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किसानों के आंदोलन में फंसे 500 ट्रक व 40-45 करोड़ का माल
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शहर में स्थित एक स्टील फैक्ट्री। फाइल फोटो
- फोटो : Hisar
किसान आंदोलन का असर अब व्यापार पर भी पड़ रहा है। किसानों के दिल्ली सीमा पर बैठने और वाहनों की आवाजाही बंद होने के कारण जिले के करीब 500 ट्रक यथास्थान पर फंस गए हैं। इनमें करीब 40 से 45 करोड़ रुपये का माल लदा हुआ है। इनमें से कुछ ट्रकों में तो खाद्य सामग्री खराब होने की कगार पर है।
अगले 2-3 दिनों तक स्थिति सामान्य नहीं हुई और ट्रकों का आवागमन नहीं हुआ तो रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी इसका असर दिखाई देने लगेगा। सीमा पर अटके हुए लगभग 500 में से 300 ट्रक निर्यात और 200 ट्रक आयात के फंसे हैं। उधर, आंदोलन के कारण जिले के उद्योग-धंधे भी प्रभावित हैं। उद्योगों का तैयार माल राजधानी क्षेत्र में नहीं जा पा रहा है और कच्चा माल (कंज्यूमेबल आइटम) जिले में नहीं आ रहा है।
पहले पंजाब और अब दिल्ली बंद से होने से उद्योगपति परेशान
जिले में ज्यादातर स्टील व इससे जुड़े उद्योग स्थापित हैं। शहर में ऐसे उद्योगों की संख्या करीब 70 से 75 हैं। इन उद्योगों के मालिकों के अनुसार पहले किसान पंजाब में रेल ट्रैक पर बैठे थे और रेल यातायात अवरुद्ध कर रखा था। इस कारण रेलगाड़ियों से माल आ-जा नहीं पा रहा था। अब किसान दिल्ली सीमा पर जाकर बैठ गए हैं और आवाजाही को बंद कर दिया है। उद्योगपतियों के अनुसार दिल्ली हिसार के लिए प्रमुख मंडी है। जिले से राजधानी में काफी तैयार माल सप्लाई किया जाता है। इसके अलावा उद्योगों का कच्चा माल के अलावा काफी कंज्यूमेबल आइटम होता हैं, जो दिल्ली से आता है। आवाजाही बंद होने से न तो तैयार माल जा रहा है और न ही कंज्यूमेबल आइटम आ रहा है। उद्योगों के ऑर्डर रुके हुए हैं।
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सब्जियों की सप्लाई हो रही प्रभावित
शहर की मंडी में दिल्ली से 30 से 40 प्रतिशत फल-सब्जियों की सप्लाई होती है। किसान आंदोलन का असर सब्जियों की सप्लाई पर भी पड़ रहा है। जहां पहले सब्जियों की गाड़ियां रात 2 से तीन बजे के बीच पहुंच जाती थीं, वे अब सुबह 9-10 बजे तक आ रही हैं। आढ़तियों के अनुसार मुख्य रास्तों पर तो किसान बैठे हैं, ऐसे में ये गाड़ियां गांवों से होकर यहां पहुंच रही हैं। अगर आंदोलन ज्यादा दिन चला तो मुश्किल पैदा हो सकती है।
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वर्जन
माल से लदे हुए जिले के करीब 500 ट्रक दोनों तरफ खड़े हैं। किसान जब रास्ता खोलेंगे, तभी इन ट्रकों के पहिये चलेंगे।
- कुलदीप सिहाग, मीडिया प्रभारी, द ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
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वर्जन
कोरोना के कारण पहले ही उद्योगों की हालत खराब है और ऊपर से यह आंदोलन शुरू हो गया। सरकार को जल्द इस आंदोलन को खत्म करवाना होगा। आंदोलन के कारण हमारा तैयार माल दिल्ली में नहीं जा पा रहा है।
- अजय बतरा, उद्योगपति
वर्जन
