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Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   500 revolutionaries were martyred at Nagori Gate in the first spark of On August 19, 1857 revolution

हिसार: 19 अगस्त 1857 को क्रांति की पहली चिंगारी में नागोरी गेट पर शहीद हुए थे 500 क्रांतिकारी

Thu, 19 Aug 2021 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो सुरेंद्र दलाल, संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
सुरेंद्र दलाल, संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 19 Aug 2021 12:14 AM IST
सार

260 से अधिक घायल हुए। कुछ क्रांतिकारियों को जिंदा पकड़ लिया गया। जिन्हें भादरा गेट के सामने रोड रोलर से कुचलवा कर मार डाला। अंग्रेेजी सेना के 28 जवान भी क्रांतिकारियों के साथ मिल गए थे। अंग्रेजी सेना को जब इस बारे में पता लगा तो उन्होंने 5 सैनिकों की गोली मारकर हत्या कर दी। 23 को गिरफ्तार कर लिया।

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500 revolutionaries were martyred at Nagori Gate in the first spark of On August 19, 1857 revolution
1857 की क्रांति (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

1857 की क्रांति में हिसार के वीर कुल्हाड़ी, गंडासे, जेली, भाले लेकर ही अंग्रेजी सेना से युद्ध करने पहुंच गए थे। 19 अगस्त को इन वीरों ने अंग्रेेजी सेना को भगा कर हिसार को आजाद कराने के लिए किले के नागोरी गेट पर आक्रमण किया था। पारंपरिक हथियारों के दम भी क्रांतिकारी अंग्रेजी सेना के गोला बारूद-बंदूकों युक्त सिपाहियों से कई घंटों तक लड़ते रहे। इस युद्ध में 500 से अधिक क्रांतिकारी शहीद हो गए। अंग्रेजी सेना के भी काफी सैनिक मारे गए थे। जिनकी सही संख्या इतिहास के पन्नों में रिकॉर्ड नहीं की गई।

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हिसार के नागोरी गेट को आप जानते ही होंगे। हिसार किले का नागोरी गेट फिलहाल अस्तित्व में नहीं है। इस गेट से जुड़ी शौर्यगाथा हर किसी को जाननी चाहिए। अंग्रेजी सेना के लेफ्टिनेंट मिल्डमे ने अपने जनरल वॉन कोर्टलैंड को लिखे पत्र में इस पूरी घटना का विवरण दिया है। अभिलेखाकार विभाग के पास यह दस्तावेज मौजूद है।
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इतिहास के दस्तावेजों के अनुसार लेफ्टिनेंट मिल्डमे 18 अगस्त 1857 को लेफ्टिनेंट बुलैन, डॉ. लैम्ब, भारतीय अधिकारी रिसालदार शेर मोहम्मद खान, फतेहशेर खान, महाराजा बीकानेर के 657 सैनिक घुड़सवारों के साथ हिसार पहुंचे। कुतरमुखी रेजीमेंट के 45 सैनिक भी इस टुकड़ी में शामिल हुए। 19 अगस्त को इस टुकड़ी ने हिसार की सुरक्षा अपने हाथ में ली। अंग्रेजों ने हिसार किले में अपना जमावड़ा बनाया। 19 अगस्त की सुबह ही करीब 10.30 बजे 2000 से अधिक लोगों ने हिसार को आजाद कराने के लिए युद्ध शुरू कर दिया।

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क्रांतिकारियों के साथ कैबलरी के 400 घुड़सवार व शहजादा मुहम्मद आजम भी था। क्रांतिकारियों ने नागोरी गेट के मुख्य द्वार पर जोरदार हमला करते हुए कुल्हाड़ियों से गेट तोड़ना शुरू किया। किले को बचाने के लिए अंग्रेजी सेना ने गोलियां बरसाई। काफी देर तक युद्ध के बाद गोला बारूद के बल पर क्रांतिकारियों को पीछे हटाने में सफल हो गई। अंग्रेजों ने किले के दरवाजों को मजबूती से बंद कराते हुए 350 सैनिक तैनात किए। पीछे हटे क्रांतिकारी कुछ समय बाद दूसरे रास्तों को अपनाते हुए एक बार फिर से किले के पश्चिमी भादरा गेट पर पहुंचे। इस गेट पर भी काफी देर तक युद्ध चला।

क्रांतिकारियों ने भी डोगरा मोहल्ला की ओर से काफी देर तक गोलीबारी की। क्रांतिकारियों के पास हथियारों के नाम पर गंडासे, भाले, जेली, कुल्हाड़ी मुख्य थे। कुछ बंदूक भी क्रांतिकारियों ने हासिल कर ली थी। इस युद्ध में करीब 300 क्रांतिकारियों की लाश नागोरी गेट के आसपास मिली। इतिहास की किताबों के अनुसार इस युद्ध में करीब 500 से अधिक क्रांतिकारी मारे गए।

260 से अधिक घायल हुए। कुछ क्रांतिकारियों को जिंदा पकड़ लिया गया। जिन्हें भादरा गेट के सामने रोड रोलर से कुचलवा कर मार डाला। अंग्रेेजी सेना के 28 जवान भी क्रांतिकारियों के साथ मिल गए थे। अंग्रेजी सेना को जब इस बारे में पता लगा तो उन्होंने 5 सैनिकों की गोली मारकर हत्या कर दी। 23 को गिरफ्तार कर लिया। मुकदमे की औपचारिकता के बाद इन 23 सैनिकों को भी फांसी दे दी गई।

19 अगस्त 1857 को हिसार में क्रांति शुरू हुई थी। नागोरी गेट पर भीषण युद्ध हुआ। अभिलेखागार विभाग के पास पूरे प्रमाण हैं। अंग्रेजों की ओर से किए गए पत्राचार भी हमारे पास मौजूद हैं। 19 अगस्त से सितंबर माह तक कई बार क्रांतिकारी अंग्रेजों से टकराए थे। अनिल कुमार, सहायक निदेशक, अभिलेखागार विभाग, हिसार

 

बीकानेर आर्मी, टोहाना हार्स की टुकड़ी अंग्रेजों की ओर से लड़े थे। 123 क्रांतिकारी रोड रोलर के नीचे कुचले गए थे। इसका उल्लेख अंग्रेेेजों के लेटर में भी नहीं किया गया। जिसे हम तलाकी गेट के नाम से पहचानते हैं। अंग्रेजों की ओर से लड़ते हुए 152 सैनिक मारे जाने की जानकारी है। करीब 650 क्रांतिकारी इस युद्ध में मारे गए थे। - महेंद्र सिंह, प्रोफेसर इतिहास विभाग, दयानंद महाविद्यालय , हिसार

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