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दुर्लभ दस्तावेजों की प्रदर्शनी विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक

Sat, 18 May 2019 01:35 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 18 May 2019 01:35 AM IST
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दुर्लभ दस्तावेजों की प्रदर्शनी विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक
हिसार। अभिलेखागार विभाग की ओर से ठाकुरदास भार्गव वरिष्ठ माध्यमिक मॉडल विद्यालय में ऐतिहासिक एवं दुर्लभ दस्तावेजों और तस्वीरों की दो दिवसीय प्रदर्शनी शुक्रवार को संपन्न हो गई। प्रदर्शनी के समापन अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. केसी चतुर्वेदी ने बतौर मुख्यातिथि प्रदर्शनी का अवलोकन किया व इसे विद्यार्थियों और शहरवासियों के लिए काफी ज्ञानवर्धक बताया। प्रदर्शनी के समापन अवसर पर विद्यालय में एक प्रश्रोत्तरी कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें प्रदर्शनी देखने आए विद्यार्थियों से प्रदर्शनी में लगाए गए दस्तावेजों से संबंधित प्रश्र पूछे गए तथा सही उत्तर देने वाले व कविताएं आदि सुनाने वाले 20 से अधिक विद्यार्थियों को पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया। प्रदर्शनी देखने वाले विद्यार्थियों में विशेष जोश देखने को मिला। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी से संबंधित अपने अनुभव भी व्याख्यान के माध्यम से बताए। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी में प्रदर्शित की गई राष्ट्रभक्ति की कविताएं भी सुनाईं। राष्ट्रगान के साथ प्रदर्शनी का समापन हुआ। अभिलेखागार विभाग के अभिलेखपाल व हिसार के इंचार्ज अनिल कुमार ने बताया कि सन् 1938 में हिसार में भयंकर अकाल पड़ा था, जिसके पीड़ितों से मिलने के लिए 28 नवंबर 1938 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने हिसार का दौरा किया था। निकटवर्ती गांव सातरोड़ खुर्द में पीड़ितों से मिलते हुए लिया गया उनका एक फोटो भी प्रदर्शनी में विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अतिरिक्त इस प्रदर्शनी में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले देशभक्तों के फोटोग्राफ्स को भी प्रदर्शित किया गया, जिन्हें देखने में विद्यार्थियों ने काफी दिलचस्पी दिखाई और वे रोमांचित नजर आए।
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प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण
अनिल कुमार ने बताया कि प्रदर्शनी में 10 मई 1857 को अंबाला से आरंभ हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बारे में जानकारी देता एक टेलीग्राम, अंबाला में आगजनी की घटनाएं, लाला हुक्म चंद जैन को फांसी देने, अंतिम मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर के गहनों की सूची, बल्लभगढ़ के राजा और झज्जर एवं बहादुरगढ़ के नवाबों के क्षेत्रों का अधिग्रहण, 1 नवंबर 1858 की उद्घोषणा द्वारा भारत में ब्रिटिश क्षेत्रों का प्रशासन ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों से महारानी ने स्वयं ले लिया, 1858 काला पानी की सजा पाए कैदियों को भेजे जाने का मार्ग, 1860 अंबाला डिविजन में पंजाब के जिलों में पुस्तकों की खरीद के लिए राशि को प्रपोज करना, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में अंबाला के लाला मुरलीधर के राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए सीधे प्रतिवेदन की वकालत करने संबंधी दस्तावेज, रोलेट बिल के विरोध में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बचाव की हिदायतें देने संबंधी, पंजाब में महात्मा गांधी के आगमन पर प्रतिबंध, महात्मा गाधी की पलवल में गिरफ्तारी, पंजाब के समाचार पत्रों पर सेंसरशिप, सर छोटूराम के बारे में तत्कालीन उपायुक्त रोहतक की रिपोर्ट, फिरोजपुर झिरका में असहयोग आंदोलन, 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाना, विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार, शहीद भगत सिंह को फांसी दिए जाने के आदेश, 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा आजाद हिंद गवर्नमेंट की घोषणा, नारनौल निवासी भागीरथ प्रसाद शर्मा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज बारे रचित गीत आदि अभिलेख प्रदर्शित किए गए हैं।
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