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मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के दो नए मरीज दाखिल, दो की मौत
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हिसार। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में वीरवार को ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस के दो नए मरीज दाखिल हुए हैं। इसके अलावा दो मरीजों की ब्लैक फंगस के कारण मौत हो गई। अब इन दिनों म्यूकरमाइकोसिस के नए मरीज कम आ रहे है।
पिछले पखवाड़े अस्पताल में फंगस फैले हुए जबड़े या आंख वाले मरीजों की संख्या अधिक थी। इस वजह से मरीजों का कम से कम 10 दिन में ऑपरेशन के लिए नंबर आता था। तब तक फंगस फैलते हुए दिमाग और फेफड़ों तक चला जाता था, जिस कारण उन दिनों काफी मौतें हुई। दूसरी ओर दवा भी नहीं थी। कई-कई दिन में सरकार की ओर से दवा आती थी। ऐसे में समय पर दवा न इलाज मिलता था। अब दवा का प्रबंध है और मरीजों को मिल रही है। इसलिए मौत का आंकड़ा भी काफी गिरा था। अब चिकित्सकों को पिछले तीन-चार दिनों से ऑपरेशन के समय किसी मरीज का कोई अंग निकालना नहीं पड़ता है। इक्का-दुक्का मरीज का ही कुछ हिस्सा निकालना पड़ता है, जो फंगस के कारण गल चुका हो। बीते दिनों हर रोज चिकित्सकों द्वारा दो से तीन मरीजों के अंग निकाले जा रहे थे। पहले ये अंग अधिक निकाले जा रहे थे। जैसे जबड़ा या आंख। फेफड़े या आंत वाले मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो रहे थे, क्योंकि इन अंगों का गला हुआ हिस्सा निकालने पर मरीज को सांस लेने में मुश्किल हो जाती है।
दो नए मरीज, दो की मौत
वीरवार को अस्पताल में म्यूकरमाइकोसिस के दो नए मरीज दाखिल किए गए है और दो मरीजों की मौत हो गई। इसके अलावा दो मरीजों को अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेजा गया है।
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डॉ. अनूप ग्रोवर, प्रोफेसर, दंत विभाग, मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा।
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पिछले पखवाड़े अस्पताल में फंगस फैले हुए जबड़े या आंख वाले मरीजों की संख्या अधिक थी। इस वजह से मरीजों का कम से कम 10 दिन में ऑपरेशन के लिए नंबर आता था। तब तक फंगस फैलते हुए दिमाग और फेफड़ों तक चला जाता था, जिस कारण उन दिनों काफी मौतें हुई। दूसरी ओर दवा भी नहीं थी। कई-कई दिन में सरकार की ओर से दवा आती थी। ऐसे में समय पर दवा न इलाज मिलता था। अब दवा का प्रबंध है और मरीजों को मिल रही है। इसलिए मौत का आंकड़ा भी काफी गिरा था। अब चिकित्सकों को पिछले तीन-चार दिनों से ऑपरेशन के समय किसी मरीज का कोई अंग निकालना नहीं पड़ता है। इक्का-दुक्का मरीज का ही कुछ हिस्सा निकालना पड़ता है, जो फंगस के कारण गल चुका हो। बीते दिनों हर रोज चिकित्सकों द्वारा दो से तीन मरीजों के अंग निकाले जा रहे थे। पहले ये अंग अधिक निकाले जा रहे थे। जैसे जबड़ा या आंख। फेफड़े या आंत वाले मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो रहे थे, क्योंकि इन अंगों का गला हुआ हिस्सा निकालने पर मरीज को सांस लेने में मुश्किल हो जाती है।
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दो नए मरीज, दो की मौत
वीरवार को अस्पताल में म्यूकरमाइकोसिस के दो नए मरीज दाखिल किए गए है और दो मरीजों की मौत हो गई। इसके अलावा दो मरीजों को अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेजा गया है।
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डॉ. अनूप ग्रोवर, प्रोफेसर, दंत विभाग, मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा।