक अपने हाथ अच्छी तरह धोएं, भीड़ वाली जगह पर न जाएं, उचित मात्रा में पानी पीएं, पौष्टिक आहार और अच्छी नींद लें, बच्चे में स्वाइन फ्लू की आशंका होने पर उसे स्कूल व खेलने न भेजें।
स्वाइन फ्लू आमतौर पर ठंड के मौसम में होता है। मई में स्वाइन फ्लू के पांच रोगी मिले। ये पांचों मरीज शहर के प्राइवेट अस्पतालों में दाखिल थे। घर में एसी के यूज होने के चलते वायरस फैलने से वे स्वाइन फ्लू की चपेट में आए थे।
-डॉ. जया गोयल, जिला मलेरिया अधिकारी, हिसार
स्वास्थ्य विभाग का दावा, लू के मौसम में भी एसी ने जीवित रखा स्वाइन फ्लू का वायरस