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कांग्रेस के सामने 19 साल का सूखा: भाजपा की राह भी आसान नहीं, हांसी में हार-जीत का फैसला करेंगे जाट मतदाता

Sun, 22 Sep 2024 09:22 AM IST
नवीन दलाल सुरेंद्र दलाल, हिसार (हरियाणा)
सुरेंद्र दलाल, हिसार (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Sun, 22 Sep 2024 09:22 AM IST
सार

हांसी सीट पर पहले चौधरी भजन लाल का प्रभाव था। वह जिस प्रत्याशी को टिकट दिलाते वह मजबूत स्थिति में रहता था। वर्ष 2005 में भजन लाल ने कांग्रेस से टिकट अमीरचंद मक्कड़ को दिलवाई। अमीरचंद मक्कड़ कांग्रेस की टिकट पर विधायक बने।

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19 years of drought in front of Congress, BJP path also not easy, Jat voters decide victory or defeat in Hansi
भाजपा-कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हांसी विधानसभा सीट पर कांग्रेस-भाजपा की आमने-सामने की टक्कर होती दिख रही है। कांग्रेस जहां 19 वर्षों का सूखा खत्म करना चाहती है, वहीं भाजपा के लिए भी राह इस बार इतनी आसान नहीं है। जजपा, इनेलो, आप सहित अन्य दल जीतने की स्थिति में तो नहीं दिख रहे लेकिन किसी को जीत दिलाने या हराने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

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ग्रामीण व शहरी मिश्रित इस क्षेत्र में आज तक कोई भी विधायक लगातार दो बार नहीं जीत सका। जाट बहुल इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने पंजाबी प्रत्याशी पर दांव लगाया है। भाजपा ने निवर्तमान विधायक विनोद भ्याना पर भरोसा कायम रखा है तो कांग्रेस ने तीन बार विधायक रहे अमीरचंद मक्कड़ के पोते राहुल मक्कड़ को प्रत्याशी बनाया है।
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इस सीट पर पहले चौधरी भजन लाल का प्रभाव था। वह जिस प्रत्याशी को टिकट दिलाते वह मजबूत स्थिति में रहता था। वर्ष 2005 में भजन लाल ने कांग्रेस से टिकट अमीरचंद मक्कड़ को दिलवाई। अमीरचंद मक्कड़ कांग्रेस की टिकट पर विधायक बने। चौधरी भजनलाल ने हजकां बनाकर 2009 में अपनी पार्टी से विनोद भ्याना को टिकट दी, फिर भ्याना जीते। 2014 में कुलदीप बिश्नोई की पत्नी रेणुका बिश्नोई यहां से हजकां के टिकट पर चुनाव जीतीं। हालांकि 2019 में कांग्रेस में रहते हुए कुलदीप बिश्नोई ने हांसी की सीट अपने समर्थक ओमप्रकाश पंघाल को टिकट दिलवाई लेकिन उनको काफी कम वोट मिले। यह कांग्रेस की इस सीट पर सबसे बुरी हार थी।

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भाजपा विकास को बना रही मुद्दा, कांग्रेस उसी को बना रही हथियार

भाजपा का जातीय समीकरण का गणित यहां गड़बड़ा रहा है। ऐसे में वह विकास के नाम पर यहां रण में है। भाजपा हांसी को पुलिस जिला बनाने का क्रेडिट लेते हुए पहली कलम से हांसी को जिला बनाने का चुनावी वादा कर रही है। कांग्रेस भी विकास के मुद्दे पर ही घेर रही है। कांग्रेस बड़े उद्योग स्थापित न होना, बेरोजगारी, बेसहारा पशु, कानून व्यवस्था, शहर में जलभराव, सीवरेज व्यवस्था के मुद्दे पर भाजपा को घेरने का प्रयास कर रही है। 2019 के चुनाव में भाजपा का 75 पार का नारा जबरदस्त तरीके से चल रहा था, इस बार ऐसा नहीं है। ऐसे में विनोद भयाना सीट बचाने के लिए पूरा जोर लगाए हुए हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस के राहुल मक्कड़ उनसे सीट छीनने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।

जाट बहुल होने के बावजूद केवल एक बार जाट विधायक बना

जातीय समीकरणों के हिसाब से हांसी हलका जाट बहुल है। इस सीट पर कुल 2 लाख 3 हजार मतदाता हैं। जिसमें 65 हजार शहरी तथा बाकी ग्रामीण मतदाता है। करीब 67 हजार जाट व 20 हजार पंजाबी मतदाता है। इसके बावजूद यहां जाट प्रत्याशी केवल एक बार ही जीता है। दानवीर सेठ छाजुराम के पोते पीके चौधरी 1987 में भाजपा से विधायक बने थे। उनके बाद कोई भी जाट नेता इस सीट से जीत दर्ज नहीं कर पाया।

पिछले तीन चुनावों का परिणाम

साल       पार्टी प्रत्याशी वोट          मिले
2019  भाजपा विनोद भ्याना        53191
2014  हजकां रेणुका बिश्नोई       46335
2009  हजकां विनोद भ्याना       36522

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