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आग-आग की आवाज के साथ दौड़ पड़े कर्मी, हरकत में आई टीम
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हिसार। भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन के धांसू रोड स्थित एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में आपातकालीन विनाश प्रबंधन योजना डिजास्टर कंट्रोल मैनेजमेंट प्लान के तहत मॉक ड्रिल करवाई गई। इस दौरान दर्शाया गया कि संयंत्र में जब सामान्य परिचालन चल रहा था, तब अचानक एलपीजी के स्टोरेज टैंक की पाइपलाइन से गैस रिसाव शुरू हो गया, जिसे देखते ही वहां कार्यरत कर्मचारी ने लीक-लीक चिल्लाना शुरू किया और सह कर्मचारी ने मैनुअल कॉल प्वाइंट दबाया।
इससे समस्त संयंत्र में परिचालन बंद हो गया व आपातकालीन सायरन बजने लगा। इसी दौरान एलपीजी रिसाव को रोकने की कोशिश में पाइपलाइन ने आग पकड़ ली और वहां कार्यरत कर्मचारी ने 10 किलोग्राम का अग्निशमन यंत्र चलाया। इसके तुरंत बाद फायर फाइटिंग टीम ने अपनी स्थिति संभाली और आग बुझाने की कोशिश की। आग न बुझने के कारण फायर चीफ द्वारा डिजास्टर घोषित किया गया। फायर फाइटिंग टीम ने डीसीपी, मॉनीटर, हाइड्रेंट व स्प्रिंकलर चलाकर आग पर काबू पा लिया। ड्रिल का जायजा लेने के लिए हिसार की सहायक औद्योगिक इकाइयों जिंदल स्टेनलेस स्टील, जिंदल इंडस्ट्री, एचपी कॉटन, डीसीएम के सुरक्षा अधिकारियों ने पहुंच कर इस हादसे को टालने में मदद की व आवश्यक सुझाव दिए। ड्रिल के बाद उन्होंने बताया कि इस तरह की ड्रिल करते रहने से हमारी किसी भी दुर्घटना का सामना करने की तैयारी बनी रहती है। ड्रिल में सुरक्षा अधिकारी नवीन कुमार, सुरेंद्र चौहान, हरी शंकर, सुदर्शन मुखीजा, रजिंद्र सिंह, रामसिंह, प्रेम चुघ, धर्मपाल जोशी, सतबीर सोलंकी ने अपना योगदान दिया।
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इससे समस्त संयंत्र में परिचालन बंद हो गया व आपातकालीन सायरन बजने लगा। इसी दौरान एलपीजी रिसाव को रोकने की कोशिश में पाइपलाइन ने आग पकड़ ली और वहां कार्यरत कर्मचारी ने 10 किलोग्राम का अग्निशमन यंत्र चलाया। इसके तुरंत बाद फायर फाइटिंग टीम ने अपनी स्थिति संभाली और आग बुझाने की कोशिश की। आग न बुझने के कारण फायर चीफ द्वारा डिजास्टर घोषित किया गया। फायर फाइटिंग टीम ने डीसीपी, मॉनीटर, हाइड्रेंट व स्प्रिंकलर चलाकर आग पर काबू पा लिया। ड्रिल का जायजा लेने के लिए हिसार की सहायक औद्योगिक इकाइयों जिंदल स्टेनलेस स्टील, जिंदल इंडस्ट्री, एचपी कॉटन, डीसीएम के सुरक्षा अधिकारियों ने पहुंच कर इस हादसे को टालने में मदद की व आवश्यक सुझाव दिए। ड्रिल के बाद उन्होंने बताया कि इस तरह की ड्रिल करते रहने से हमारी किसी भी दुर्घटना का सामना करने की तैयारी बनी रहती है। ड्रिल में सुरक्षा अधिकारी नवीन कुमार, सुरेंद्र चौहान, हरी शंकर, सुदर्शन मुखीजा, रजिंद्र सिंह, रामसिंह, प्रेम चुघ, धर्मपाल जोशी, सतबीर सोलंकी ने अपना योगदान दिया।
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