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एचएयू ने पीपीपी के तहत कंपनी से किया एमओयू
Updated Thu, 05 Jul 2018 12:33 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप कार्यक्रम के तहत मैसजर हैबिटेट जिनोम इंप्रूवमेंट प्राइमरी प्रोड्यूसर्स कंपनी के साथ एमओयू (मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग) किया है।
कुलपति प्रो. केपी सिंह की उपस्थिति में एचएयू की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत व सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश गेरा और मैसजर हैबिटेट जिनोम इंप्रूवमेंट प्राइमरी प्रोड्यूसर्स कंपनी के चेयरमैन सतीश कुमार व आनंद डूडी ने इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। अनुबंध के अंतर्गत हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की जीवाणु खाद उत्पादन प्रयोगशाला का प्रयोग करके उपरोक्त कंपनी विभिन्न फसलों के लिए उपयुक्त जैविक उर्वरक तैयार करेगी और उसकी मार्केटिंग करेगी। कुलपति केपी सिंह ने कहा कि वर्तमान में फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे दिन-प्रतिदिन मृदा का स्वास्थ्य खराब हो रहा है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा जैविक उर्वरक सस्ते हैं। फसलों में इनके प्रयोग से रासायनिक उर्वरकों की मात्रा में कटौती की जा सकती है। इस मौके पर कुलपति के विशेष कार्य अधिकारी डॉ. एमके गर्ग, बेसिक साइंस कॉलेज के डीन डॉ. राजबीर सिंह, कार्यकारी मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. आशा क्वात्रा, बौद्धिक संपदा अधिकार इकाई की प्रभारी डॉ. मंजु टोंक, सुखबीर डूडी आदि उपस्थित थे।
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप कार्यक्रम के तहत मैसजर हैबिटेट जिनोम इंप्रूवमेंट प्राइमरी प्रोड्यूसर्स कंपनी के साथ एमओयू (मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग) किया है।
कुलपति प्रो. केपी सिंह की उपस्थिति में एचएयू की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत व सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश गेरा और मैसजर हैबिटेट जिनोम इंप्रूवमेंट प्राइमरी प्रोड्यूसर्स कंपनी के चेयरमैन सतीश कुमार व आनंद डूडी ने इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। अनुबंध के अंतर्गत हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की जीवाणु खाद उत्पादन प्रयोगशाला का प्रयोग करके उपरोक्त कंपनी विभिन्न फसलों के लिए उपयुक्त जैविक उर्वरक तैयार करेगी और उसकी मार्केटिंग करेगी। कुलपति केपी सिंह ने कहा कि वर्तमान में फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे दिन-प्रतिदिन मृदा का स्वास्थ्य खराब हो रहा है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा जैविक उर्वरक सस्ते हैं। फसलों में इनके प्रयोग से रासायनिक उर्वरकों की मात्रा में कटौती की जा सकती है। इस मौके पर कुलपति के विशेष कार्य अधिकारी डॉ. एमके गर्ग, बेसिक साइंस कॉलेज के डीन डॉ. राजबीर सिंह, कार्यकारी मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. आशा क्वात्रा, बौद्धिक संपदा अधिकार इकाई की प्रभारी डॉ. मंजु टोंक, सुखबीर डूडी आदि उपस्थित थे।
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