कई दिनों से गाड़ियां कई-कई घंटे की देरी से पहुंच पा रही हैं। सोमवार को महीना बंद होने की वजह से मंडी बंद रही और सब्जी की गाड़ियां नहीं आईं, लेकिन मंगलवार से स्थिति और अधिक बिगड़ने की आशंका है।
- राजेंद्र सैनी, आढ़ती, नई सब्जी मंडी
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अगले 2-3 दिनों तक स्थिति सामान्य नहीं हुई और ट्रकों का आवागमन नहीं हुआ तो रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी इसका असर दिखाई देने लगेगा। सीमा पर अटके हुए लगभग 500 में से 300 ट्रक निर्यात और 200 ट्रक आयात के फंसे हैं। उधर, आंदोलन के कारण जिले के उद्योग-धंधे भी प्रभावित हैं। उद्योगों का तैयार माल राजधानी क्षेत्र में नहीं जा पा रहा है और कच्चा माल (कंज्यूमेबल आइटम) जिले में नहीं आ रहा है।
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पहले पंजाब और अब दिल्ली बंद से होने से उद्योगपति परेशान
जिले में ज्यादातर स्टील व इससे जुड़े उद्योग स्थापित हैं। शहर में ऐसे उद्योगों की संख्या करीब 70 से 75 हैं। इन उद्योगों के मालिकों के अनुसार पहले किसान पंजाब में रेल ट्रैक पर बैठे थे और रेल यातायात अवरुद्ध कर रखा था। इस कारण रेलगाड़ियों से माल आ-जा नहीं पा रहा था। अब किसान दिल्ली सीमा पर जाकर बैठ गए हैं और आवाजाही को बंद कर दिया है। उद्योगपतियों के अनुसार दिल्ली हिसार के लिए प्रमुख मंडी है। जिले से राजधानी में काफी तैयार माल सप्लाई किया जाता है। इसके अलावा उद्योगों का कच्चा माल के अलावा काफी कंज्यूमेबल आइटम होता हैं, जो दिल्ली से आता है। आवाजाही बंद होने से न तो तैयार माल जा रहा है और न ही कंज्यूमेबल आइटम आ रहा है। उद्योगों के ऑर्डर रुके हुए हैं।
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सब्जियों की सप्लाई हो रही प्रभावित
शहर की मंडी में दिल्ली से 30 से 40 प्रतिशत फल-सब्जियों की सप्लाई होती है। किसान आंदोलन का असर सब्जियों की सप्लाई पर भी पड़ रहा है। जहां पहले सब्जियों की गाड़ियां रात 2 से तीन बजे के बीच पहुंच जाती थीं, वे अब सुबह 9-10 बजे तक आ रही हैं। आढ़तियों के अनुसार मुख्य रास्तों पर तो किसान बैठे हैं, ऐसे में ये गाड़ियां गांवों से होकर यहां पहुंच रही हैं। अगर आंदोलन ज्यादा दिन चला तो मुश्किल पैदा हो सकती है।
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वर्जन
माल से लदे हुए जिले के करीब 500 ट्रक दोनों तरफ खड़े हैं। किसान जब रास्ता खोलेंगे, तभी इन ट्रकों के पहिये चलेंगे।
- कुलदीप सिहाग, मीडिया प्रभारी, द ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
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वर्जन
कोरोना के कारण पहले ही उद्योगों की हालत खराब है और ऊपर से यह आंदोलन शुरू हो गया। सरकार को जल्द इस आंदोलन को खत्म करवाना होगा। आंदोलन के कारण हमारा तैयार माल दिल्ली में नहीं जा पा रहा है।
- अजय बतरा, उद्योगपति
वर्जन
कई दिनों से गाड़ियां कई-कई घंटे की देरी से पहुंच पा रही हैं। सोमवार को महीना बंद होने की वजह से मंडी बंद रही और सब्जी की गाड़ियां नहीं आईं, लेकिन मंगलवार से स्थिति और अधिक बिगड़ने की आशंका है।
- राजेंद्र सैनी, आढ़ती, नई सब्जी मंडी