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अपंगता को दी मात, नाड़ा की बहु ने झटका सोना-- संसोधित
Updated Wed, 04 Apr 2018 01:12 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
खेलों में हार-जीत होती रहती है, लेकिन जब जीत विषम परिस्थितियों में हो तो उसके मायने ही बदल जाते हैं। ऐसी ही एक कहानी है जिले के गांव नाड़ा की बहू कुसुम पांचाल की। बचपन से ही दिव्यांग, करीब चार साल पहले 80 प्रतिशत तक किडनी फेल और फरवरी 2018 में एक्सीडेंट में घायल, फिर भी हौसला नहीं तोड़ा। अब कुसुम ने गत दिवस पंचकूला में संपन्न हुई 18वीं नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के डिस्कस थ्रो मुकाबले में स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि हिम्मत के आगे सब कुछ संभव है।
विजेता कुसुम का गांव पहुंचने पर फूलमालाओं के साथ जोरदार स्वागत किया गया। कुसुम का अभी हाल ही में रोड एक्सीडेंट हुआ था और मात्र दस दिनों की प्रैक्टिस में ही गोल्ड मेडल जीतना खुद कुसुम के लिए आश्चर्यजनक है। गांव नाड़ा निवासी संजय पांचाल की पत्नी कुसुम पांचाल बचपन से ही चल नहीं पाती थी। कुसुम की मां उसे स्कूल छोड़ आती।
डबल एमए, बीएड, एमफिल और पीएचडी कर चुकी कुसुम
कुसुम को बचपन से ही पढ़ने का शौक रहा और इसी शौक और मेहनत की बदौलत उसने डबल एमए, बीएड, एमफिल और पीएचडी (लाइब्रेरी साइंस) कर अपनी अपंगता को शिकस्त दी। कुसुम ने अपने खेलों की शुरुआत 2016 में पंचकूला में आयोजित नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप से की। यहां भाला फेंक में उसने कांस्य पदक प्राप्त किया। इसके उपरांत कुसुम की किडनी 80 प्रतिशत तक फेल हो गई। दो ऑपरेशन होने के उपरांत वह दोबारा बेड पर आ गई, लेकिन पति संजय का साथ मिला तो फिर 17वीं नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोला फेंक और डिस्कस थ्रो में दो गोल्ड मेडल जीते। अभी हाल ही में फरवरी 2018 में कुसुम का फिर एक्सीडेंट हो गया, जिसके उपरांत वह फिर से बेड पर आ गई, लेकिन उसने हार नहीं मानी और 2018 नेशनल पैरा एथलेटिक्स के डिस्कस थ्रो में फिर गोल्ड पर कब्जा जमा लिया। स्वागत समारोह में गांव के सरपंच धूप सिंह, पूर्व सरपंच चंद्रभान, जिला पार्षद राजेश नाडा, हरदीप, प्रवीण नाडा, कबड्डी खिलाड़ी सुमन, रीतू, मेनका, सोनिया, खुशबू सहित अन्य गण्यमान्य मौजूद थे।
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हिसार।
खेलों में हार-जीत होती रहती है, लेकिन जब जीत विषम परिस्थितियों में हो तो उसके मायने ही बदल जाते हैं। ऐसी ही एक कहानी है जिले के गांव नाड़ा की बहू कुसुम पांचाल की। बचपन से ही दिव्यांग, करीब चार साल पहले 80 प्रतिशत तक किडनी फेल और फरवरी 2018 में एक्सीडेंट में घायल, फिर भी हौसला नहीं तोड़ा। अब कुसुम ने गत दिवस पंचकूला में संपन्न हुई 18वीं नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के डिस्कस थ्रो मुकाबले में स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि हिम्मत के आगे सब कुछ संभव है।
विजेता कुसुम का गांव पहुंचने पर फूलमालाओं के साथ जोरदार स्वागत किया गया। कुसुम का अभी हाल ही में रोड एक्सीडेंट हुआ था और मात्र दस दिनों की प्रैक्टिस में ही गोल्ड मेडल जीतना खुद कुसुम के लिए आश्चर्यजनक है। गांव नाड़ा निवासी संजय पांचाल की पत्नी कुसुम पांचाल बचपन से ही चल नहीं पाती थी। कुसुम की मां उसे स्कूल छोड़ आती।
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डबल एमए, बीएड, एमफिल और पीएचडी कर चुकी कुसुम
कुसुम को बचपन से ही पढ़ने का शौक रहा और इसी शौक और मेहनत की बदौलत उसने डबल एमए, बीएड, एमफिल और पीएचडी (लाइब्रेरी साइंस) कर अपनी अपंगता को शिकस्त दी। कुसुम ने अपने खेलों की शुरुआत 2016 में पंचकूला में आयोजित नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप से की। यहां भाला फेंक में उसने कांस्य पदक प्राप्त किया। इसके उपरांत कुसुम की किडनी 80 प्रतिशत तक फेल हो गई। दो ऑपरेशन होने के उपरांत वह दोबारा बेड पर आ गई, लेकिन पति संजय का साथ मिला तो फिर 17वीं नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोला फेंक और डिस्कस थ्रो में दो गोल्ड मेडल जीते। अभी हाल ही में फरवरी 2018 में कुसुम का फिर एक्सीडेंट हो गया, जिसके उपरांत वह फिर से बेड पर आ गई, लेकिन उसने हार नहीं मानी और 2018 नेशनल पैरा एथलेटिक्स के डिस्कस थ्रो में फिर गोल्ड पर कब्जा जमा लिया। स्वागत समारोह में गांव के सरपंच धूप सिंह, पूर्व सरपंच चंद्रभान, जिला पार्षद राजेश नाडा, हरदीप, प्रवीण नाडा, कबड्डी खिलाड़ी सुमन, रीतू, मेनका, सोनिया, खुशबू सहित अन्य गण्यमान्य मौजूद थे।
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